पुणे 29 जनवरी 2026 : “जब विमान एक तरफ झुका हुआ दिखा तो बच्चे घबराकर चिल्लाने लगे कि यह गिरने वाला है। तभी वह सच में गिर पड़ा। हम जान बचाकर मोटरसाइकिल से वहाँ की ओर दौड़े। तब तक विमान से कोई बाहर निकलने की कोशिश करता दिखाई दे रहा था। उसी पल जोरदार धमाका हुआ और हमारी आँखों के सामने सब कुछ खत्म हो गया। इस विस्फोट ने अजित दादा को हमसे छीन लिया… यह सदमा इतना बड़ा है कि अभी तक संभल नहीं पाए हैं।”
यह बातें गोजूबावी, बारामती एयरपोर्ट के गाँव के सरपंच कल्याण आटोळे ने कही। बताते हुए उनकी आँखों से आँसू नहीं रुक रहे थे।
अजित पवार के हादसे की पहली सूचना पुलिस को देने वाले आटोळे ने ‘महाराष्ट्र टाइम्स’ को पूरी घटना बताई। उन्होंने कहा, “गोजूबावी एयरपोर्ट पर विमानों का आना-जाना हमारे लिए नया नहीं है। हमें पता था कि आज ‘दादा’ (अजित पवार) विमान से आने वाले हैं। लेकिन अचानक विमान की आवाज कुछ अलग लगी। देखा तो विमान बाईं ओर झुकते हुए जमीन पर गिर पड़ा और उससे धुआँ निकलने लगा। हम सब ‘गिर गया… गिर गया…’ चिल्लाते हुए मोटरसाइकिल से वहाँ की ओर दौड़े।”
यह हादसा सुबह करीब 8:44 बजे हुआ। आटोळे उस समय आईडीबीआई बैंक के पास डेयरी में थे। उन्होंने बताया कि आम तौर पर विमान की आवाज से वे परिचित हैं, क्योंकि यहाँ प्रशिक्षण उड़ानें होती रहती हैं और बड़े नेताओं व उद्योगपतियों के दौरे भी होते हैं। लेकिन इस बार आवाज अलग थी। विमान बाईं ओर झुककर तेजी से नीचे आ रहा था। अगर वह आधा मिनट और आगे जाता तो सीधे गाँव में गिरता। रनवे की ओर जाते समय ही वह गिर पड़ा।
उन्होंने घबराकर ‘112’ इमरजेंसी नंबर पर फोन किया, लेकिन तकनीकी निर्देश सुनाई दे रहे थे। तब उन्होंने अजित पवार के करीबी किरण गुजर और एक परिचित पुलिस अधिकारी को फोन किया।
“जब हम पास पहुँचे तो लगा कोई विमान से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है। तभी जोरदार विस्फोट हुआ और हम डरकर पीछे हट गए। शायद विस्फोट से पहले दादा बाहर निकलने का प्रयास कर रहे थे। वह दृश्य देखकर दिल काँप उठा। हमारे पैर काँप रहे थे। विमान का दरवाजा खुला था, शायद यात्री बाहर कूदकर जान बचाना चाहते थे। अचानक बम जैसे जोरदार धमाके के साथ आग की लपटें उठीं और हम पीछे भागे। फिर हिम्मत जुटाकर पास गए तो दृश्य बेहद दर्दनाक था।”
किरण गुजर भी वहाँ पहुँच चुके थे और रो पड़े थे। गाँववालों ने मिलकर विमान से चार लोगों को बाहर निकाला—तीन पुरुष और एक महिला। उनके अंगरक्षक का चेहरा साफ दिख रहा था। घर से चादरें लाकर शवों को ढका गया। उनमें से एक अजित पवार थे, इस पर विश्वास करना मुश्किल था, लेकिन किरण गुजर ने उनकी पहचान की।
आटोळे ने बताया कि पुलिस और गाँववाले मौके पर तो पहुँच गए थे, लेकिन आगे क्या करना है किसी को समझ नहीं आ रहा था। वहाँ तक पहुँचने का सही रास्ता भी नहीं था। सरपंच होने के नाते उन्होंने तुरंत रास्ता खुलवाया। नगर पालिका का पानी का टैंकर आया, लेकिन थोड़ी देर में पानी खत्म हो गया। इतनी बड़ी घटना के बावजूद पूरी व्यवस्था असहाय नजर आ रही थी।
सबसे दुखद बात यह रही कि राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का शव करीब आधे घंटे तक वहीं पड़ा रहा। बाद में एंबुलेंस आई और शवों को हटाया गया। “हमारे प्रिय अजित पवार को इस हालत में देखना पड़ेगा, यह कभी सपने में भी नहीं सोचा था। लेकिन आज वही हो गया… अब भी यकीन नहीं हो रहा,” आटोळे ने भावुक शब्दों में कहा।
