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वायु प्रदूषण की अनदेखी पर मुंबई महापालिका को उच्च न्यायालय का गंभीर फटकार

मुंबई 25 दिसंबर 2025 : मुंबई महापालिका ने शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या की अनदेखी की है। उच्च न्यायालय ने बुधवार को महापालिका पर कड़ी चेतावनी दी कि शहर में प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। 12,500 करोड़ रुपये से अधिक के 125 निर्माण प्रोजेक्टों को मंजूरी देने के सवाल पर न्यायालय ने कहा कि नियंत्रण आपके हाथ से बाहर चला गया है।

न्यायालय के निर्देश और चिंता:

  • दो साल पहले मुंबई और महानगर क्षेत्र की हवा की गुणवत्ता में गिरावट से नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न होने पर सुप्रीम कोर्ट की तरह स्वप्रेरणा (सुओ मोटो) से याचिका दर्ज की गई थी।
  • न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड़ की खंडपीठ ने महापालिका आयुक्त भूषण गगराणी और MPCB सदस्य सचिव देवेंद्र सिंह को पेश होने और ठोस उपाय योजना पेश करने का आदेश दिया।
  • न्यायालय ने महापालिका की इच्छाशक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि नियमों का पालन नहीं हो रहा है और 28 दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने की ठोस व्यवस्था नहीं दिख रही है।
  • निर्माण और बड़े प्रोजेक्टों में नियमित निरीक्षण करने और नियमों का पालन न करने पर कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

महापालिका की कार्रवाई और शिकायतें:

  • पिछले वर्ष की तुलना में स्थिति और खराब थी, महापालिका के वरिष्ठ वकील एस.यू. कामदार ने बताया।
  • 94 वार्डों में कार्यरत पथकों में से मंगलवार को केवल 39 साइटों का निरीक्षण हुआ।
  • महापालिका आयुक्त ने बताया कि शहर में 125 बड़े प्रोजेक्टों की मंजूरी दी गई है, जिसकी संख्या शहर के आकार के हिसाब से बहुत अधिक है।
  • न्यायालय ने निर्देश दिया कि पुराने आदेशों का पालन होने तक नई मंजूरी नहीं दी जाए।

कामबंद नोटिस और निगरानी:

  • पिछले वर्ष में 3,497 कामबंद नोटिस जारी किए गए, 2,100 से अधिक साइटों पर काम रोका गया। नियमों का पालन होने पर 1,518 नोटिस वापस लिए गए।
  • उच्च न्यायालय की समिति ने 36 साइटों की जांच की, जिनमें 25 शहर में थीं और 8 पर कामबंद नोटिस जारी किए गए।

भविष्य के निर्देश:

  • प्रत्येक वार्ड टीम को कम से कम दो स्थानों पर आकस्मिक निरीक्षण करने के लिए कहा गया।
  • टीमों को बटन कैमरे और GPS उपकरण दिए जाएंगे ताकि उनका काम कड़ाई से मॉनिटर किया जा सके।

न्यायालय ने साफ संकेत दिया है कि अगर महापालिका प्रदूषण नियंत्रण में ठोस कदम नहीं उठाती है, तो नई निर्माण परियोजनाओं की मंजूरी पर रोक लगाई जा सकती है।

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