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लुधियाना में मंत्री के घर के बाहर कर्मचारियों का प्रदर्शन, पावरकॉम संपत्तियों की बिक्री के आरोप पर सरकार घिरी

29 मार्च 2026    पंजाब के Ludhiana में बिजली विभाग से जुड़े कर्मचारियों, इंजीनियरों और पेंशनरों ने राज्य सरकार के खिलाफ बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन राज्य के बिजली मंत्री Sanjeev Arora के आवास के बाहर आयोजित किया गया, जहां हजारों की संख्या में लोग जुटे और सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

यह विरोध प्रदर्शन पावर सेक्टर जॉइंट एक्शन कमेटी (PSJAC) के बैनर तले आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पंजाब सरकार Punjab State Power Corporation Limited (पावरकॉम) की जमीनों और संपत्तियों को “मॉनेटाइजेशन” के नाम पर बेचने की योजना बना रही है।

प्रदर्शनकारियों ने इसे बिजली विभाग के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बताया। उनका कहना है कि ये जमीनें पहले से ही सार्वजनिक उपयोग और बिजली ढांचे के विकास के लिए अधिग्रहित की गई थीं, इसलिए इन्हें बेचना गलत और जनविरोधी कदम होगा।

जॉइंट एक्शन कमेटी के नेताओं ने कहा कि राज्य में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है और ऐसे समय में इन जमीनों का उपयोग नए सब-स्टेशन, कार्यालय और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि अगर ये संपत्तियां निजी हाथों में चली गईं तो भविष्य में बिजली सेवाओं के विस्तार में बड़ी दिक्कतें आएंगी।

प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित Electricity Amendment Bill 2025 का भी विरोध किया। उनका कहना है कि यह बिल निजी कंपनियों को बिजली वितरण क्षेत्र में बढ़ावा देगा, जिससे सरकारी नियंत्रण कमजोर होगा और आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।

इस पूरे विवाद के बीच एक अहम कानूनी पहलू भी सामने आया है। Punjab and Haryana High Court ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए पावरकॉम को इन संपत्तियों की बिक्री या किसी भी प्रकार की आगे की कार्रवाई से फिलहाल रोक दिया है।

प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने कहा कि पावरकॉम की संपत्तियां केवल विभागीय उपयोग के लिए हैं और इन्हें किसी भी स्थिति में रियल एस्टेट या निजी कंपनियों को नहीं सौंपा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार कॉरपोरेट हितों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठा रही है।

प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों को नहीं माना गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने राज्यभर में बड़े स्तर पर धरना-प्रदर्शन और हड़ताल की भी चेतावनी दी है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी पंजाब के कई शहरों में पावर सेक्टर के कर्मचारियों द्वारा इसी मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन किए जा चुके हैं। विभिन्न यूनियनों और संगठनों ने लगातार सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की है कि वह इस प्रस्ताव को वापस ले।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल संपत्तियों की बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के बिजली क्षेत्र के भविष्य से जुड़ा हुआ है। यदि सार्वजनिक संपत्तियों का निजीकरण होता है, तो इससे बिजली दरों, सेवा गुणवत्ता और सरकारी नियंत्रण पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है।

दूसरी ओर, सरकार की ओर से अभी तक इस मामले पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, पहले भी सरकार ने “मॉनेटाइजेशन” को वित्तीय सुधार और संसाधनों के बेहतर उपयोग का हिस्सा बताया है।

इस बीच, लुधियाना में हुए इस प्रदर्शन ने राजनीतिक माहौल को भी गर्म कर दिया है। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को उठाना शुरू कर दिया है और सरकार से पारदर्शिता की मांग की है।

फिलहाल, मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा में है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और क्या कर्मचारियों का आंदोलन और तेज होता है।

सारांश

लुधियाना में कर्मचारियों ने मंत्री के घर के बाहर पावरकॉम संपत्तियों की कथित बिक्री के खिलाफ प्रदर्शन किया। हाईकोर्ट ने फिलहाल कार्रवाई पर रोक लगाई, विवाद बढ़ता जा रहा है।

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