लुधियाना 05 जनवरी 2026 : लुधियाना में पद्म भूषण से सम्मानित वर्धमान ग्रुप के चेयरमैन एस.पी. ओसवाल से हुई करीब 7 करोड़ रुपए की साइबर ठगी के मामले में जांच ने नई दिशा पकड़ ली है। इस केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री के बाद लुधियाना पुलिस की जांच और तेज हो गई है। ED द्वारा गिरफ्तार किए गए असम निवासी अर्पित राठौर और रूमी कलिता को अब लुधियाना साइबर क्राइम पुलिस प्रोडक्शन वारंट पर लाने की तैयारी कर रही है। पुलिस इन दोनों से मामले की गहराई से पूछताछ करेगी ताकि पूरे ठगी नेटवर्क का खुलासा किया जा सके। रूमी कलिता पहले से ही लुधियाना पुलिस की वांछित सूची में शामिल था।
ED की कार्रवाई से जांच को मजबूती
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, भले ही अर्पित राठौर का नाम पहले सीधे तौर पर जांच में सामने नहीं आया था, लेकिन ED की जांच में उसके संदिग्ध भूमिका उजागर होने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया। वहीं रूमी कलिता पहले से ही शक के घेरे में था। ED ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत कार्रवाई करते हुए दोनों को हिरासत में लिया है। अधिकारियों का कहना है कि साइबर ठगी से जुड़ी मूल जांच लुधियाना पुलिस कर रही है, जबकि ED ने पैसों के लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच शुरू की है। ED से मिले इनपुट से पुलिस को केस मजबूत करने में मदद मिलेगी।
पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां
इस मामले में लुधियाना पुलिस मई 2025 में गुवाहाटी से अतनु चौधरी को गिरफ्तार कर चुकी है। चौधरी को इससे पहले सितंबर 2024 में भी पकड़ा गया था, लेकिन जांच में सहयोग करने के निर्देशों के साथ उसे जमानत मिल गई थी। बाद में वह पुलिस के सामने पेश नहीं हुआ। जांच के दौरान पुलिस ने कई अन्य संदिग्धों की पहचान की है, जिनमें निम्मी भट्टाचार्जी, आलोक रांगी, गुलाम मोर्तजा, संजय सूत्रधार, रिंटू, जाकिर और रूमी कलिता शामिल हैं, जिनमें से रूमी कलिता की गिरफ्तारी अब ED ने की है।
पूरा मामला
लुधियाना साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में 31 अगस्त 2024 को इस मामले की FIR दर्ज की गई थी। शिकायत के अनुसार, साइबर ठगों ने योजनाबद्ध तरीके से बुजुर्ग उद्योगपति को अपने जाल में फंसाया, उन पर लगातार नजर रखी और संपर्क सीमित रखने के निर्देश दिए। इसी दौरान उनसे बड़ी रकम की ठगी को अंजाम दिया गया।
