29 मार्च 2026 : पंजाब के Ludhiana में DMC (Dayanand Medical College) अस्पताल पर परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनके मृतक सदस्य का शव अस्पताल ने बिना उचित अनुमति अवैध रूप से रोका रखा, जिससे उन्हें मानसिक और भावनात्मक कष्ट का सामना करना पड़ा।
परिजनों का कहना है कि मृतक की समय पर अंतिम संस्कार की व्यवस्था करने के लिए वे अस्पताल पहुंचे, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने अनावश्यक विलंब किया और शव को देर तक हफ्तों तक रोक रखा। इस कार्रवाई के पीछे अस्पताल प्रशासन की कथित अव्यवस्था और गैरकानूनी प्रक्रिया को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
इस मामले में परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल ने शव की रिहाई के लिए अतिरिक्त दस्तावेज, फीस या मेडिकल रिपोर्ट की मांग की, जबकि उनकी मांग केवल शव को परिवार को सौंपने की थी। परिजन इसे मानसिक यातना और मानवीय अधिकारों का उल्लंघन मान रहे हैं।
स्थानीय लोगों और मरीजों के अनुसार, यह कोई पहला मामला नहीं है। कई बार अस्पताल प्रशासन ने शव की रिहाई में अनावश्यक देरी की है, जिससे परिवारों को दुख झेलना पड़ा। परिजन और स्थानीय नागरिक इस मामले में प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
DMC अस्पताल प्रशासन ने अभी तक इस मामले पर कोई विस्तृत बयान नहीं दिया है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन दावा कर सकता है कि शव को नियमों और कानूनी प्रक्रिया के तहत रोका गया, जैसे कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, पुलिस जांच या अन्य आवश्यक दस्तावेजों का इंतजार।
इस विवाद ने शहर में अस्पताल और स्वास्थ्य सेवाओं पर आम जनता का भरोसा चुनौतीपूर्ण बना दिया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि शव को अवैध रूप से रोकना संवैधानिक और मानवीय अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है, और इसमें कार्रवाई की गुंजाइश बनती है।
परिजनों ने जिला प्रशासन से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि न्याय नहीं मिला तो वे कानूनी और सामाजिक माध्यमों से आवाज उठाएंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्वास्थ्य संस्थानों में ऐसे मामलों को रोकने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और पारदर्शी प्रक्रिया होना जरूरी है। परिवारों को समय पर जानकारी, उचित दस्तावेज़ प्रक्रिया और सम्मानपूर्वक शव की रिहाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
इस घटना ने स्वास्थ्य और मानवाधिकार क्षेत्र में चर्चा को भी जन्म दिया है। नागरिक संगठन इस मुद्दे पर अस्पताल प्रशासन और राज्य सरकार दोनों से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
स्थानीय मीडिया ने भी इस मामले को प्रमुखता से कवर किया है, और इसे मानवाधिकार और स्वास्थ्य प्रशासन के नजरिए से गंभीर मामला बताया है।
परिजन और स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच करेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाएगा।
सारांश
लुधियाना में परिजनों ने DMC अस्पताल पर आरोप लगाया कि अस्पताल ने शव अवैध रूप से रोका। प्रशासन से न्याय की मांग की गई, मामला जांच और कार्रवाई के लिए उठा।
