दिल्ली 31 मार्च 2026 : उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने सोमवार को भलस्वा लैंडफिल साइट का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बायो-रेमीडिएशन कार्यों की प्रगति की समीक्षा की और स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप दिल्ली को इन गंदगी के ढेरों से जल्द निजात दिलाना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
इस दौरान उपराज्यपाल ने साइट पर काम कर रहे श्रमिकों से भी संवाद किया। उन्होंने श्रमिकों की कार्यप्रणाली और उन्हें पेश आने वाली दिक्कतों को समझा। एलजी ने स्पष्ट आदेश दिया कि संबंधित एजेंसिया साइट पर काम करने वाले हर कर्मचारी के लिए पर्याप्त स्वास्थ्य सुरक्षा उपाय और आवश्यक उपकरण सुनिश्चित करें।
निरीक्षण के दौरान उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिया कि कचरा प्रबंधन के लिए केवल पारंपरिक तरीकों पर निर्भर न रहें। एलजी ने कहा कि विश्व स्तर पर कचरा निस्तारण के क्षेत्र में आ रही नवीनतम और उभरती हुई तकनीक को अपनाने की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों से परामर्श कर कार्ययोजना में तेजी लाएं
इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय मानकों का अध्ययन करें और विशेषज्ञों से परामर्श कर कार्ययोजना में तेजी लाएं। वहीं, भलस्वा, गाजीपुर और ओखला लैंडफिल साइट्स पर वर्षों से जमा ”लेगेसी वेस्ट” (पुराना कचरा) तो एक चुनौती है ही, लेकिन प्रतिदिन आने वाला फ्रेश वेस्ट इस समस्या को और जटिल बना रहा है।
एलजी ने एमसीडी को निर्देश दिए कि इन साइटों पर नए कचरे के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं। उन्होंने इस अभियान में जन-भागीदारी को अनिवार्य बताते हुए कहा कि दिल्ली भर की रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन और मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन को इस मिशन से जोड़ा जाए।
एलजी ने जोर दिया कि घरों और बाजारों से ही कूड़े को गीला और सूखा श्रेणियों में अलग-अलग करना सुनिश्चित किया जाए। कूड़े का स्रोत पर ही पृथक्करण होने से बायो-रेमीडिएशन की प्रक्रिया कई गुना तेज हो जाएगी।
गर्मी में आग की घटनाओं को लेकर चेतावनी
गर्मी की आहट के साथ ही लैंडफिल साइट्स पर मीथेन गैस के कारण लगने वाली आग एक बड़ी समस्या बन जाती है। इसको लेकर उपराज्यपाल ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि लैंडफिल साइटों पर आग की घटनाओं को रोकने के लिए सभी एहतियाती कदम अभी से उठा लिए जाएं। इसके लिए फायर फाइटिंग सिस्टम और निगरानी तंत्र को चौबीसों घंटे अलर्ट पर रखने को कहा गया।
अधिकारियों उपराज्यपाल को बताया कि 70 एकड़ में फैली भलस्वा लैंडफिल साइट में नवंबर 2022 तक 73 लाख एमटी कचरा जमा हो गया था। जहां छह दिसंबर 2024 तक 45 लाख एमटी कचरे की बायो-माइनिंग की जा चुकी थी, वहीं उसके बाद से 39.80 लाख एमटी और कचरे की बायो-माइनिंग की गई हैं।
इसमें ताजा कचरा भी शामिल है, जो लगभग चार हजार टन प्रतिदिन की दर से जमा हो रहा था। अब 13.5 लाख एमटी पुराना कचरा और मार्च 2025 से अब तक जमा हुआ 14 लाख एमटी ताजा कचरा बायो-माइनिंग के लिए बचा है। इस काम के लिए एलजी को बताया गया कि अतिरिक्त ट्रामलिंग मशीनें लगाई जा रही हैं।
