13 अप्रैल 2026* देश की राजधानी नई दिल्ली का प्रतिष्ठित खान मार्केट आज अपने 75 साल पूरे कर चुका है। यह बाजार अपने शुरुआती दौर में शरणार्थियों के लिए बसाया गया था, लेकिन समय के साथ यह देश के सबसे चर्चित और महंगे बाजारों में शामिल हो गया है।
खान मार्केट की स्थापना विभाजन के बाद हुई थी, जब पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को बसाने के लिए इस बाजार को विकसित किया गया था। शुरुआत में यह एक साधारण बाजार था, जहां रोजमर्रा की जरूरतों का सामान मिलता था, लेकिन धीरे-धीरे इसका स्वरूप बदलता गया।
आज यह बाजार हाई-एंड ब्रांड्स, कैफे, रेस्टोरेंट्स और बुटीक स्टोर्स के लिए जाना जाता है। यहां देश-विदेश के पर्यटक भी बड़ी संख्या में आते हैं और इसे दिल्ली की लाइफस्टाइल का एक अहम हिस्सा माना जाता है।
सोशल मीडिया के दौर में खान मार्केट की लोकप्रियता और भी बढ़ गई है। यहां की तस्वीरें, कैफे और ट्रेंडी दुकानों के वीडियो अक्सर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल होते रहते हैं, जिससे इसकी पहचान और मजबूत हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खान मार्केट का यह बदलाव शहर के विकास और बदलती जीवनशैली का प्रतीक है। यह बाजार पारंपरिक और आधुनिक संस्कृति का एक अनोखा संगम पेश करता है।
हालांकि इसके बढ़ते दाम और महंगे किराए को लेकर कई बार आलोचना भी होती रही है। छोटे दुकानदारों के लिए यहां टिक पाना चुनौतीपूर्ण हो गया है, जिससे बाजार की मूल पहचान पर भी सवाल उठते हैं।
इसके बावजूद खान मार्केट अपनी खास पहचान बनाए हुए है और यह दिल्ली के प्रमुख आकर्षणों में से एक बना हुआ है।
कुल मिलाकर खान मार्केट का यह 75 साल का सफर एक साधारण बाजार से लेकर एक ग्लोबल लाइफस्टाइल हब बनने की कहानी को दर्शाता है, जो समय के साथ लगातार बदलता रहा है।
