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Noida केस में 10 साल बाद मिला इंसाफ, 68 साल की उम्र में आरोप से बरी

17 मार्च 2026 : न्याय मिलने में भले ही वक्त लगा, लेकिन आखिर में सच की जीत हुई। नोएडा की एक विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने दुष्कर्म के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे एक 68 वर्षीय बुजुर्ग को 10 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद बाइज्जत बरी कर दिया है। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ कोई भी ठोस सबूत पेश करने में नाकाम रहा।

क्या था पूरा मामला?
मामले की शुरुआत साल 2016 में हुई थी। नोएडा सेक्टर-20 कोतवाली में एक व्यक्ति ने अपनी नाबालिग बेटी के अपहरण और दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए 2 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए पॉक्सो एक्ट के तहत चार्जशीट दाखिल की और दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया। बाद में, एक आरोपी के नाबालिग पाए जाने पर उसका केस किशोर न्याय बोर्ड को ट्रांसफर कर दिया गया, जबकि बुजुर्ग आरोपी के खिलाफ पॉक्सो कोर्ट में सुनवाई चलती रही।

अदालत में क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष (अभियोजन) ने कोर्ट के सामने 5 अहम गवाह पेश किए, जिनमें पीड़िता, उसके माता-पिता, जांच अधिकारी और मेडिकल टीम शामिल थी। हालांकि, लंबी जिरह के बावजूद ये गवाह बुजुर्ग के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं कर सके।

बचाव पक्ष की दलील: साजिश का शिकार
बुजुर्ग के वकील ने अदालत में मजबूती से पक्ष रखा और तीन गवाह पेश किए। बचाव पक्ष ने दो मुख्य बातें कहीं। पहली बात यह है कि जिस व्यक्ति ने केस दर्ज कराया था, उसका बुजुर्ग के साथ पुराना संपत्ति विवाद चल रहा था। आरोप लगाया गया कि इसी रंजिश के चलते बुजुर्ग को झूठे केस में फंसाया गया। दूसरी बात यह है कि घटना के कथित समय पर बुजुर्ग अपनी बीमार मां की सेवा के लिए शहर से बाहर थे।

कोर्ट का फैसला: सबूतों का अभाव
दोनों पक्षों को सुनने के बाद विशेष पॉक्सो अदालत ने अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी पर लगे आरोपों की पुष्टि के लिए ठोस और भरोसेमंद साक्ष्य पेश करने में असफल रहा है। कोर्ट ने बुजुर्ग को सभी आरोपों से दोषमुक्त (Acquitted) करते हुए बरी कर दिया।

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