08 फ़रवरी2026: पंजाब में धान खरीद को लेकर बड़े घोटाले के आरोप सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है। आरोप है कि 2025–26 सीजन के दौरान राज्य की मंडियों में फर्जी खरीद के जरिए लगभग ₹6,000 से ₹10,000 करोड़ तक का खेल हुआ।
मामले की शिकायत संगरूर के एक कमीशन एजेंट-cum-राइस मिल मालिक की ओर से की गई बताई जा रही है। आरोपों के मुताबिक मंडियों में कमीशन एजेंटों ने किसानों के नाम पर फर्जी ‘जे’ फार्म जारी किए। इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भुगतान किसानों के खातों में दिखाया गया, लेकिन असल में पैसा किसानों, एजेंटों, राइस मिलरों और खरीद एजेंसियों से जुड़े कुछ कर्मचारियों के बीच बांट लिया गया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि बाद में सस्ता धान दूसरे राज्यों से लाया गया, जो न्यूनतम समर्थन मूल्य से करीब ₹600 प्रति क्विंटल कम दर पर खरीदा गया। इसे पंजाब में MSP पर खरीदा गया दिखाकर पूरा भुगतान उठा लिया गया।
कथित तौर पर प्रक्रिया ऐसे चली कि एजेंट ने गेट पास जारी कर धान को राइस मिल में ट्रांसफर दिखाया। मिलर ने बिना धान प्राप्त किए ही कागजों में उसकी रसीद दर्ज कर दी और बदले में नकद ले लिया। शिकायत के अनुसार एजेंट को ₹45 प्रति क्विंटल कमीशन और ₹55 मंडी खर्च मिला। खरीद एजेंसी के स्टाफ और मंडी बोर्ड कर्मचारियों को भी प्रति क्विंटल अलग-अलग रकम मिलने का आरोप है।
