31 जनवरी 2026 : सरकारी नौकरी और योजनाओं का लाभ लेने के लिए फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने वालों पर अब स्वास्थ्य विभाग सख्त कार्रवाई करने जा रहा है। शासन के निर्देश पर पिछले करीब 20 वर्षों में जारी लगभग 28 हजार दिव्यांग सर्टिफिकेट की दोबारा जांच शुरू कर दी गई है। जांच में जिन लोगों के प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाएंगे, उनकी नौकरी खत्म की जा सकती है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
किस तरह के मामलों पर ज्यादा नजर
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, सबसे ज्यादा शिकायतें आंख, कान और नाक की बीमारी बताकर दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने को लेकर मिली हैं। इसलिए इन मामलों की मेडिकल टीम विशेष रूप से बारीकी से जांच करेगी। इसके लिए विभाग ने नोडल अधिकारी अनवर अंसारी की अध्यक्षता में एक विशेष टीम गठित की है।
जांच कैसे होगी?
वर्ष 2005 के बाद बने सभी सर्टिफिकेट की समीक्षा की जा रही है। वर्ष 2015 के बाद बने ऑनलाइन प्रमाण पत्रों की भी जांच होगी। मेडिकल रिपोर्ट, मेडिकल बोर्ड की संस्तुति और दस्तावेजों की सत्यता देखी जाएगी। कम दिखाई देना, कम सुनाई देना, बोलने में दिक्कत, दुर्घटना के बाद विकलांगता और मानसिक रोग से जुड़े मामलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
फर्जीवाड़े का तरीका क्या था?
अधिकारियों के अनुसार, कई शिकायतों में पाया गया कि 33% दिव्यांगता होने के बावजूद 50–55% दिव्यांगता का प्रमाण पत्र बनवा लिया गया, ताकि सरकारी नौकरी और योजनाओं का लाभ मिल सके।
