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IDFC फर्स्ट बैंक घोटाला : अब तक 11 आरोपी गिरफ्तार, 100 से ज्यादा बैंक खाते फ्रीज

चंडीगढ़ 13 मार्च 2026 आई.डी.एफ.सी. फर्स्ट बैंक घोटाले की जांच में यह सामने आया है कि मुख्य आरोपियों ने कई फर्जी कम्पनियां बनाकर सरकारी धन को अवैध रूप से विभिन्न खातों में ट्रांसफर किया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सरकारी विभागों के खातों से इसे इन फर्जी कम्पनियों के खातों में अनधिकृत रूप से भेजा जाता था। इन कम्पनियों में आर. एस. ट्रेडर्स, कैपको फिंटेक सर्विसेज, एस. आर. आर. प्लानिंग गुरूज प्रा. लिमिटेड और स्वास्तिक देश प्रोजैक्ट आदि शामिल हैं।

विजीलैंस मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ए.सी.बी.) की ए.डी.जी.पी. चारू बाली ने कहा कि गत 23 फरवरी को एस.वी. एंड ए.सी.बी. थाना पंचकूला में आई.डी.एफ. सी. फर्स्ट बैंक और ए. यू. स्मॉल फाइनेंस बैंक के अज्ञात कार्मिकों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। अब तक की जांच में 8 विभागों के 12 बैंक खातों की संलिप्तता सामने आई है जिनमें से 10 खाते आई.डी.एफ.सी. फर्स्ट बैंक सैक्टर-32 चंडीगढ़ और 2 खाते ए. यू. स्मॉल फाइनेंस बैंक में संचालित थे। इस मामले में 16 स्थानों पर गहन छापेमारी की गई है। कुछ स्थानों से वीडियो फुटेज भी ली गई है।

जांच एजेंसी द्वारा अब तक 100 से अधिक बैंक खातों पर डैबिट फ्रीज लगाने के लिए अनुरोध भेजे गए हैं। जांच में सामने आया है कि अभी तक 8 सरकारी विभागों में अनधिकृत लेन-देन सामने आया है उनकी पहचान की जा चुकी है। अभी तक की जांच में कई सरकारी अधिकारी/कर्मचारियों तथा निजी व्यक्तियों की संलिप्तता की भी पहचान की गई है। पुष्टि होने उपरांत विजीलैंस द्वारा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही 10 सम्पत्तियों की पहचान की गई है जिन्हें अपराध से अर्जित धन से खरीदे जाने का तार्किक तौर पर संदेह है। 

आरोपियों में बैंक और सरकारी कर्मचारी शामिल

मामले में अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है जिनमें 6 बैंक कर्मचारी, 4 निजी व्यक्ति और 1 सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। इनमें से 10 आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं जबकि एक आरोपी पुलिस रिमांड पर है। जांच दौरान अब तक 16 स्थानों पर गहन छापेमारी की गई है। इस दौरान सम्पत्तियों की खरीद से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। साथ ही 25 से अधिक इलैक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच साइबर फॉरेंसिक लैब की सहायता से की जा रही है। 6 वाहन भी जब्त किए गए हैं, जिन्हें अपराध की आय से खरीदे जाने का तार्किक तौर पर संदेह है। यह भी सामने आया है कि बैंक रिकॉर्ड में फर्जी डैबिट मेमो तैयार कर या बिना किसी वैध डैबिट मैमो/चैक के ही धनराशि ट्रांसफर की गई। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अनुसार मामले की जांच जारी है और आने वाले समय में और भी महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है।

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