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NRI हर साल कितना पैसा भारत भेजते हैं? GDP में प्रवासी भारतीयों का कितना योगदान

10 जनवरी 2026 : भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सिर्फ देश के अंदर रहने वाले लोग ही नहीं, बल्कि विदेशों में रहने वाले प्रवासी भारतीय (NRI) भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। दुनिया के अलग-अलग देशों में काम कर रहे NRI जो कमाई करते हैं, उसका एक बड़ा हिस्सा वे अपने परिवार और निवेश के लिए भारत भेजते हैं।10 जनवरी 2026 भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सिर्फ देश के अंदर रहने वाले लोग ही नहीं, बल्कि विदेशों में रहने वाले प्रवासी भारतीय (NRI) भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। दुनिया के अलग-अलग देशों में काम कर रहे NRI जो कमाई करते हैं, उसका एक बड़ा हिस्सा वे अपने परिवार और निवेश के लिए भारत भेजते हैं।

यह पैसा न सिर्फ आम लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाता है, बल्कि देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) को भी मजबूती देता है। इसी वजह से भारत आज दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां सबसे ज्यादा रेमिटेंस (विदेश से भेजा गया पैसा) आता है।

साल 2025 में टूटा रिकॉर्ड, सबसे ज्यादा रेमिटेंस भारत आया

साल 2025 में प्रवासी भारतीयों ने भारत को रिकॉर्ड तोड़ रकम भेजी। RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक) की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में NRI ने भारत को 135 बिलियन डॉलर (करीब 11 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा) भेजे। यह अब तक का सबसे बड़ा रेमिटेंस आंकड़ा है। वित्त वर्ष 2024 में यह रकम 118.7 बिलियन डॉलर थी। यानी एक साल में करीब 14% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे साफ है कि विदेशों में काम कर रहे भारतीयों की कमाई और भारत से उनका जुड़ाव दोनों लगातार बढ़ रहे हैं।

पिछले 10 सालों में लगातार बढ़ा NRI का योगदान

बीते एक दशक में भारत को मिलने वाली रेमिटेंस में लगातार इजाफा हुआ है। आईटी, हेल्थकेयर, कंस्ट्रक्शन, इंजीनियरिंग, मिडिल ईस्ट, अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में काम कर रहे भारतीय इस रकम का बड़ा हिस्सा भेजते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका और खाड़ी देशों (UAE, सऊदी अरब, कतर) से सबसे ज्यादा पैसा आता है। डिजिटल ट्रांसफर और UPI जैसी सुविधाओं से पैसा भेजना आसान हुआ है। इसी वजह से हर साल रेमिटेंस का आंकड़ा नए रिकॉर्ड बना रहा है। 

देश की GDP में कितना योगदान देते हैं NRI?

प्रवासी भारतीय सिर्फ पैसा ही नहीं भेजते, बल्कि देश की आर्थिक रफ्तार भी बढ़ाते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक NRI से आने वाला पैसा भारत की GDP में करीब 3% तक योगदान देता है। यह पैसा सीधे आम लोगों की जेब में जाता है और फिर यही पैसा बाजार में खर्च होता है।

प्रवासी भारतीयों ने कितने पैसे भारत भेजे?
(आंकड़े बिलियन डॉलर में)

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NRI का पैसा कहां-कहां खर्च होता है?

जो पैसा विदेशों से भारत आता है, उसका इस्तेमाल कई जरूरी क्षेत्रों में होता है:

  • घर और रियल एस्टेट
  • घरेलू खर्च और कंज्यूमर गुड्स
  • शिक्षा (स्कूल, कॉलेज, कोचिंग)
  • स्वास्थ्य और इलाज
  • बैंक सेविंग, FD और निवेश

इससे बाजार में नकदी बढ़ती है। मांग (डिमांड) बढ़ती है। रोजगार के नए अवसर बनते हैं और अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिलती है।

विदेशी मुद्रा भंडार को भी मिलता है सहारा

NRI द्वारा भेजा गया पैसा डॉलर के रूप में आता है, इससे भारत का फॉरेक्स रिज़र्व मजबूत होता है। रुपये की स्थिति अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर होती है। आर्थिक संकट के समय यह रकम देश के लिए ढाल का काम करती है।

कुल मिलाकर क्या समझें?

  • प्रवासी भारतीय भारत की आर्थिक रीढ़ हैं
  • 2025 में रिकॉर्ड 135 बिलियन डॉलर की रेमिटेंस
  • GDP में करीब 3% योगदान
  • घरेलू खपत और निवेश को मिलती है ताकत
  • भारत दुनिया में सबसे ज्यादा रेमिटेंस पाने वाला देश बना हुआ है

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