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बीएसएल परियोजना में खराबी से हरियाणा में पानी की किल्लत की आशंका

6 अप्रैल, 2026:* हरियाणा में आने वाले दिनों में पानी की संभावित किल्लत को लेकर चिंता गहराती जा रही है, क्योंकि ब्यास-सतलुज लिंक परियोजना से जुड़ी एक महत्वपूर्ण तकनीकी समस्या सामने आई है। जानकारी के अनुसार हिमाचल प्रदेश स्थित देहर पावर हाउस में टरबाइन से जुड़ी खराबी के कारण पानी की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे हरियाणा सहित कई क्षेत्रों में जल संकट की स्थिति पैदा होने की आशंका जताई जा रही है।

यह परियोजना लंबे समय से उत्तर भारत के कई राज्यों के लिए जल आपूर्ति का एक अहम स्रोत रही है। इसके माध्यम से सिंचाई के लिए नहरों में पानी छोड़ा जाता है, जिससे किसानों की फसलें निर्भर रहती हैं। इसके अलावा पेयजल आपूर्ति में भी इस परियोजना की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में यदि इस प्रणाली में कोई तकनीकी बाधा उत्पन्न होती है, तो उसका असर सीधे लाखों लोगों और हजारों किसानों पर पड़ता है।

बताया जा रहा है कि देहर पावर हाउस की टरबाइन में आई खराबी के कारण पानी की प्रवाह प्रक्रिया प्रभावित हुई है। यह टरबाइन पानी को नियंत्रित तरीके से आगे बढ़ाने में मदद करती है, और इसमें गड़बड़ी होने से पानी की निकासी बाधित हो जाती है। इस समस्या के चलते हरियाणा को मिलने वाली पानी की मात्रा में कमी आने की आशंका है, जो आने वाले समय में एक गंभीर समस्या का रूप ले सकती है।

इस स्थिति को देखते हुए हरियाणा सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। सरकार ने बोर्ड से अनुरोध किया है कि तकनीकी खराबी को जल्द से जल्द ठीक किया जाए और पानी की सप्लाई को सामान्य बनाया जाए। अधिकारियों का कहना है कि यदि समस्या का समाधान जल्दी नहीं किया गया, तो राज्य के कई हिस्सों में पानी की किल्लत महसूस की जा सकती है।

कृषि क्षेत्र पर इस समस्या का सबसे ज्यादा असर पड़ने की संभावना है। इस समय कई फसलें ऐसी अवस्था में हैं, जहां उन्हें नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है। यदि पानी की आपूर्ति में कमी आती है, तो फसलों की पैदावार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। पहले से ही मौसम की मार झेल रहे किसानों के लिए यह एक और बड़ी चुनौती बन सकती है।

इसके अलावा शहरी क्षेत्रों में भी पेयजल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। शहरों में पानी की मांग लगातार बढ़ रही है और यदि सप्लाई में किसी भी तरह की कमी आती है, तो लोगों को दैनिक जरूरतों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की बड़ी जल परियोजनाओं में नियमित रखरखाव और समय-समय पर तकनीकी जांच बेहद जरूरी होती है। छोटी सी लापरवाही भी बड़े संकट का कारण बन सकती है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचने के लिए बैकअप सिस्टम और वैकल्पिक जल स्रोतों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

इस बीच प्रशासन ने संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही तकनीकी समस्या का समाधान होगा, पानी की आपूर्ति सामान्य कर दी जाएगी।

कुल मिलाकर यह स्थिति हरियाणा के लिए एक चेतावनी के रूप में देखी जा रही है, जो यह दर्शाती है कि जल संसाधनों के प्रबंधन में किसी भी तरह की चूक भारी पड़ सकती है। आने वाले दिनों में इस समस्या का समाधान किस तरह किया जाता है, इस पर राज्य के लाखों लोगों की नजर टिकी हुई है।

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