09 अप्रैल 2026 : हरियाणा में तकनीक आधारित खरीद प्रणाली को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। राज्य सरकार द्वारा लागू की जा रही नई डिजिटल और टेक्नोलॉजी आधारित खरीद व्यवस्था पर विपक्ष ने गंभीर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार इसे पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने की दिशा में बड़ा सुधार बता रही है। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है।
सरकार का कहना है कि नई टेक आधारित खरीद प्रणाली का उद्देश्य फसलों की खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और भ्रष्टाचार मुक्त बनाना है। इसके तहत किसानों के पंजीकरण से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए संचालित किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसानों को सीधे लाभ मिलेगा।
हालांकि, विपक्ष ने इस प्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि डिजिटल व्यवस्था के कारण कई छोटे और ग्रामीण क्षेत्रों के किसान परेशान हो रहे हैं, जिन्हें तकनीकी जानकारी या संसाधनों की कमी है। विपक्ष का आरोप है कि इस नई व्यवस्था में कई खामियां हैं, जिनकी वजह से किसानों को अपनी उपज बेचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
विपक्षी नेताओं का यह भी कहना है कि सरकार बिना पर्याप्त तैयारी और परीक्षण के इस प्रणाली को लागू कर रही है, जिससे किसानों की समस्याएं बढ़ रही हैं। उनका आरोप है कि कई जगहों पर सर्वर डाउन होने, पंजीकरण में त्रुटियां और भुगतान में देरी जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।
दूसरी ओर, हरियाणा सरकार इन आरोपों को खारिज करते हुए कह रही है कि शुरुआती चरण में कुछ तकनीकी दिक्कतें आना स्वाभाविक है, लेकिन समय के साथ इन्हें दूर कर लिया जाएगा। सरकार का कहना है कि वह किसानों की समस्याओं को गंभीरता से ले रही है और उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
सरकार ने यह भी बताया कि किसानों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर, सहायता केंद्र और प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए गए हैं, ताकि वे आसानी से इस डिजिटल प्रणाली का उपयोग कर सकें। इसके अलावा, अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे जमीनी स्तर पर किसानों की मदद करें।
इस मुद्दे पर विशेषज्ञों की राय भी बंटी हुई है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक का उपयोग कृषि क्षेत्र में सुधार लाने के लिए जरूरी है, लेकिन इसे लागू करने से पहले पर्याप्त तैयारी और जागरूकता अभियान चलाना जरूरी होता है। वहीं कुछ का कहना है कि डिजिटल सिस्टम से लंबे समय में किसानों को फायदा ही होगा।
यह विवाद ऐसे समय पर सामने आया है जब कृषि क्षेत्र में सुधार को लेकर देशभर में बहस चल रही है। हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्य में इस तरह के बदलावों का सीधा असर लाखों किसानों पर पड़ता है, इसलिए यह मुद्दा और भी संवेदनशील हो जाता है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस प्रणाली में सुधार कर पाती है या नहीं और क्या विपक्ष के उठाए गए मुद्दों का समाधान हो पाता है। फिलहाल, इस विषय पर सियासी बयानबाजी जारी है और किसान भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
