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एससी-एसटी मामलों में हरियाणा सरकार का बड़ा कदम : 60 दिन में चार्जशीट और कार्रवाई सुनिश्चित

11 फरवरी 2026 : हरियाणा में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के खिलाफ अत्याचार को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सख्त रुख अपना लिया है। सीएम ने कहा कि प्रदेश में एससी-एसटी के विरुद्ध उत्पीड़न किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने सामाजिक न्याय को मजबूत करने और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में कई अहम घोषणाएं कीं।

मुख्यमंत्री ने अनुसूचित जाति के कल्याण के लिए बेहतर काम करने वाली उत्कृष्ट पंचायतों को दिए जाने वाले प्रोत्साहन अनुदान को 50 हजार रुपए से बढ़ाकर एक लाख रुपए करने की घोषणा की। यह कदम गांव स्तर पर सामाजिक समरसता, कानून व्यवस्था और विकास कार्यों को नई गति देने वाला माना जा रहा है। अनुसूचित जाति अत्याचार अधिनियम 1989 और नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 के प्रावधानों के कार्यान्वयन की समीक्षा हेतू राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की मंगलवार को यहां हुई बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने यह घोषणा की।

 
बैठक में विकास एंव पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी भी मौजूद रहे। बैठक में मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल, जी़ अनुपमा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता, अतिरिक्त प्रधान सचिव डॉ़ साकेत कुमार, डीजीपी अजय सिंघल सहित कई सरकारी व गैर-सरकारी सदस्य उपस्थित रहे।

 
एससी-एसटी मामलों की जांच में देरी पर सख्त रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने प्रदेश के हर थाने में अलग से इन्वेस्टिगेशन विंग स्थापित करने का ऐलान किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इससे जांच कार्य प्रभावित नहीं होगा और मामलों का निपटारा समयबद्ध तरीके से किया जा सकेगा। उन्होंने निर्देश दिए कि एससी-एसटी से जुड़े मामलों में 60 दिनों के भीतर चार्जशीट न्यायालय में प्रस्तुत की जाए, ताकि पीड़ितों को जल्द न्याय मिल सके। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार द्वारा लागू किए गए तीन नए आपराधिक अधिनियमों में भी 60 दिन में चार्जशीट दाखिल करने का प्रावधान है और इन मामलों के लिए अलग से जांच अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी।

 मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि उत्कृष्ट पंचायतों के चयन के लिए स्पष्ट मानक तय किए गए हैं। इसके तहत गांव में एससी के विरुद्ध किसी प्रकार का अत्याचार न होना, एससी कंपोनेंट फंड का पूर्ण उपयोग, नशे के खिलाफ अभियान, पराली न जलाना, पेयजल समस्या का समाधान और सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देने वाली पंचायतों को इसके लिए चुना जाएगा। इन मानकों के आधार पर राज्य, जिला और उपमंडल स्तर पर पंचायतों को प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है।

 मुख्यमंत्री ने साफ किया कि जहां अत्याचार के मामलों में तत्काल कार्रवाई जरूरी है, वहीं झूठी शिकायत दर्ज कराने वालों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपसी समझौते वाले मामलों में यह भी जांच की जाए कि कहीं यह दबाव या प्रलोभन में तो नहीं किया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2021 से राज्य में अनुसूचित जाति और महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कमी दर्ज की गई है। इसके अलावा लूटपाट, संपत्ति संबंधी अपराध और धमकी देने के मामलों में भी गिरावट आई है। बावजूद इसके, उन्होंने अधिकारियों को पूरी सतर्कता बरतने और किसी भी मामले में लापरवाही न करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान 796 अत्याचार पीड़ितों को राहत एवं पुनर्वास के लिए 8.84 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। वहीं, सामाजिक समरसता अंतर्जातीय विवाह शगुन योजना के तहत चालू वित्त वर्ष में 1265 लाभार्थियों को 31.62 करोड़ रुपए की सहायता दी गई है, जिसमें 807 महिलाएं और 458 पुरुष शामिल हैं। उन्होंने इसे सामाजिक समरसता की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय कदम बताया।

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