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हर्षवर्धन की जीत के बाद की गई निवृत्ति की घोषणा; गुरु काका पवार ने भविष्य का रास्ता दिखाया

पुणे 23 मार्च 2026 : महाराष्ट्र केसरी 2026 की अंतिम फेरी में नासिक के हर्षवर्धन सदगीर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए डबल केसरी का खिताब अपने नाम किया। इस बार के फाइनल में गुरु काका पवार की तालिमी से दोनों पहलवानों ने हिस्सा लिया था, इसलिए कोई भी जीतता, ट्रॉफी उनके तालिमी में ही जाती। हर्षवर्धन ने कुस्ती में जीत हासिल करते ही मॅट पर निवृत्ति की घोषणा की। वहीं महेंद्र गायकवाड़ इस बार दूसरी बार उप-महाराष्ट्र केसरी रहे।

काका पवार ने हर्षवर्धन की जीत पर कहा कि दोनों पहलवान मेरे तालिमी हैं और दोनों ने अंतिम फेरी में अपनी कुश्ती कौशल दिखाया। सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी हर्षवर्धन जीता। महेंद्र ने हार नहीं मानी है और भविष्य में खिताब जीतने का उसका सपना पूरा होगा। महेंद्र का उम्र अभी कम है, जबकि हर्षवर्धन ने अब कुश्ती छोड़ने का निर्णय लिया है। अब वह अच्छे पहलवानों को तैयार कर सकते हैं। उन्होंने हर्षवर्धन को यह भी कहा कि महाराष्ट्र को कुछ देना जरूरी है और हार का दुख बहुत अधिक नहीं होना चाहिए।

फाइनल मुकाबला रात लगभग सवा नौ बजे शुरू हुआ। महेंद्र, जिन्हें बाहुबली के नाम से जाना जाता है, ने शुरू में हर्षवर्धन को रिंग के बाहर फेंकने का प्रयास किया और एक अंक हासिल किया। इसके बाद हर्षवर्धन ने कुश्ती टालने का प्रयास किया, जिससे पंच ने उन्हें चेतावनी दी। हर्षवर्धन ने महेंद्र के दुहेरी पट के प्रयास को रोक दिया। महेंद्र की नकारात्मक खेल नीति के कारण पंच ने हर्षवर्धन को एक अंक दिया।

पहले तीन मिनट में दोनों पहलवानों की बराबरी 1-1 रही। दूसरे फेरी में महेंद्र ने शुरू में पट लगाने का प्रयास किया, लेकिन हर्षवर्धन ने उसे रोक दिया। लगातार नकारात्मक खेल के कारण पंच ने महेंद्र को चेतावनी दी और उन्हें 30 सेकंड की ‘एक्टिविटी’ अवधि दी, जिसमें महेंद्र कोई अंक नहीं ले सके। इसके बाद हर्षवर्धन ने दमदार प्रदर्शन करते हुए दो अंक हासिल किए। महेंद्र ने अंत में हर्षवर्धन को बाहर फेंककर एक अंक जरूर लिया, लेकिन इससे परिणाम पर असर नहीं पड़ा।

इस जीत के साथ हर्षवर्धन ने लगातार दूसरी बार और कुल मिलाकर तीसरी बार महाराष्ट्र केसरी का खिताब अपने नाम किया। महेंद्र गायकवाड़ को सलग दूसरी बार उपविजेता बनकर संतोष करना पड़ा। हर्षवर्धन की कुश्ती और उनकी रणनीति ने दर्शकों का मन मोह लिया और इस प्रतियोगिता को यादगार बना दिया।

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