12 मार्च 2026 : उत्तर प्रदेश की राजधानी के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में इन दिनों इलाज से ज्यादा खाने के लाले पड़े हुए हैं। शहर में छाए गैस संकट ने अब मरीजों की रसोई तक अपनी पहुंच बना ली है। कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई क्या रुकी, अस्पताल के किचन में रोटियों पर कटौती की कैंची चल गई।
थाली से गायब हुई रोटियां, मरीजों का बुरा हाल
KGMU के किचन संचालकों ने गैस की भारी कमी के कारण एक चौंकाने वाला फैसला लिया है। अस्पताल में भर्ती मरीजों को जहां पहले चार रोटियां दी जाती थीं, वहां अब सिर्फ दो रोटियां ही परोसी जा रही हैं। रोटियों की संख्या घटाकर मरीजों को ज्यादा चावल दिए जा रहे हैं। मरीजों और उनके तीमारदारों का आरोप है कि उन्हें आधा पेट खाना खाकर रात गुजारनी पड़ रही है।
डॉक्टरी सलाह और मजबूरी का टकराव
चावल की मात्रा बढ़ाना कई मरीजों के लिए जान जोखिम में डालने जैसा है। डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल में कई मरीज ऐसे होते हैं जिन्हें शुगर, अस्थमा या अन्य गंभीर बीमारियों की वजह से चावल खाने से मना किया जाता है। ऐसे में रोटियों की कटौती उनकी सेहत पर भारी पड़ सकती है।
हॉस्टल की मेस में भी ताला लगने की नौबत
संकट की आंच सिर्फ मरीजों तक ही सीमित नहीं है, केजीएमयू के हॉस्टलों में रह रहे छात्र भी परेशान हैं। बुधवार को कई छात्रावासों की मेस में गैस खत्म होने की वजह से खाना या तो बना ही नहीं या फिर अधूरा रह गया। नतीजतन, भविष्य के डॉक्टरों (छात्रों) को बाहर के ढाबों पर जाकर खाना खाना पड़ा। संचालकों का कहना है कि अगर सिलेंडर नहीं मिले तो वे मेस चलाने की स्थिति में नहीं रहेंगे। उन्होंने प्रशासन से अब लकड़ी जलाकर खाना बनाने की इजाजत मांगी है।
KGMU प्रशासन का प्लान-बी
बढ़ते विरोध और शिकायतों के बाद KGMU प्रशासन अब हरकत में आया है। अधिकारियों ने बताया कि गैस पर निर्भरता कम करने के लिए बिजली से चलने वाले रोटी मेकर खरीदने की तैयारी की जा रही है। जिला प्रशासन ने भरोसा दिया है कि अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों के लिए गैस सिलेंडर की आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर सामान्य की जाएगी।
