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UP में 39 मिनरल वॉटर और पैक्ड ड्रिंक पर FSDA का बैन, बिक्री-सप्लाई पर तुरंत रोक

 25 जनवरी 2026 : उत्तर प्रदेश में बोतलबंद पानी की गुणवत्ता को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आने के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफएसडीए) ने बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने 39 मिनरल वाटर और पैक्ड ड्रिंकिंग वाटर ब्रांड्स की बिक्री और सप्लाई पर तुरंत रोक लगा दी है। जांच में इन कंपनियों के पानी के सैंपल पीने योग्य मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिसके बाद यह सख्त कार्रवाई की गई।

जांच में फेल हुए पानी के सैंपल
एफएसडीए ने अलग-अलग जिलों में बोतलबंद पानी के नमूने लिए। प्रयोगशाला जांच में कई ब्रांड्स के सैंपल गुणवत्ता मानकों पर फेल पाए गए। एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकेब ने कहा कि इस तरह का दूषित पानी लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक और दीर्घकालिक दुष्प्रभाव डाल सकता है। इसलिए जनहित में यह कार्रवाई जरूरी थी।

इन जिलों की कंपनियां कार्रवाई की जद में
मैनपुरी – ग्लोबल ब्रांड
प्रयागराज – नीट एचटूओ
आजमगढ़ – ग्लासिया
गोरखपुर – रिप्लायबल फ्रेश
बस्ती – कीवी
चित्रकूट – क्वीन ब्रांड
गोंडा – सुपर फाइव स्टार
इन सभी ब्रांड्स का पानी जांच में असुरक्षित पाया गया।

लखनऊ और आसपास के ब्रांड्स पर भी प्रतिबंध
अंबेडकरनगर – एक्वा हेल्थ
लखनऊ – वृष्टि और फिट ब्रांड
बाराबंकी – किंग मेन व ओएक्सवाई
फतेहपुर – चिल
उन्नाव – फू-फू पुक, देवांश डेली एक्वा व हिलडिन
रामपुर – एक्वा ऐस
चंदौली – गुगली और एक्वा यूएस
गौतमबुद्धनगर – एक्वा बोट

वाराणसी से गोरखपुर तक भी कार्रवाई
वाराणसी – एक्वासिया और साईं नीर
गोरखपुर – हेल्दी ऐरा
लखीमपुर खीरी – न्यू गंगा जल
रायबरेली – मि. जलज और आर्वा
प्रयागराज – रायल चौलेंज
बाराबंकी – ज्ञानवी फूडटेक फूड व एलएपी
शाहजहांपुर – फिनवेल
बस्ती – आरके एक्वा शोक
गोंडा – अमृत पियो और रिलैक्स
इटावा – निर्मल धारा व कैनियन एक्वा
लखनऊ – ओजीन
सिद्धार्थनगर – वेदिक
चंदौली – टीचर्स ब्रांड

48 घंटे में स्टॉक का विवरण देने का आदेश
एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकेब ने सभी कंपनियों को 48 घंटे के भीतर अपने स्टॉक का पूरा विवरण विभाग को सौंपने का निर्देश दिया है। अधिकारियों को आदेश दिए गए हैं कि प्रतिबंधित पानी की बिक्री और सप्लाई तुरंत रोकी जाए।

आगे और सख्त कार्रवाई के संकेत
एफएसडीए ने साफ किया है कि यह कार्रवाई अंतिम नहीं है। आगे भी जांच जारी रहेगी और यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया तो संबंधित कंपनियों के खिलाफ और कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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