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फर्जी CBI अधिकारी बनकर करोड़ों की ठगी: आरोपियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

लुधियाना 03 जनवरी 2025 एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ई.डी) के जालंधर जोनल कार्यालय ने डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी अर्पित राठौर को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई 31 दिसंबर 2025 को की गई तलाशी के दौरान की, जिसमें आपत्तिजनक दस्तावेज़, डिजिटल उपकरण और लगभग 14 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। ई.डी के अनुसार यह जांच साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, लुधियाना में दर्ज एफ.आई.आर के आधार पर शुरू की गई। बाद में इसी गिरोह से जुड़े साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट के नौ अतिरिक्त मामलों को भी जांच में शामिल किया गया। 

जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने खुद को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टीगेशन (सी.बी.आई) का अधिकारी बताकर एस.पी. ओसवाल से लगभग 7 करोड़ रुपये की ठगी की। इसके अलावा, अन्य लोगों से भी डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड के जरिए 1.73 करोड़ रुपये की ठगी की गई। ई.डी की जांच में सामने आया कि ठगी की रकम को कई फर्जी बैंक खातों के जरिए घुमाया गया। इस नेटवर्क में रूमी कलिता और अर्पित राठौर की अहम भूमिका पाई गई। रूमी कलिता (गुवाहाटी) और अर्पित राठौर (कानपुर) ने अवैध धन को सफेद करने के लिए फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स और रिग्गिओवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी संस्थाओं के खातों का इस्तेमाल किया। जांच में यह भी सामने आया कि ठगी की रकम को 220 से अधिक बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। 

ई.डी के अनुसार, अर्पित राठौर ने विदेशों में मौजूद सहयोगियों से संपर्क बनाए रखा और अवैध धन को विदेशी खातों में ट्रांसफर करने में मदद की। बदले में उसे यु.एस.डी.टी क्रिप्टो करेंसी और भारतीय रुपये के रूप में हिस्सा मिला। अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले, 22 दिसंबर 2025 को की गई तलाशी के बाद रूमी कलिता को 23 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था, जो वर्तमान में ई.डी की हिरासत में है। अर्पित राठौर को कानपुर के माननीय एसीजेएम न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे ट्रांजिट रिमांड पर जालंधर लाया गया। जालंधर की विशेष अदालत ने आरोपी को 5 जनवरी तक ई.डी की हिरासत में भेज दिया है। ई.डी ने बताया कि मामले में की आगे की जांच जारी है।

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