जयपुर 10 जनवरी 2026 : पिता ने किडनी दान कर बेटे की जान बचाई, लेकिन बेटे ने अस्पताल के छठवें मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। यह दर्दनाक घटना राजस्थान के टोंक जिले के ठोरिया पचेवर इलाके में सामने आई। 36 वर्षीय हंसराज जाट पिछले सात दिनों से जयपुर के एसएमएस अस्पताल के सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक में किडनी के इलाज के लिए भर्ती था।
प्रकरण का विवरण:
हंसराज गंभीर किडनी बीमारी से पीड़ित था और इलाज के दौरान काफी कष्ट में था, लेकिन उसने अपने परिवार को अपनी तकलीफ का एहसास नहीं होने दिया। अंततः उसने अस्पताल की छठवीं मंजिल से कूदकर जीवन समाप्त कर लिया।
हंसराज के पिता गोगाराम को बेटे की मौत की खबर मिलते ही वह पूरी तरह से स्तब्ध और बेशुध हो गए। उन्होंने रोते हुए बताया, “मैंने खुद अपने बेटे को दूध और चाय पिलाई थी, फिर थकावट के कारण मुझे नींद आ गई और हंसराज ने खिड़की से छलांग लगा दी। मुझे पता ही नहीं चला कि वह खिड़की तक कैसे गया। मैंने उसे किडनी दे कर उसकी जान बचाई थी, लेकिन शायद भगवान ने कुछ और तय कर रखा था।”
गोगाराम ने यह भी बताया कि बेटे की किडनी ट्रांसप्लांट के लिए उन्होंने भारी कर्ज लिया था। उन्हें उम्मीद थी कि बेटा ठीक हो जाएगा और सब कुछ संभाल लेगा, लेकिन हंसराज ने यह अंतिम कदम उठा लिया।
हंसराज जयपुर के 22 गोदाम इलाके में एक निजी कंपनी में काम करता था और विवाहित था। उसके दो बच्चे हैं—3 साल का बेटा और 7 साल की बेटी। तीन महीने पहले यानी सितंबर में उसकी किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी हुई थी और वह नियमित जांच के लिए डॉक्टर के पास आता रहा।
रुग्णालय कर्मचारियों ने बताया कि हंसराज के नीचे गिरने की सूचना मिलते ही वे तुरंत मौके पर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हंसराज लगभग 70 फीट की ऊंचाई से गिरा था।
घटना के बाद परिवार में भारी शोक छा गया और इलाके में भी खलबली मच गई। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि किडनी ट्रांसप्लांट जैसी बड़ी सर्जरी के बाद भी हंसराज ने यह कदम क्यों उठाया। पिता ने अपने बेटे की जान बचाने के लिए किडनी दान की, लेकिन नियति का खेल ऐसा हुआ कि उन्हें असहनीय दुःख सहना पड़ा।
