13 मार्च 2026 : राष्ट्रीय राजधानी Delhi में इस साल की शुरुआत से ही आग लगने की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। पिछले 67 दिनों के भीतर राजधानी में आग से जुड़े हादसों में 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 93 लोग झुलसकर घायल हुए हैं। इन घटनाओं के चलते दमकल विभाग पर भी काफी दबाव बढ़ गया है। जानकारी के अनुसार, Delhi Fire Service को औसतन हर दिन लगभग 44 कॉल आग लगने की घटनाओं से जुड़ी मिल रही हैं।
फायर ब्रिगेड अधिकारियों के मुताबिक, गर्मी बढ़ने के साथ-साथ आग लगने की घटनाओं में भी इजाफा देखने को मिलता है। बिजली के उपकरणों का अधिक उपयोग, शॉर्ट सर्किट, गैस सिलेंडर लीकेज और लापरवाही जैसी वजहें इन हादसों के प्रमुख कारण बन रही हैं। कई मामलों में देखा गया है कि पुराने बिजली के तार और ओवरलोडेड सॉकेट भी आग लगने की बड़ी वजह बनते हैं।
दमकल विभाग का कहना है कि सबसे ज्यादा आग की घटनाएं घनी आबादी वाले इलाकों, बाजारों, गोदामों और औद्योगिक क्षेत्रों में सामने आती हैं। इन जगहों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी, संकरी गलियां और आपातकालीन रास्तों की कमी के कारण आग पर काबू पाने में समय लग जाता है। कई बार दमकल की गाड़ियां घटनास्थल तक पहुंचने में ही काफी देर लगा देती हैं, जिससे नुकसान बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी के मौसम में तापमान बढ़ने से बिजली उपकरणों पर दबाव बढ़ता है। एसी, कूलर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के अधिक इस्तेमाल से शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा गोदामों में ज्वलनशील सामग्री का गलत तरीके से भंडारण भी आग की घटनाओं को बढ़ावा देता है।
दमकल विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने घरों और दफ्तरों में फायर सेफ्टी उपकरण जरूर रखें। आग बुझाने वाले सिलेंडर, धुआं अलार्म और सही वायरिंग जैसी सावधानियां कई बड़े हादसों को टाल सकती हैं। साथ ही गैस सिलेंडर और बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल करते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
अधिकारियों ने यह भी कहा है कि इमारतों में फायर सेफ्टी नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। कई जगहों पर फायर एग्जिट बंद पाए जाते हैं या सुरक्षा उपकरण काम नहीं करते, जिससे आपात स्थिति में लोगों की जान खतरे में पड़ जाती है। इसलिए समय-समय पर सुरक्षा जांच और उपकरणों का रखरखाव बेहद जरूरी है।
कुल मिलाकर, राजधानी में बढ़ती आग की घटनाएं प्रशासन और आम लोगों दोनों के लिए चिंता का विषय बन गई हैं। अगर समय रहते सुरक्षा उपायों को गंभीरता से लागू किया जाए और लोगों में जागरूकता बढ़ाई जाए, तो ऐसे हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
