24 मार्च 2026 : दिल्ली-एनसीआर में ऐप बेस्ड कैब सेवाओं की हड़ताल का असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ तौर पर देखने को मिला, हालांकि यह असर पूरी तरह एक जैसा नहीं रहा। कुछ इलाकों में जहां यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा, वहीं कई जगहों पर लोगों ने जल्दी ही वैकल्पिक साधनों का सहारा लेकर अपनी आवाजाही जारी रखी। इस हड़ताल में Uber और Ola जैसे प्रमुख ऐप आधारित प्लेटफॉर्म से जुड़े ड्राइवर शामिल रहे, जिनकी मांगें लंबे समय से लंबित बताई जा रही थीं।
सुबह के समय ऑफिस जाने वाले लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कैब बुक करने पर या तो गाड़ियां उपलब्ध नहीं थीं या फिर किराया कई गुना बढ़ा हुआ दिख रहा था। ऐसे में कई लोगों ने मेट्रो, बस और ऑटो का रुख किया। Delhi Metro Rail Corporation की सेवाओं में यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई, जिससे ट्रेनों और स्टेशनों पर भीड़ बढ़ गई। इसके अलावा, सड़क पर चलने वाले ऑटो रिक्शा और ई-रिक्शा की मांग भी अचानक बढ़ गई।
हड़ताल के दौरान कुछ लोगों ने कारपूलिंग और निजी वाहनों का भी सहारा लिया। कई ऑफिसों ने अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दी, जिससे ट्रैफिक दबाव को कुछ हद तक कम किया जा सका। वहीं, स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्रों को भी अपनी यात्रा की योजना में बदलाव करना पड़ा। कुछ अभिभावकों ने खुद बच्चों को छोड़ने और लाने की जिम्मेदारी निभाई।
ड्राइवरों का कहना है कि बढ़ती ईंधन कीमतों, कमीशन में कटौती और कम होती कमाई के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। उनका आरोप है कि कंपनियां उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रही हैं, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है। दूसरी ओर, कंपनियों की ओर से यह कहा गया कि वे स्थिति को सामान्य बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं और ड्राइवर पार्टनर्स के साथ बातचीत जारी है।
इस हड़ताल का मिला-जुला असर यह दिखाता है कि जहां एक ओर ऐप बेस्ड कैब सेवाएं शहर की परिवहन व्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुकी हैं, वहीं दूसरी ओर इनके ठप होने पर लोग तेजी से अन्य विकल्पों की ओर रुख कर लेते हैं। दिल्ली-एनसीआर जैसे बड़े महानगर में मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम की उपलब्धता ने इस संकट के दौरान लोगों को राहत पहुंचाई।
कुल मिलाकर, इस हड़ताल ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या ऐप आधारित कैब सेवाओं के लिए कोई स्थायी समाधान और संतुलित नीति बनाई जानी चाहिए, जिससे ड्राइवरों और यात्रियों दोनों के हितों का ध्यान रखा जा सके।
