• Wed. Jan 28th, 2026

अमृतसर में BRTS प्रोजेक्ट फेल, 550 करोड़ से ज्यादा की राशि बर्बाद

अमृतसर 18 जनवरी 2026 शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने और लोगों को तेज़, सस्ती और सुगम पब्लिक ट्रांसपोर्ट उपलब्ध कराने के दावों के साथ शुरू किया गया बी.आर.टी.एस. (बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) प्रोजेक्ट महानगर में बुरी तरह फेल साबित हो चुका है। इस प्रोजेक्ट पर 550 करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च की गई, लेकिन नतीजा शून्य रहा। आज स्थिति यह है कि बी.आर.टी.एस. की बसें वेरका बाईपास पर खड़े-खड़े कबाड़ बन रही हैं, जबकि ट्रैक टूट-फूट का शिकार हो चुका है और स्टेशन सूने पड़े हैं। करोड़ों रुपए की लागत से खरीदी गई बसें महीनों से सड़कों पर नहीं दौड़ीं। धूप, बारिश और धूल में खड़ी ये बसें अब जंग लगने, टायर बैठने और इंजन खराब होने की कगार पर हैं। परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द ही कोई फैसला नहीं लिया गया, तो ये सभी बसें पूरी तरह कंडम हो सकती हैं, जिससे सरकार को करोड़ों का और नुकसान होगा।

योजना की कमियां शुरू से ही आईं सामने

बी.आर.टी.एस. प्रोजेक्ट शुरू से ही विवादों में रहा। अमृतसर की सड़कों पर अलग ट्रैक बनाने के कारण ट्रैफिक जाम बढ़ा, हादसे हुए और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई जगहों पर ट्रैक ट्रैफिक के लिए बड़ी बाधा बन गया। इन कमियों की ओर बार-बार ध्यान दिलाया गया, फिर भी प्रोजेक्ट पर पानी की तरह पैसा बहाया गया।

550 करोड़ खर्च, लोगों को मिला क्या?

बी.आर.टी.एस. के नाम पर ट्रैक, स्टेशन, सिग्नल सिस्टम और बसें तैयार की गईं, लेकिन आज ये सब बेकार पड़े हैं। आम नागरिक अभी भी ट्रैफिक जाम, महंगे ऑटो और निजी वाहनों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि यदि यही पैसा सिटी बस सिस्टम को मजबूत करने पर लगाया जाता, तो शहर को बड़ा लाभ हो सकता था।

नेताओं ने उठाई आवाज, पर नहीं हुई कार्रवाई

इस मुद्दे को लेकर कई राजनीतिक नेताओं और जन प्रतिनिधियों ने समय-समय पर आवाज़ उठाई है। विधानसभा से लेकर नगर निगम तक बी.आर.टी.एस. की नाकामी पर सवाल उठे, लेकिन न तो कोई उच्च स्तरीय जांच बैठी और न ही किसी अधिकारी की जवाबदेही तय हुई। इस कारण लोगों में गुस्सा और निराशा दोनों बढ़ रहे हैं।

सड़क किनारे लगी ग्रिल बनी हादसों का कारण

बसें न चलने के कारण इसके लिए बनाए गए विशेष मार्ग अब केवल हादसों का कारण बन कर रह गए हैं। आए दिन कोई न कोई इन सड़क ग्रिलों का शिकार होकर मौत के मुँह में जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि इन रास्तों पर बसें नहीं चलानी हैं, तो इन ग्रिलों को हटा दिया जाए या फिर इन रास्तों पर ऑटो चलाने की अनुमति दी जाए।

जवाबदेही की मांग और भविष्य का सवाल

शहरवासियों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि बी.आर.टी.एस. प्रोजेक्ट की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए और 550 करोड़ से अधिक की राशि बर्बाद करने वालों की जवाबदेही तय की जाए। खड़ी बसों को या तो वैकल्पिक रूटों पर चलाया जाए या फिर सिटी बस/ई-बस सिस्टम में शामिल किया जाए। बी.आर.टी.एस. सिर्फ एक फेल प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि अमृतसर में योजना बनाने और उसे लागू करने की सरकारी विफलता की सबसे बड़ी तस्वीर बन चुका है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *