मुंबई 02 फरवरी 2026 : उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद उद्योगपति गौतम अदानी ने वरिष्ठ नेता शरद पवार से उनके मुंबई स्थित आवास पर मुलाकात की। सिल्वर ओक स्थित पवार के घर पर दोनों के बीच करीब 45 मिनट से ज्यादा बातचीत हुई। अजित पवार के निधन की पृष्ठभूमि में इसे एक सांत्वना भेंट माना जा रहा है, लेकिन इस मुलाकात से राष्ट्रवादी कांग्रेस के दोनों गुटों के संभावित राजनीतिक विलय की चर्चाओं को और बल मिला है।
गौतम अदानी रविवार शाम शरद पवार के सिल्वर ओक निवास पहुंचे थे। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच लंबी बातचीत हुई। आधिकारिक तौर पर बताया गया कि यह मुलाकात अजित पवार के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए थी, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। खास बात यह है कि सुनेत्रा पवार ने अजित पवार की राजनीतिक विरासत संभालते हुए उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली है और इसी बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस के दोनों गुटों में गतिविधियां तेज हो गई हैं।
गौतम अदानी और पवार परिवार के बीच पुराने और करीबी संबंध रहे हैं। हाल ही में अदानी बारामती में एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के उद्घाटन के लिए पहुंचे थे, जहां शरद पवार और अजित पवार ने परिवार के साथ मिलकर उनका स्वागत किया था। उस मुलाकात के बाद भी राष्ट्रवादी कांग्रेस के दोनों गुटों के एकीकरण की चर्चाएं तेज हो गई थीं। अब इस नई मुलाकात से इन अटकलों को और हवा मिल गई है। विशेष रूप से अजित पवार के निधन के कुछ ही दिनों बाद सुनेत्रा पवार के मंत्रिमंडल में शामिल होने के चलते इस मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है।
यह पहली बार नहीं है जब राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय में गौतम अदानी और शरद पवार की मुलाकात हुई हो। जून 2023 में भी अजित पवार के पार्टी तोड़कर भाजपा के साथ जाने से करीब एक महीने पहले अदानी ने शरद पवार से मुलाकात की थी।
इस ताजा मुलाकात के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस के भविष्य और दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों की उत्सुकता बढ़ गई है। अजित पवार के निधन से बनी राजनीतिक रिक्तता और उससे होने वाले संभावित बदलावों पर अब और ज्यादा चर्चा हो रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गौतम अदानी और शरद पवार जैसे दो प्रभावशाली व्यक्तियों की मुलाकात के दूरगामी राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं। इस मुलाकात से राष्ट्रवादी कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में भी तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे सकारात्मक बदलाव की उम्मीद के तौर पर देख रहे हैं, तो कुछ इसे लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं। कुल मिलाकर, यह मुलाकात आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े संकेत दे सकती है।
