नई दिल्ली 13 मार्च 2026 : राजधानी दिल्ली में सफाई व्यवस्था की खराब स्थिति किसी से छिपी नहीं है। जगह-जगह कूड़े के ढेर और गंदगी की वजह से जनता परेशान है, वहीं एमसीडी सफाई विभाग में कार्यरत अधिकारियों को अतिक्रमण हटाने की शक्ति देने का प्रस्ताव शुक्रवार को होने वाली सदन की बैठक में आ रहा है।
तो फिर दिल्ली स्वच्छ सर्वेक्षण में पहले नंबर पर क्यों नहीं है?
इसका विरोध न केवल जन स्वास्थ्य विभाग में हो रहा है बल्कि विशेषज्ञ भी इसका विरोध कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली में सफाई व्यवस्था इतनी ही सुधरी होती तो एमसीडी को स्वच्छ सर्वेक्षण में पहला स्थान मिल जाता लेकिन शीर्ष 10 में भी एमसीडी नहीं पहुंच पाई है। ऐसे में पहले सफाई निरीक्षको को अतिक्रमण हटाने की शक्ति देने की बजाय पहले सफाई व्यवस्था को ठीक कराना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली में 50 हजार से अधिक सफाई कर्मचारी हैं। साथ ही 12 जोन में निजी एजेंसियों के माध्यम से कूड़ा उठाने का कार्य होता है। बावजूद दिल्ली की सफाई व्यवस्था सवाल उठते हैं। क्योंकि न कूड़ा भी समय से उठता है और न ही सफाई पर्याप्त होती है।
ऐसे कैसे सुधरेगी सफाई की व्यवस्था?
दिल्ली नगर निगम की बात करें तो फिलहाल सफाई विभाग में 47668 पद स्वीकृत हैं, साथ ही 18659 से ज्यादा दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के पद स्वीकृत है। इसमें 330 स्वच्छता निरीक्षक और 970 सहायक स्वच्छता निरीक्षक हैं।
जिनके पास दिल्ली की सफाई व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी है, लेकिन अक्सर शिकायत आती है कि एक सफाई निरीक्षक तय कार्यक्षेत्र में भी पूरी तरह नहीं जा पाता है तो ऐसे में सफाई से अतिरिक्त कार्य होने पर स्वच्छता की व्यवस्था कैसे सुधरेगी।
MCD में आ रहे प्रस्ताव में क्या है?
एमसीडी सदन में आ रहे प्रस्ताव के अनुसार निगम के चूंकि निगम में लाइसेंसिंग इंस्पेक्टरों का अभाव है। कर्मचारी लगातार रिटायर भी हो रहे हैं। ऐसे दो से तीन वार्ड एक-एक इंस्पेक्टर को दिए गए हैं। इसलिए निगम के सफाई विभाग में कार्यरत सफाई निरीक्षक को अतिक्रमण हटाने की शक्ति दे दी जाए।
