5 नवंबर 2026 : पंजाब में आर्थिक तंगी के कारण डेंटल कॉलेज से निष्कासित की गई छात्रा सबरीना हसन को बड़ी राहत मिली है। लुधियाना के डिप्टी कमिश्नर (DC) हिमांशु जैन के हस्तक्षेप के बाद छात्रा को दोबारा कॉलेज में दाखिला मिल गया है। कॉलेज की बकाया फीस जमा नहीं कर पाने के कारण छात्रा को संस्थान से निकाल दिया गया था। इसके बाद परिवार ने जिला प्रशासन से आर्थिक मदद की गुहार लगाई। DC की अपील पर नेहरू सिद्धांत केंद्र ने छात्रा की पूरी बकाया फीस जमा कराने की जिम्मेदारी उठाई, जिससे वह अपनी पढ़ाई जारी रख सकेगी।
यह मामला पंजाब के संगरूर जिले के सुनाम स्थित गुरु नानक देव डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट से जुड़ा है। सबरीना हसन यहां पांच वर्षीय डेंटल कोर्स की पढ़ाई कर रही हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह कॉलेज की लगभग 1.5 लाख रुपये की बकाया फीस जमा नहीं कर पाई थीं। इसके चलते कॉलेज प्रबंधन ने उन्हें निष्कासित कर दिया था।
इस घटना के बाद छात्रा और उसके परिवार के सामने सबसे बड़ी चिंता यह थी कि आर्थिक परेशानी के कारण उसकी वर्षों की मेहनत और पढ़ाई बीच में ही न छूट जाए। परिवार के लिए इतनी बड़ी रकम का इंतजाम करना आसान नहीं था।
पिता लगाते हैं रेहड़ी, फीस जमा करना था मुश्किल
सबरीना हसन के पिता गुलाम हसन लुधियाना में रेहड़ी लगाकर परिवार का गुजारा करते हैं। सीमित आमदनी के कारण परिवार के लिए रोजमर्रा के खर्चों के साथ बेटी की कॉलेज फीस का इंतजाम करना काफी मुश्किल हो रहा था।
बेटी की पढ़ाई और भविष्य को लेकर परिवार पहले से ही चिंतित था। जब कॉलेज की ओर से फीस जमा नहीं होने के कारण निष्कासन की कार्रवाई की गई, तो परिवार को बड़ा झटका लगा।
गुलाम हसन चाहते थे कि उनकी बेटी अपनी पढ़ाई पूरी करे और भविष्य में एक अच्छी डेंटल डॉक्टर बने। लेकिन 1.5 लाख रुपये की बकाया फीस उनके लिए बहुत बड़ी रकम थी। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह समय पर फीस जमा नहीं कर पाए।
इसके बाद उन्होंने लुधियाना के जिला प्रशासन से संपर्क करने का फैसला किया, ताकि किसी तरह बेटी की पढ़ाई बचाई जा सके।
DC हिमांशु जैन से लगाई मदद की गुहार
बुधवार, 4 नवंबर को गुलाम हसन अपनी बेटी सबरीना के साथ लुधियाना के जिला प्रशासन कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन से मुलाकात कर अपनी आर्थिक स्थिति के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने DC को बताया कि उनकी बेटी सुनाम के डेंटल कॉलेज में पांच वर्षीय कोर्स कर रही है, लेकिन करीब 1.5 लाख रुपये की फीस बकाया होने के कारण उसे कॉलेज से निकाल दिया गया है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि किसी तरह आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि बेटी की पढ़ाई दोबारा शुरू हो सके।
हिमांशु जैन ने पिता और बेटी की बात ध्यान से सुनी और उनकी परेशानी को समझा। इसके बाद उन्होंने इस मामले में मदद के लिए नेहरू सिद्धांत केंद्र के प्रतिनिधियों से संपर्क किया।
उन्होंने संस्था के पदाधिकारियों को सबरीना की पढ़ाई, उसकी आर्थिक स्थिति और कॉलेज से निष्कासन के बारे में जानकारी दी। DC की अपील पर संस्था ने छात्रा की बकाया फीस जमा कराने की सहमति दे दी।
नेहरू सिद्धांत केंद्र ने जमा कराई 1.5 लाख रुपये की फीस
लुधियाना के DC हिमांशु जैन के हस्तक्षेप के बाद नेहरू सिद्धांत केंद्र ने सबरीना की बकाया फीस का भुगतान करने का फैसला किया। संस्था ने कॉलेज में छात्रा की फीस जमा करा दी, जिससे उसके दोबारा पढ़ाई शुरू करने का रास्ता साफ हो गया।
DC हिमांशु जैन ने बताया कि उन्होंने नेहरू सिद्धांत केंद्र के प्रतिनिधियों को छात्रा की स्थिति के बारे में जानकारी दी थी। संस्था ने तुरंत मदद के लिए सहमति जताई और उसी दिन फीस जमा करा दी।
उन्होंने कहा कि संस्था की ओर से समय पर सहायता मिलने से सबरीना और उसके परिवार को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। अब छात्रा अपनी पढ़ाई जारी रख सकेगी।
इस सहायता से न केवल परिवार पर पड़ा आर्थिक बोझ कम हुआ, बल्कि छात्रा का भविष्य भी सुरक्षित करने में मदद मिली है।
पढ़ाई जारी रखने का मिला अवसर
फीस जमा होने के बाद सबरीना को उसी डेंटल कॉलेज में दोबारा पढ़ाई जारी रखने का अवसर मिल गया, जहां से उन्हें निष्कासित किया गया था। परिवार के लिए यह राहत भरी खबर रही, क्योंकि उन्हें डर था कि आर्थिक परेशानी के कारण बेटी का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित हो सकता है।
पांच वर्षीय डेंटल कोर्स में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को लंबे समय तक मेहनत करनी पड़ती है। इसमें शैक्षणिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी शामिल होता है। ऐसे में बीच में पढ़ाई छूटने से विद्यार्थी के भविष्य पर असर पड़ सकता है।
सबरीना के मामले में समय पर आर्थिक मदद मिलने से उनकी पढ़ाई जारी रखने का रास्ता खुल गया है। यह घटना उन परिवारों की समस्याओं को भी सामने लाती है, जो आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने का प्रयास करते हैं।
DC ने संस्था के सहयोग की सराहना की
हिमांशु जैन ने नेहरू सिद्धांत केंद्र की ओर से की गई मदद की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि सबरीना भविष्य में एक सफल डेंटल डॉक्टर बनेंगी। उन्होंने कहा कि संस्था ने जरूरतमंद छात्रा की सहायता के लिए तुरंत कदम उठाया, जिससे परिवार को बड़ी राहत मिली।
इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की पहल और सामाजिक संस्था के सहयोग से एक छात्रा की पढ़ाई बचाने में मदद मिली। यदि समय पर आर्थिक सहायता नहीं मिलती, तो सबरीना को अपनी पढ़ाई जारी रखने में और कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता था।
आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की शिक्षा का सवाल
यह मामला एक बार फिर इस बात पर ध्यान दिलाता है कि आर्थिक परेशानियों के कारण कई प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा प्रभावित हो जाती है। खासकर निजी शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए फीस का इंतजाम करना कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों के सामने बड़ी चुनौती बन सकता है।
ऐसे मामलों में प्रशासन, सामाजिक संस्थाओं और अन्य सहायता समूहों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। जरूरतमंद विद्यार्थियों की पहचान करके उन्हें समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए, तो उनकी पढ़ाई बीच में रुकने से बच सकती है।
सबरीना हसन का मामला भी इसी तरह की एक घटना है, जहां पिता की सीमित आमदनी के बावजूद बेटी को पढ़ाने का सपना जिला प्रशासन और सामाजिक संस्था की मदद से पूरा होने की दिशा में आगे बढ़ा है।
फिलहाल फीस जमा होने के बाद सबरीना अपनी डेंटल की पढ़ाई जारी रख सकेंगी। परिवार ने भी इस सहायता से राहत महसूस की है। यह घटना दिखाती है कि सही समय पर मिलने वाली छोटी या बड़ी आर्थिक मदद किसी विद्यार्थी के भविष्य को नई दिशा दे सकती है।
