3 नवंबर 2026 : दिल्ली हाईकोर्ट ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के प्रोफेसर और कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम की सेवाएं समाप्त करने के विश्वविद्यालय के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। अकोइजम ने अपनी बर्खास्तगी को चुनौती देते हुए अदालत का रुख किया था। न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने उनकी याचिका पर JNU को नोटिस जारी किया और मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2027 में तय की है।
अकोइजम पर विश्वविद्यालय की कई छात्राओं ने यौन उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार के आरोप लगाए थे। इन शिकायतों की जांच के बाद विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की थी। इसके आधार पर JNU प्रशासन ने 9 अक्टूबर 2026 को उन्हें तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया था। अकोइजम ने सभी आरोपों से इनकार किया है।
बर्खास्तगी के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे थे अकोइजम
अंगोमचा बिमोल अकोइजम मणिपुर की इनर मणिपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद हैं। सांसद बनने से पहले वह JNU के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल सिस्टम्स में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत थे।
उन्होंने हाईकोर्ट में दायर याचिका में विश्वविद्यालय के बर्खास्तगी आदेश को चुनौती दी। उनके वकील ने अदालत में दलील दी कि कार्रवाई से पहले उन्हें उचित नोटिस नहीं दिया गया और अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर भी नहीं मिला।
इस पर हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय को नोटिस जारी करते हुए बर्खास्तगी आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। अदालत ने मामले को जनवरी 2027 में आगे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
11 छात्राओं ने लगाए थे आरोप
रिपोर्टों के अनुसार, मई 2026 में JNU की कम से कम 11 छात्राओं ने अकोइजम के खिलाफ यौन उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार की शिकायतें दर्ज कराई थीं। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि प्रोफेसर ने बैठकों या अन्य कार्यक्रमों के बहाने कुछ छात्राओं को अपने कैंपस स्थित आवास पर बुलाया और उनके साथ अनुचित व्यवहार करने की कोशिश की।
कुछ छात्राओं ने कक्षाओं के दौरान अशोभनीय और आपत्तिजनक टिप्पणियां किए जाने का आरोप भी लगाया था। इन शिकायतों के बाद विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति ने मामले की जांच की।
JNU की समिति ने की थी अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश
विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति ने जांच पूरी करने के बाद बड़ी अनुशासनात्मक सजा की सिफारिश की थी। इसके बाद JNU की कुलपति शांतिश्री डी. पंडित की ओर से 9 अक्टूबर को बर्खास्तगी का आदेश जारी किया गया।
विश्वविद्यालय के आदेश में कहा गया था कि आंतरिक समिति की रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद सेवा समाप्त करने की कार्रवाई की गई है। वहीं, अकोइजम ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए और विश्वविद्यालय की कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया।
दिल्ली पुलिस ने भी दर्ज की FIR
इस मामले में दिल्ली पुलिस ने 11 अक्टूबर को JNU के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की शिकायत के आधार पर अकोइजम के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। मामला वसंत कुंज नॉर्थ थाने में दर्ज किया गया। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 75 और 79 सहित संबंधित प्रावधान शामिल किए गए हैं।
पुलिस मामले की जांच कर रही है। अकोइजम ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। फिलहाल, हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश विश्वविद्यालय के बर्खास्तगी संबंधी फैसले पर रोक लगाता है, जबकि आरोपों से जुड़े अन्य कानूनी और जांच संबंधी मामले अलग से जारी रहेंगे।
