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वकीलों पर ACP मनस्वी वशिष्ठ की कथित टिप्पणी का मामला, हाईकोर्ट ने कहा- पहले औपचारिक याचिका दाखिल करें

3 नवंबर 2026 : दिल्ली हाईकोर्ट ने निलंबित एसीपी मनस्वी वशिष्ठ की वकीलों के खिलाफ कथित आपत्तिजनक और धमकी भरी टिप्पणियों के मामले में स्वतः संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है। मंगलवार को वकीलों के एक समूह ने अदालत से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की थी। इस पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने वकीलों को औपचारिक याचिका दाखिल करने के लिए कहा। अदालत ने आश्वासन दिया कि याचिका मिलने के बाद मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।

वकीलों ने अदालत से की थी हस्तक्षेप की मांग

सुनवाई के दौरान वकीलों ने अदालत को बताया कि एसीपी मनस्वी वशिष्ठ की ओर से वकीलों के लिए कथित तौर पर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। वकीलों के अनुसार, पुलिस मुख्यालय के बाहर हुए प्रदर्शन के दौरान कानूनी समुदाय के खिलाफ टिप्पणी की गई और हथियारों, विशेषकर AK-47 का भी जिक्र किया गया।

वकीलों ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से मामले में स्वतः संज्ञान लेने का अनुरोध किया। हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि संबंधित सामग्री और शिकायत को औपचारिक याचिका के माध्यम से अदालत के सामने प्रस्तुत किया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि याचिका दाखिल होने पर उस पर विचार किया जाएगा।

औपचारिक याचिका दाखिल करने को कहा

अदालत ने वकीलों से कहा कि वे उपलब्ध सामग्री के साथ रजिस्ट्री में औपचारिक याचिका दाखिल करें। साथ ही मामले की प्रति आपराधिक मामलों के स्थायी वकील संजय लाओ को देने के निर्देश भी दिए गए।

इस तरह हाईकोर्ट ने फिलहाल स्वतः संज्ञान लेकर कार्यवाही शुरू नहीं की है, लेकिन याचिका दाखिल होने के बाद मामले को सुनने का भरोसा दिया है।

शाहदरा थाने में हुए विवाद से शुरू हुआ मामला

यह विवाद 23 अक्टूबर को पूर्वी दिल्ली के शाहदरा पुलिस स्टेशन में हुई घटना से जुड़ा है। उस दिन अधिवक्ता ललित बंसल कथित हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बाद कुछ वकील मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर थाने पहुंचे थे।

वकीलों का आरोप है कि एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और थाना प्रभारी ने आरोपियों को गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया और कथित तौर पर छोड़ दिया गया।

वकीलों के अनुसार, जब वे इस बारे में सवाल करने दोबारा थाने पहुंचे तो एसीपी ने अपनी रिवॉल्वर दिखाकर उन्हें धमकाया। हालांकि, पुलिस की ओर से घटना का अलग पक्ष भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार, विवाद की शुरुआत मोटरसाइकिल से जुड़े मामले को लेकर दो समूहों के बीच हुई झड़प से हुई थी। हथियार दिखाने और धमकी देने से जुड़े आरोपों की जांच जारी है।

पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन के बाद निलंबित हुए ACP

वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच विवाद के बाद एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के इंस्पेक्टर अरुण कुमार का 28 अक्टूबर को तबादला कर दिया गया था। इसके विरोध में 2 नवंबर को एसीपी वशिष्ठ सहित कई पुलिसकर्मी दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर एकत्र हुए और पुलिस कमिश्नर से मुलाकात की मांग की।

इस प्रदर्शन के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित कर दिया। उनके खिलाफ वकीलों की ओर से कथित धमकी और आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर कार्रवाई की मांग भी की जा रही है।

बार एसोसिएशन ने की कार्रवाई की मांग

केंद्रीय दिल्ली कोर्ट बार एसोसिएशन ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर एसीपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, विभागीय जांच और निष्पक्ष जांच की मांग की है। एसोसिएशन ने मामले की समयबद्ध जांच कराने और जांच पूरी होने तक अधिकारी के हथियार वापस लेने की मांग भी उठाई है।

वहीं, एसीपी के निलंबन के बाद रोहिणी कोर्ट बार एसोसिएशन ने काम से दूर रहने का अपना आह्वान वापस ले लिया और वकीलों से नियमित न्यायिक कार्य शुरू करने को कहा।

फिलहाल, दिल्ली हाईकोर्ट में मामले पर आगे की सुनवाई औपचारिक याचिका दाखिल होने के बाद होगी। अदालत के समक्ष आरोपों और संबंधित सामग्री पेश किए जाने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।

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