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पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं चाहता सुप्रीम कोर्ट, अधिकारियों को सख्ती से नियम लागू करने की चेतावनी

30 अक्तूबर 2026:  दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण और पटाखों के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह फिलहाल पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं है। हालांकि, अदालत ने साफ किया कि हर साल आदेश जारी करने का कोई फायदा नहीं है, जब तक संबंधित अधिकारी जमीन पर उन्हें प्रभावी तरीके से लागू नहीं करते। गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र और दिल्ली सरकार के अधिकारियों से मौजूदा प्रतिबंधों और नियमों के पालन को लेकर जवाब मांगा।

हर साल आदेश देने से नहीं होगा फायदा

जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ दिल्ली-NCR में पटाखों के इस्तेमाल से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी। अदालत ने कहा कि पटाखों का मुद्दा केवल इंसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर सभी जीवों पर पड़ता है।

पीठ ने अधिकारियों को चेताया कि अगर अदालत के निर्देशों का पालन जमीन पर नहीं हुआ तो आदेश जारी करने का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा। अदालत ने कहा कि वह पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं है, लेकिन नियमों की लगातार अनदेखी होने पर सख्त रुख अपनाना पड़ सकता है।

अधिकारियों से कार्रवाई का हिसाब मांगा

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार से पूछा कि पिछले साल पटाखों को लेकर जारी निर्देशों के बाद वास्तव में क्या कार्रवाई की गई। अदालत ने जानना चाहा कि निगरानी के लिए टीमें बनाई गई थीं या नहीं, लाइसेंसधारकों की जांच हुई या नहीं और प्रतिबंधित पटाखों को जब्त करने के लिए क्या कदम उठाए गए।

पीठ ने यह भी पूछा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कितनी एफआईआर दर्ज की गईं और कितने लाइसेंस रद्द करने या अन्य कार्रवाई के मामले सामने आए। अदालत ने अधिकारियों से कार्रवाई से संबंधित ठोस आंकड़े पेश करने को कहा।

ग्रीन पटाखों और तय समय पर इस्तेमाल की बात

सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि पटाखों के इस्तेमाल को पूरी तरह प्रतिबंधित करने के बजाय नियंत्रित करने के लिए व्यावहारिक व्यवस्था जरूरी है। अदालत ने ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल और उन्हें जलाने के लिए निर्धारित समय-सीमा का पालन कराने पर जोर दिया।

पीठ ने कहा कि प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि बाजार में वास्तव में निर्धारित मानकों वाले ग्रीन पटाखे ही बेचे जाएं। प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए प्रभावी निगरानी जरूरी है।

केंद्र ने प्रदूषण से निपटने की तैयारियां बताईं

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने दिल्ली सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि नवंबर से प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई उपाय लागू किए जाएंगे। इनमें पुराने वाहनों पर प्रतिबंध संबंधी कदम, निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर नियंत्रण तथा सरकारी कार्यालयों के समय में बदलाव जैसे उपाय शामिल हैं।

केंद्र सरकार ने पटाखों में बेरियम के इस्तेमाल से जुड़े वैज्ञानिक अध्ययन और आंतरिक विचार-विमर्श की जानकारी भी अदालत को दी।

वायु प्रदूषण पर आगे भी नजर रखेगी अदालत

यह मामला दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण से जुड़े व्यापक मुद्दों का हिस्सा है। इसमें पटाखों के अलावा पराली जलाने और ठोस कचरे के प्रबंधन जैसे विषय भी शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों से निर्देशों के पालन, सामने आने वाली मुश्किलों और आगे उठाए जाने वाले कदमों का विवरण मांगा है। अदालत का जोर इस बात पर है कि त्योहारों के दौरान लोगों की भावनाओं का ध्यान रखते हुए प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को भी कम किया जाए।

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