30 अक्तूबर 2026: हरियाणा के रोहतक स्थित पंडित भगवत दयाल शर्मा पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PGIMS) ने एनेस्थीसिया में इस्तेमाल होने वाले प्रोपोफोल इंजेक्शन के एक विशेष बैच का उपयोग तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। संस्थान ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि उनके पास उपलब्ध इस बैच का स्टॉक केंद्रीय स्टोर में वापस जमा कराया जाए। यह कदम अस्पताल में सर्जरी के बाद कुछ मरीजों की अचानक हुई मौतों की जांच के बीच उठाया गया है। हालांकि, अभी यह साबित नहीं हुआ है कि इन मौतों का संबंध इंजेक्शन से था। <Cite refs={[“turn902305search0″,”turn902305search3″,”turn902305news6”]}/>
DMER के निर्देश के बाद लिया गया फैसला
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय (DMER) को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से शिकायत मिली थी। इसके बाद DMER ने रोहतक के उपायुक्त और संबंधित औषधि नियंत्रण अधिकारियों को मामले में कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
28 अक्टूबर को जारी निर्देशों के बाद PGIMS में संबंधित बैच के इंजेक्शन का इस्तेमाल रोकने और उपलब्ध स्टॉक को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया शुरू की गई। अधिकारियों ने निर्देश दिया है कि जांच पूरी होने और आगे के आदेश मिलने तक इस स्टॉक का उपयोग, वितरण या निपटान नहीं किया जाए। <Cite refs={[“turn902305search0″,”turn902305search3”]}/>
11,283 इंजेक्शन कब्जे में लिए गए
रिपोर्ट के अनुसार, औषधि नियंत्रण अधिकारियों ने PGIMS के केंद्रीय स्टोर का निरीक्षण किया और प्रोपोफोल इंजेक्शन के संबंधित बैच के 11,283 इंजेक्शन कब्जे में लिए। इनके नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। जांच पूरी होने तक इस बैच के इस्तेमाल पर रोक रहेगी।
यह बैच नियॉन कंपनी द्वारा निर्मित बताया गया है। अधिकारियों ने अस्पताल के विभागाध्यक्षों को अपने पास मौजूद इंजेक्शन केंद्रीय स्टोर में लौटाने के निर्देश दिए हैं। मरीजों के इलाज में बाधा न आए, इसके लिए अन्य बैचों के इंजेक्शन की उपलब्धता सुनिश्चित करने को भी कहा गया है। <Cite refs={[“turn902305search3″,”turn902305search1”]}/>
दो महीने में पांच मरीजों की हुई थी मौत
PGIMS रोहतक में करीब दो महीने के दौरान पांच मरीजों की मौत के बाद पहले ही जांच शुरू की गई थी। ये मरीज अलग-अलग विभागों में इलाज करा रहे थे और कुछ की सर्जरी भी हुई थी। सितंबर में सामने आई जांच रिपोर्ट के मुताबिक, संस्थान की समिति को उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड में डॉक्टरों या अस्पताल कर्मचारियों की लापरवाही का प्रमाण नहीं मिला था। हालांकि, पोस्टमार्टम नहीं होने के कारण समिति मौतों का सटीक कारण निर्धारित नहीं कर सकी थी। <Cite refs={[“turn902305search2″,”turn902305search4”]}/>
प्रोपोफोल इंजेक्शन का क्या होता है इस्तेमाल?
प्रोपोफोल एक एनेस्थेटिक दवा है, जिसका इस्तेमाल सर्जरी या अन्य चिकित्सा प्रक्रियाओं के दौरान मरीज को बेहोश करने अथवा नींद की अवस्था में लाने के लिए किया जाता है। इसे नस के माध्यम से दिया जाता है और इसका असर तेजी से होता है।
इस दवा के एक विशेष बैच को जांच के लिए रोकना एहतियाती कदम है। लैब रिपोर्ट और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही इसकी गुणवत्ता और मरीजों की मौतों से किसी संभावित संबंध के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
जांच रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल PGIMS ने संबंधित बैच का इस्तेमाल बंद कर दिया है और उपलब्ध स्टॉक सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। इंजेक्शन के नमूनों की जांच जारी है। जांच पूरी होने से पहले दवा को मरीजों की मौत का कारण मानना सही नहीं होगा। अब लैब रिपोर्ट और अधिकारियों की जांच के निष्कर्षों पर नजर रहेगी।
