30 अक्तूबर 2026: आमतौर पर लोग रिटायरमेंट के बाद आरामदायक जीवन बिताने की योजना बनाते हैं, लेकिन जालंधर के 62 वर्षीय गुरशरण सिंह बाहिया ने इस उम्र में रोमांच और पहाड़ों की दुनिया को अपना नया जुनून बना लिया है। पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के पूर्व अधिकारी बाहिया ने एवरेस्ट बेस कैंप तक ट्रेकिंग की है। इसके अलावा उन्होंने कश्मीर की ग्रेट लेक्स यात्रा पूरी की और लद्दाख के कई ऊंचे पहाड़ी दर्रों तक मोटरसाइकिल से सफर किया।
34 साल की नौकरी के बाद शुरू किया नया सफर
गुरशरण सिंह बाहिया PSPCL में डिप्टी चीफ इंजीनियर (सिविल) के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने 34 साल की सेवा के बाद वर्ष 2022 में रिटायरमेंट लिया। नौकरी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण पहले उन्हें लंबे ट्रेक और पहाड़ी यात्राओं का समय नहीं मिल पाता था।
मध्य प्रदेश में बचपन बिताने के दौरान ही उन्हें प्रकृति और हरियाली से लगाव हो गया था। 23 साल की उम्र में नौकरी के लिए पंजाब आने के बाद भी पहाड़ों और प्राकृतिक स्थानों के प्रति उनका आकर्षण बना रहा।
हिमाचल प्रदेश के जोगिंदर नगर स्थित शानन पावर हाउस में तैनाती के दौरान उन्होंने छोटी-छोटी ट्रेकिंग शुरू की। पहाड़ी इलाके में काम करने के कारण पैदल चलना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बना और धीरे-धीरे यह शौक जुनून में बदल गया।
5,364 मीटर की ऊंचाई पर पहुंचे
रिटायरमेंट के बाद बाहिया ने अपनी पसंद के कठिन ट्रेक पूरे करने की तैयारी शुरू की। वर्ष 2023 में उन्होंने भूटान का ड्रुक पाथ ट्रेक किया, जहां वह करीब 4,250 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचे।
इसके बाद वर्ष 2024 में उन्होंने एवरेस्ट बेस कैंप ट्रेक पूरा किया। यह बेस कैंप समुद्र तल से लगभग 5,364 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इसी साल उन्होंने कश्मीर ग्रेट लेक्स ट्रेक भी किया, जो करीब 4,200 मीटर की ऊंचाई तक जाता है।
वर्ष 2026 में उन्होंने नेपाल के मर्दी हिमाल ट्रेक और अन्नपूर्णा बेस कैंप ट्रेक को भी अपनी उपलब्धियों में शामिल किया। मर्दी हिमाल ट्रेक के दौरान वह करीब 4,500 मीटर और अन्नपूर्णा बेस कैंप में लगभग 4,130 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचे।
लद्दाख के ऊंचे दर्रों पर मोटरसाइकिल से सफर
गुरशरण सिंह बाहिया का रोमांच केवल पैदल पहाड़ चढ़ने तक सीमित नहीं है। उन्हें मोटरसाइकिल से पहाड़ी इलाकों की यात्रा करना भी पसंद है।
वर्ष 2025 में उन्होंने स्पीति घाटी की यात्रा के दौरान कुंजुम पास और चंद्रताल तक बाइक से सफर किया। हाल ही में लद्दाख यात्रा के दौरान उन्होंने उमलिंग ला, खारदुंग ला और संकू ला जैसे ऊंचे पहाड़ी दर्रों को पार किया। इसके अलावा उन्होंने चुशुल के आसपास के दूरदराज इलाकों की भी यात्रा की।
इन यात्राओं के दौरान पहाड़ों के प्राकृतिक नजारे और सूर्योदय के अनुभव उनके लिए खास रहे हैं। एवरेस्ट और अन्नपूर्णा बेस कैंप के दौरान देखा गया सूर्योदय उनकी यादगार यात्राओं में शामिल है।
रोजाना फिटनेस पर देते हैं ध्यान
ऐसी कठिन यात्राओं के लिए शारीरिक फिटनेस और सहनशक्ति बेहद जरूरी होती है। बाहिया ने इसके लिए नियमित दिनचर्या बनाई हुई है। वह रोज जिम जाते हैं, करीब 4 से 5 किलोमीटर दौड़ते हैं और नियमित रूप से 20 किलोमीटर तक साइकिल चलाते हैं।
उनका मानना है कि पहाड़ों में लंबी दूरी तय करने और अधिक ऊंचाई पर ट्रेकिंग करने के लिए शरीर को तैयार रखना जरूरी है। इसी वजह से वह अपनी फिटनेस को प्राथमिकता देते हैं।
परिवार भी करता है पूरा सहयोग
उनकी पत्नी परमजीत कौर के अनुसार, गुरशरण सिंह बाहिया को बचपन से ही प्रकृति और बाहर घूमने का शौक रहा है। उनकी बेटी कैलिफोर्निया में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है और वह भी ट्रेकिंग में रुचि रखती हैं।
बाहिया की कहानी बताती है कि रिटायरमेंट के बाद भी व्यक्ति अपने पुराने सपनों को पूरा करने के लिए नई शुरुआत कर सकता है। 62 साल की उम्र में एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचना और लद्दाख के ऊंचे दर्रों पर बाइक चलाना उनके साहस, नियमित अभ्यास और घूमने के जुनून को दर्शाता है।
