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हरियाणा में निजी बसों का किराया ₹1 से बढ़ाकर ₹2 प्रति किलोमीटर करने की मांग, ऑपरेटरों ने बताई वजह

27 अक्तूबर 2026: हरियाणा में निजी बस ऑपरेटर यात्री किराए में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। ऑपरेटरों का कहना है कि पिछले छह वर्षों से किराए में संशोधन नहीं हुआ है, जबकि डीजल, बीमा, कर्मचारियों के वेतन, टायर, स्पेयर पार्ट्स और बसों के रखरखाव पर खर्च लगातार बढ़ा है। इसी वजह से मौजूदा किराया व्यवस्था में बसों का संचालन करना मुश्किल हो रहा है।

₹1 से ₹2 प्रति किलोमीटर किराया करने की मांग

निजी बस ऑपरेटरों के संगठनों ने मौजूदा यात्री किराए को ₹1 प्रति किलोमीटर से बढ़ाकर ₹2 प्रति किलोमीटर करने की मांग की है। संगठन चाहते हैं कि किराए में समय-समय पर संशोधन के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) से जुड़ी व्यवस्था भी बनाई जाए।

ऑपरेटरों के अनुसार, मौजूदा किराया और संचालन पर होने वाला खर्च एक-दूसरे के अनुरूप नहीं रह गए हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते किराए में बदलाव नहीं किया गया, तो निजी बस सेवाओं को जारी रखना और कठिन हो सकता है।

डीजल से लेकर रखरखाव तक बढ़ा खर्च

निजी बस ऑपरेटरों ने किराया बढ़ाने के पीछे कई कारण बताए हैं। इनमें डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी, बीमा प्रीमियम, कर्मचारियों के वेतन, टायर और स्पेयर पार्ट्स की लागत के साथ बसों की मरम्मत और रखरखाव का खर्च शामिल है।

ऑपरेटरों का तर्क है कि इन खर्चों में वृद्धि के बावजूद यात्री किराया स्थिर रहने से उनकी आय और व्यय के बीच अंतर बढ़ गया है। ऐसे में वे किराया संशोधन को कारोबार की निरंतरता के लिए जरूरी बता रहे हैं।

करीब 2,000 बसों की सेवाएं बंद करने की चेतावनी

किराया बढ़ाने की मांग को लेकर एसोसिएशन ने राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपे हैं। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मांग पर फैसला नहीं हुआ, तो वह करीब 2,000 बसों की चाबियां और परमिट परिवहन मंत्री को सौंपने पर विचार कर सकता है। ऑपरेटरों ने सरकार से इस मुद्दे पर समयबद्ध निर्णय लेने की मांग की है।

यदि बस सेवाएं प्रभावित होती हैं, तो उन यात्रियों को परेशानी हो सकती है जो रोजाना काम, पढ़ाई या अन्य जरूरतों के लिए निजी बसों पर निर्भर रहते हैं। हालांकि, सेवाएं बंद करने की चेतावनी को वास्तविक बंदी नहीं माना जाना चाहिए। आगे की स्थिति सरकार के फैसले और ऑपरेटरों के कदमों पर निर्भर करेगी।

बस स्टैंड शुल्क पर भी राहत चाहते हैं ऑपरेटर

एसोसिएशन ने बस स्टैंड शुल्क पर लगने वाले जीएसटी और इन शुल्कों में सालाना बढ़ोतरी की समीक्षा करने की मांग भी उठाई है। संगठन का कहना है कि जहां अतिरिक्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं, वहां शुल्क की समीक्षा की जानी चाहिए।

ऑपरेटरों ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और परिवहन मंत्री अनिल विज से प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर किराया संशोधन पर समयबद्ध फैसला लेने की अपील की है।

अब सरकार के फैसले पर नजर

निजी बस ऑपरेटरों की मांग पर राज्य सरकार का फैसला अहम होगा। किराए में बढ़ोतरी होने पर यात्रियों के खर्च पर असर पड़ सकता है, जबकि मौजूदा दरें जारी रहने पर ऑपरेटरों की ओर से बताई गई वित्तीय चुनौतियां बनी रह सकती हैं।

फिलहाल किराया ₹2 प्रति किलोमीटर करने की मांग ऑपरेटरों का प्रस्ताव है, सरकार द्वारा मंजूर नई दर नहीं। अंतिम फैसला आने तक मौजूदा किराया व्यवस्था में बदलाव की पुष्टि नहीं की जा सकती।

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