21 अक्तूबर 2026: पंजाब राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने मोहाली के सेक्टर-119 स्थित नारायणा ई-टेक्नो स्कूल को एक बच्ची को शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(c) के तहत दाखिला देने का निर्देश दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित पात्रता शर्तें पूरी होने पर बच्ची को कानून, नियमों और सरकार के निर्देशों के विपरीत दाखिले के लाभ से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। यह मामला एक पिता की शिकायत के बाद सामने आया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बेटी का RTE के तहत दाखिला लंबे समय से लंबित है।
क्या है पूरा मामला?
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, खरड़ के सेक्टर-127 में रहने वाले बच्ची के पिता ने आयोग से शिकायत की थी। पिता के मुताबिक, उनकी बेटी को शैक्षणिक सत्र 2025-26 में स्कूल में सामान्य फीस देकर दाखिला दिलाया गया था। बाद में उन्हें पंजाब सरकार के शिक्षा के अधिकार कानून को लागू करने संबंधी निर्देशों की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने बेटी को RTE के तहत दाखिले का लाभ देने के लिए स्कूल से संपर्क किया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि सितंबर 2025 से लगातार प्रयास करने के बावजूद बच्ची का दाखिला RTE के तहत अंतिम रूप नहीं ले सका। पिता ने दावा किया कि स्कूल प्रबंधन उनसे फीस जमा कराने की मांग करता रहा। उनका यह भी आरोप है कि फीस न देने पर कई बार उनकी बेटी को कक्षा में बैठने से रोका गया और कहा गया कि फीस भरने के बाद ही वह स्कूल आ सकती है।
पिता के अनुसार, इस स्थिति से बच्ची की पढ़ाई प्रभावित हुई और उसे मानसिक तनाव तथा कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने आशंका जताई कि दाखिले का मामला लंबित रहने से शैक्षणिक सत्र 2026-27 की पढ़ाई और आगामी परीक्षाओं पर भी असर पड़ सकता है।
मानवाधिकार आयोग ने क्या निर्देश दिए?
आयोग के सदस्य जितेंद्र सिंह शंटी ने 18 सितंबर 2026 को जारी पत्र में स्कूल को निर्देश दिया कि बच्ची को RTE अधिनियम के तहत दाखिले का लाभ देने के मामले में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। आयोग ने कहा कि निर्धारित पात्रता पूरी होने पर बच्ची को अधिनियम, नियमों और सरकारी निर्देशों के विपरीत दाखिले से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
इस मामले को आगे की कार्रवाई के लिए पंजाब के स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव और मोहाली के उपायुक्त के पास भी भेजा गया है। इसका उद्देश्य संबंधित विभागों के माध्यम से शिकायत की जांच और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
RTE कानून क्या कहता है?
शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(c) के तहत पात्र निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में प्रवेश स्तर की कक्षा में कम से कम 25 प्रतिशत सीटें कमजोर वर्गों और वंचित समूहों के बच्चों के लिए आरक्षित रखने का प्रावधान है। ये दाखिले कानून और लागू सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार किए जाते हैं।
इस प्रावधान का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित पृष्ठभूमि के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच प्रदान करना है। पात्र बच्चों को निर्धारित नियमों के अनुसार निजी स्कूलों में शिक्षा का अवसर मिल सके, इसके लिए सरकार और शिक्षा विभाग समय-समय पर निर्देश जारी करते हैं।
पंजाब में भी RTE के प्रावधानों को लागू करने के लिए जिला शिक्षा अधिकारियों और निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं। ऐसे मामलों में पात्रता, आवश्यक दस्तावेज और प्रवेश प्रक्रिया की जांच लागू सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार की जाती है।
फीस को लेकर क्या है विवाद?
शिकायतकर्ता पिता का कहना है कि फीस से संबंधित मुद्दा सरकार और स्कूल के बीच का मामला है। उनका तर्क है कि यदि बच्ची RTE के तहत निर्धारित पात्रता पूरी करती है, तो उसे कानून के अनुसार मिलने वाले लाभ से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
हालांकि, स्कूल प्रबंधन ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इसलिए फीस की मांग, बच्ची को कक्षाओं में शामिल होने से रोकने और दाखिले में देरी से संबंधित आरोपों पर स्कूल का विस्तृत पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
मामले की जांच के दौरान दस्तावेजों और प्रवेश संबंधी नियमों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। आयोग का निर्देश भी निर्धारित पात्रता शर्तें पूरी होने के आधार पर लागू होगा।
शिक्षा विभाग ने क्या कहा?
मोहाली की उप जिला शिक्षा अधिकारी (डिप्टी डीईओ) रितु वर्मा ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। उनके अनुसार, इस संबंध में एक रिपोर्ट प्राप्त हुई है और जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) आगे की कार्रवाई करेंगे।
इससे संकेत मिलता है कि मामला शिक्षा विभाग के स्तर पर भी विचाराधीन है। जांच के बाद संबंधित अधिकारियों की ओर से आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
बच्चों की शिक्षा के अधिकार पर फिर चर्चा
मोहाली का यह मामला RTE अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन और पात्र बच्चों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने से जुड़े सवालों को सामने लाता है। अभिभावकों के लिए दाखिले की प्रक्रिया स्पष्ट होना और बच्चों की पढ़ाई बिना अनावश्यक रुकावट के जारी रहना महत्वपूर्ण है।
फिलहाल, मानवाधिकार आयोग ने स्कूल को निर्धारित पात्रता के अधीन बच्ची को RTE का लाभ देने के निर्देश दिए हैं। शिक्षा विभाग मामले की जांच कर रहा है। आगे की कार्रवाई और दाखिले की स्थिति से यह स्पष्ट होगा कि बच्ची की पढ़ाई को नियमित रखने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
