19 अक्तूबर 2026: दिल्ली में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े संशोधित नियमों के कुछ प्रमुख प्रावधानों को लागू करने में 270 दिनों की देरी की गई है। दिल्ली सरकार के गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, दिल्ली फायर सर्विस (संशोधन) नियम, 2025 के कुछ प्रावधानों की शुरुआत की तारीख बढ़ाकर 20 मई 2027 कर दी गई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब राजधानी में आग लगने की घटनाओं और इमारतों की अग्नि सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
अधिसूचना 16 अक्टूबर 2026 को जारी की गई और 17 अक्टूबर को दिल्ली राजपत्र में प्रकाशित हुई। इसमें नियम 34, 35, 36, 37 और 38 के साथ पहली तथा सातवीं अनुसूची के लागू होने की अवधि को 24 अगस्त 2026 से आगे बढ़ाकर 20 मई 2027 तक कर दिया गया है। इन प्रावधानों को पहले 90 दिनों की संक्रमण अवधि के बाद लागू किया जाना था।
तीसरे पक्ष के ऑडिट से जुड़े हैं प्रमुख प्रावधान
वर्ष 2025 में किए गए संशोधनों के तहत अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र जारी करने और नवीनीकरण की प्रक्रिया में अधिकृत निजी अग्नि सुरक्षा ऑडिटरों की भूमिका को शामिल किया गया था। नए ढांचे के अनुसार, निर्धारित योग्यता और अनुभव वाले ऑडिटर इमारतों का निरीक्षण कर अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र से जुड़ी प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इन बदलावों का उद्देश्य अग्नि सुरक्षा जांच की प्रक्रिया को व्यवस्थित करना था।
हालांकि, निजी ऑडिटरों की नियुक्ति और उपलब्धता को लेकर व्यावहारिक समस्याएं सामने आई थीं। सितंबर में आई रिपोर्ट के अनुसार, ऑडिटरों के पैनल में शामिल होने के लिए अपेक्षा से कम आवेदन मिले थे। इसके पीछे जिम्मेदारी और संभावित कानूनी जवाबदेही से जुड़ी चिंताओं को भी एक कारण बताया गया था।
नियमों की समयसीमा पर उठे सवाल
दिल्ली फायर सर्विस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस विस्तार के कानूनी आधार पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना था कि 90 दिनों की निर्धारित अवधि पहले ही समाप्त हो चुकी थी और संबंधित प्रावधान 24 अगस्त से प्रभावी हो गए थे। ऐसे में उनकी लागू होने की तारीख को पीछे से बढ़ाने की वैधता स्पष्ट करने की जरूरत है। रिपोर्ट के अनुसार, विभाग इस मामले में गृह और विधि विभाग से स्पष्टीकरण मांगने पर विचार कर रहा है।
इस मामले में यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि अधिसूचना के बाद संबंधित प्रावधानों की कानूनी स्थिति क्या होगी और अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र जारी करने की जिम्मेदारी किस व्यवस्था के तहत निभाई जाएगी। इस पर संबंधित विभागों की व्याख्या और कानूनी राय महत्वपूर्ण होगी।
दिल्ली में अग्नि सुरक्षा पर बढ़ती चिंता
राजधानी में हाल के महीनों में आग लगने की गंभीर घटनाओं के बाद इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। मई में विवेक विहार में एक आवासीय इमारत में लगी आग में नौ लोगों की मौत हुई थी। आग से बचाव, आपातकालीन निकासी और बचाव कार्यों की तैयारियों को लेकर भी जांच की गई थी।
इसी पृष्ठभूमि में केंद्र ने दिल्ली नगर निगम से आवासीय इमारतों, अनधिकृत कॉलोनियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा और संरचनात्मक ऑडिट के लिए योजना तैयार करने को कहा है। दिल्ली फायर सर्विस को भी अपनी क्षमता मजबूत करने के लिए तीन वर्षीय रणनीतिक योजना तैयार करने को कहा गया है।
अगस्त 2026 में अधिसूचित अलग संशोधित नियमों में ऊंची इमारतों के लिए दमकल वाहनों की आवाजाही हेतु कम से कम छह मीटर चौड़ा रास्ता, स्वचालित अलार्म और स्प्रिंकलर, अग्निशमन के लिए अलग पानी का भंडारण तथा अग्नि नियंत्रण कक्ष जैसी व्यवस्थाओं का उल्लेख किया गया था। इन नियमों के क्रियान्वयन को भवन उपनियमों में आवश्यक संशोधनों से भी जोड़ा गया है।
अग्नि सुरक्षा नियमों का उद्देश्य केवल प्रमाणपत्र जारी करना नहीं, बल्कि इमारतों में आग लगने की स्थिति में जान-माल के नुकसान को कम करना भी है। इसलिए नियमों के लागू होने की समयसीमा, निरीक्षण व्यवस्था और जिम्मेदार एजेंसियों की भूमिका को लेकर स्पष्टता जरूरी है।
अब 270 दिनों की समयसीमा बढ़ने के बाद संबंधित विभागों के सामने कानूनी स्थिति स्पष्ट करने और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने की चुनौती है। राजधानी में आग की घटनाओं को देखते हुए यह मुद्दा सार्वजनिक सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण बना हुआ है।
