18 अक्तूबर 2026: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि राज्य में माफियाराज को समाप्त कर कानून का शासन स्थापित किया गया है। उन्होंने दावा किया कि कानून-व्यवस्था में सुधार से प्रदेश में निवेश, विकास और आम जनता के विश्वास को मजबूत करने का आधार तैयार हुआ है। मुख्यमंत्री ने यह बात 17 अक्टूबर को लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून का शासन किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है। उनके अनुसार, पहले उत्तर प्रदेश में अपराध और माफिया के प्रभाव को लेकर चिंताएं व्यक्त की जाती थीं, जबकि अब सरकार ने कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति या पद को संविधान से ऊपर नहीं माना जा सकता और शासन व्यवस्था में कानून का पालन सभी के लिए समान रूप से जरूरी है।
न्याय केवल कानूनी धाराओं तक सीमित नहीं
दीक्षांत समारोह में युवा विधि स्नातकों को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कानून को केवल धाराओं, मुकदमों और अदालतों की कार्यवाही तक सीमित नहीं रखना चाहिए। कानून का वास्तविक उद्देश्य नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना और जरूरतमंद लोगों तक न्याय पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी बिना भेदभाव के सुलभ न्याय मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री के अनुसार, न्याय व्यवस्था में आम नागरिक का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है। यह विश्वास निष्पक्षता, पीड़ितों के सम्मान और कानूनी पेशे से जुड़े लोगों के ईमानदार आचरण से मजबूत होता है।
योगी आदित्यनाथ ने युवा वकीलों से सत्य, निष्पक्षता, धर्म और संविधान के प्रति प्रतिबद्ध रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब अधिवक्ताओं के सामने अन्याय का मामला आए, तो उन्हें अपने पेशेवर दायित्वों और संवैधानिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
2017 से पहले की स्थिति का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की छवि का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय प्रदेश में निवेश की सुरक्षा, कनेक्टिविटी और विकास की संभावनाओं को लेकर सवाल उठाए जाते थे। उनके अनुसार, इस धारणा को बदलने के लिए सरकार ने कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करने पर जोर दिया।
उन्होंने दावा किया कि कानून का शासन स्थापित करना राज्य में बदलाव की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। मुख्यमंत्री ने प्रयागराज में माफिया के प्रभाव का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले प्रभावशाली आपराधिक तत्वों का दबदबा था, लेकिन अब कानून के शासन के तहत विकास को आगे बढ़ाया जा रहा है। ये बातें मुख्यमंत्री के अपने आकलन और सरकार के रुख को दर्शाती हैं।
विकसित भारत 2047 में युवा वकीलों की भूमिका
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का भी जिक्र किया। उन्होंने युवाओं को इस लक्ष्य में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने एक उदाहरण के माध्यम से कहा कि यदि विकसित भारत 2047 को एक मुकदमे के रूप में देखा जाए, तो देश के नागरिक उसके याचिकाकर्ता और युवा विधि स्नातक उनके पक्ष रखने वाले अधिवक्ता होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के विकास के लिए केवल सड़कें, कारखाने और एक्सप्रेसवे बनाना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ न्याय, अधिकारों और कर्तव्यों पर आधारित व्यवस्था को भी मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने कानूनी पेशे में ईमानदारी, प्रमाणों के आधार पर तर्क और संविधान के प्रति निष्ठा को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने देश के ऐतिहासिक घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए स्वतंत्रता, संविधान लागू होने और आपातकाल के अनुभवों से मिलने वाले सबक पर भी बात की। उनके अनुसार, इन घटनाओं से कानून के शासन और सत्ता के मनमाने इस्तेमाल के बीच का अंतर समझा जा सकता है।
यूपी की अर्थव्यवस्था को लेकर लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्य में विकास की योजनाओं और कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है। उनके अनुसार, कानून का शासन, निष्पक्षता और जनता का विश्वास आर्थिक प्रगति के लिए भी जरूरी हैं।
समारोह में युवा विधि स्नातकों को संदेश देते हुए मुख्यमंत्री ने दोहराया कि कानून की असली ताकत केवल उसके लिखित प्रावधानों में नहीं, बल्कि लोगों को मिलने वाले न्याय और व्यवस्था के प्रति उनके भरोसे में है
