18 अक्तूबर 2026: राजधानी दिल्ली में सड़कों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 1,000 मैकेनिकल लिटर पिकर मशीनें तैनात करने की पहल शुरू की गई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार, 17 अक्टूबर को दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के सरिता विहार स्थित एम ब्लॉक में फिक्स्ड कम्पैक्टर ट्रांसफर स्टेशन (FCTS) का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने पहले चरण में 50 मैकेनिकल लिटर पिकर मशीनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही घर-घर से कचरा इकट्ठा करने और उसे निर्धारित स्थानों तक पहुंचाने के लिए नए वाहनों को भी शुरू किया गया।
इस पहल की एक खास बात यह रही कि सफाई वाहनों के संचालन के लिए 35 महिला ड्राइवरों को नियुक्त किया गया है। सरकार का उद्देश्य मशीनों, वाहनों और कर्मचारियों की मदद से कचरा संग्रहण को अधिक व्यवस्थित बनाना तथा दिल्ली के सार्वजनिक स्थानों पर फैले कचरे को हटाने की प्रक्रिया में सुधार करना है।
दिल्ली के सभी 250 वार्डों में तैनात होंगी मशीनें
दिल्ली नगर निगम (MCD) के सभी 250 वार्डों में कुल 1,000 मैकेनिकल लिटर पिकर मशीनें तैनात करने की योजना है। इन मशीनों का इस्तेमाल सड़कों, फुटपाथों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर बिखरे कचरे को उठाने के लिए किया जाएगा। पहले चरण में 50 मशीनें रवाना की गई हैं, जबकि बाकी मशीनों की आपूर्ति और तैनाती चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।
बैटरी से चलने वाली ये मशीनें सफाई कर्मचारियों को छोटे कचरे को इकट्ठा करने में मदद करेंगी। प्लास्टिक के रैपर, कप, बोतलें, पत्तियां और अन्य हल्का कचरा उठाने में इनका इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे सफाई कार्य को अधिक व्यवस्थित बनाने और कर्मचारियों की मेहनत कम करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि कचरा प्रबंधन सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में सफाई व्यवस्था को सुधारने के लिए केवल मशीनों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि कचरे के संग्रहण, परिवहन और प्रसंस्करण के लिए पूरी व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी है।
दिल्ली में रोजाना 15 हजार मीट्रिक टन कचरा
मुख्यमंत्री के अनुसार, दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 15,000 मीट्रिक टन कचरा पैदा होता है। पहले उपलब्ध व्यवस्था के तहत करीब 6,000 से 7,000 मीट्रिक टन कचरे का ही प्रसंस्करण हो पाता था। इस अंतर के कारण कचरे के निपटान और लैंडफिल स्थलों पर बढ़ते दबाव की समस्या बनी हुई है।
इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार नए वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्र स्थापित करने, मौजूदा संयंत्रों की क्षमता बढ़ाने और ई-कचरे के लिए अलग केंद्र विकसित करने पर काम कर रही है। इसके अलावा, गोबर के प्रबंधन के लिए बायोगैस संयंत्र स्थापित करने की योजना भी शामिल है।
सरकार का लक्ष्य है कि प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले कचरे का उसी दिन उचित प्रसंस्करण और निपटान किया जा सके। इस उद्देश्य को हासिल करने के लिए अतिरिक्त मशीनरी, परिवहन सुविधाओं, बुनियादी ढांचे और कर्मचारियों की जरूरत होगी।
दक्षिण-पूर्वी दिल्ली में बढ़ेंगी सफाई सुविधाएं
दक्षिण-पूर्वी दिल्ली क्षेत्र में सफाई सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई तरह के वाहन और उपकरण उपलब्ध कराने की मंजूरी दी गई है। इनमें 428 ऑटो-टिपर, 128 ई-रिक्शा, 25 टाटा 407 वाहन, 27 रिफ्यूज कॉम्पैक्टर और 30 हुक लोडर शामिल हैं। इसके अलावा, पांच अतिरिक्त रिफ्यूज कॉम्पैक्टर भी उपलब्ध कराने की योजना है।
क्षेत्र में 100 कॉम्पैक्टर बिन, 1,500 स्टील डस्टबिन, 300 हाई-डेंसिटी पॉलीथीन (HDPE) डस्टबिन और बागवानी से निकलने वाले कचरे को ले जाने के लिए 10 टिपर ट्रक भी उपलब्ध कराए गए हैं।
इन संसाधनों का उद्देश्य घरों से कचरा उठाने, उसे निर्धारित स्थानों तक पहुंचाने और सार्वजनिक जगहों पर कचरा जमा होने की समस्या को कम करना है। हालांकि, इन सुविधाओं का वास्तविक प्रभाव नियमित संचालन, कर्मचारियों की उपलब्धता और कचरे के समय पर निपटान पर निर्भर करेगा।
पुराने कपड़ों और पूजा सामग्री के लिए अलग व्यवस्था
कचरा प्रबंधन योजना के तहत नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने लोगों से मेट्रो स्टेशनों के पास स्थापित ‘अर्पण’ केंद्रों पर पुराने और अनुपयोगी कपड़े जमा कराने की अपील की। इन कपड़ों को पुनः उपयोग या रीसाइक्लिंग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसके अलावा, पुराने धार्मिक प्रतीकों, मूर्तियों और पूजा सामग्री को अलग से इकट्ठा करने और उनका उचित प्रबंधन करने के लिए दिल्ली के सभी 250 वार्डों में विसर्जन कियोस्क स्थापित करने की योजना है। मुख्यमंत्री के अनुसार, लगभग 100 ऐसे कियोस्क पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं।
दिल्ली के महापौर प्रवेश वाही ने भी स्वच्छता अभियान में नागरिकों की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने लोगों से गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने, घरों का कचरा निर्धारित संग्रहण व्यवस्था को सौंपने और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा नहीं फैलाने की अपील की।
नई मशीनों और वाहनों की तैनाती से दिल्ली की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने की उम्मीद है। अब इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सभी वार्डों में उपकरण कितनी तेजी से पहुंचते हैं और कचरे के संग्रहण से लेकर अंतिम निपटान तक की व्यवस्था कितनी प्रभावी ढंग से काम करती है।
