18 अक्तूबर 2026: पंजाब के लुधियाना शहर में 24 घंटे पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने की महत्वाकांक्षी परियोजना को बड़ा झटका लगा है। जालंधर स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) के तकनीकी आकलन में शहर के 19 मौजूदा ओवरहेड वाटर रिजर्वायर मरम्मत और पुनर्वास के लिए अनुपयुक्त पाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन संरचनाओं को सुधारने के बजाय तोड़कर दोबारा बनाने की जरूरत होगी। इससे परियोजना की योजना, निर्माण कार्य और समयसीमा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
24×7 जलापूर्ति परियोजना पर असर
लुधियाना में विश्व बैंक की सहायता से 24×7 सतही जल आपूर्ति परियोजना पर काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य शहर के लोगों को लगातार पेयजल उपलब्ध कराने के लिए आधुनिक जलापूर्ति व्यवस्था तैयार करना है।
परियोजना के तहत 70 नए ओवरहेड वाटर रिजर्वायर बनाने और पहले से मौजूद 66 रिजर्वायर का पुनर्वास करने की योजना है। लेकिन तकनीकी जांच में 19 पुराने रिजर्वायर पुनर्वास के योग्य नहीं पाए गए। ऐसे में संबंधित स्थानों पर नई संरचनाओं का निर्माण करना पड़ेगा।
इस बदलाव से परियोजना के निर्माण कार्यों में अतिरिक्त समय लगने की आशंका है। हालांकि, इससे कुल लागत कितनी बढ़ेगी और परियोजना की निर्धारित समयसीमा पर कितना असर पड़ेगा, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।
शहर के कई इलाकों में प्रभावित होंगे निर्माण कार्य
तकनीकी आकलन में जिन स्थानों के रिजर्वायर अनुपयुक्त पाए गए हैं, उनमें फोकल प्वाइंट के फेज 5, 6, 7 और 8, फेज 5 के सामने का क्षेत्र, अर्बन एस्टेट फेज 1 और 2, फेज 4-ए मेट्रो रोड, बीआरएस नगर का एच-ब्लॉक, ढोलेवाल, ओवरलॉक गली, मॉडल टाउन गली, शक्ति नगर, जवाहर नगर, शाम नगर, किचलू नगर, टाउन हॉल, नौलखा गार्डन और डेरेसी ग्राउंड शामिल हैं।
इन स्थानों पर पुरानी संरचनाओं को हटाकर नई टंकियां बनाने के लिए अलग से निर्माण योजना तैयार करनी होगी। संबंधित विभागों को यह भी देखना होगा कि नए निर्माण के दौरान जल वितरण व्यवस्था और पहले से बिछाई गई पाइपलाइन के काम में अनावश्यक रुकावट न आए।
पाइपलाइन बिछने के बाद सामने आई समस्या
इस मामले में एक अहम सवाल परियोजना की योजना और निर्माण के बीच समन्वय को लेकर है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ प्रभावित स्थानों पर जल वितरण पाइपलाइन बिछाने का काम पहले ही किया जा चुका है, जबकि अब वहां संबंधित जलाशयों को दोबारा बनाने की जरूरत सामने आई है।
ऐसी स्थिति में निर्माण के विभिन्न चरणों के बीच तालमेल जरूरी हो जाता है। यदि टंकियों के पुनर्निर्माण के कारण डिजाइन या निर्माण योजना में बदलाव करना पड़ा, तो अतिरिक्त सिविल कार्य और समय की जरूरत हो सकती है।
इस घटनाक्रम ने इस बात पर भी सवाल खड़े किए हैं कि पुनर्वास की योजना बनाने से पहले पुरानी संरचनाओं की तकनीकी स्थिति का पर्याप्त आकलन किया गया था या नहीं। हालांकि, इस संबंध में किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय होने या जांच के निष्कर्ष सामने आने की पुष्टि नहीं हुई है।
नगर निगम अधिकारियों ने रिपोर्ट पर कार्रवाई की बात कही
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए शहरी मामलों के विभाग में नगर निगम की अधिकारी और IAS अधिकारी पीयूषा बुरडक ने कहा कि वह अधिकारियों को रिपोर्ट लेकर विस्तृत चर्चा करने और आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश देंगी। उन्होंने यह भी कहा कि मामले में जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
अब संबंधित अधिकारियों के सामने यह स्पष्ट करने की चुनौती है कि 19 रिजर्वायरों के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ाई जाएगी और इससे परियोजना के अन्य हिस्सों पर क्या असर पड़ेगा।
तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित स्थानों की स्थिति, निर्माण की प्राथमिकता और आवश्यक बजट का आकलन करना महत्वपूर्ण होगा। साथ ही, भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचने के लिए मौजूदा संरचनाओं की जांच और निर्माण योजनाओं के समन्वय पर ध्यान देना होगा।
शहरवासियों को 24 घंटे पानी मिलने की योजना
लुधियाना की 24×7 जलापूर्ति परियोजना का उद्देश्य शहर की पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाना और घरों तक नियमित पानी पहुंचाना है। इसके लिए जल भंडारण, वितरण पाइपलाइन और संबंधित बुनियादी ढांचे को विकसित किया जा रहा है।
लेकिन 19 रिजर्वायरों के पुनर्वास के लिए अनुपयुक्त पाए जाने से परियोजना के क्रियान्वयन पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। यदि प्रभावित स्थानों पर दोबारा निर्माण करना पड़ा, तो अधिकारियों को बजट, समयसीमा और मौजूदा कार्यों के बीच संतुलन बनाना होगा।
फिलहाल, परियोजना की कुल लागत में संभावित बढ़ोतरी, निर्माण पूरा होने की नई समयसीमा और प्रभावित इलाकों में काम की प्राथमिकता को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। इन फैसलों से ही स्पष्ट होगा कि तकनीकी आकलन के बाद लुधियाना की 24 घंटे पेयजल आपूर्ति योजना को किस तरह आगे बढ़ाया जाएगा।
