17 अक्तूबर 2026: हरियाणा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार 17 अक्टूबर 2026 को अपने कार्यकाल के दो साल पूरे कर रही है। वर्ष 2024 के विधानसभा चुनावों में लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने के बाद सरकार ने जनकल्याणकारी योजनाओं, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और प्रशासनिक सुधारों को अपनी प्राथमिकताओं में रखा। हालांकि, इन दो वर्षों के दौरान सरकार को चुनावी सफलताओं के साथ किसानों के विरोध, कर्मचारियों के आंदोलनों, कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों और विपक्ष के आरोपों का भी सामना करना पड़ा है।
कल्याणकारी योजनाओं पर सरकार का जोर
सैनी सरकार ने अपने दो साल के कार्यकाल में चुनावी वादों को पूरा करने और विभिन्न वर्गों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर दिया है। सरकार की प्रमुख पहलों में महिलाओं के लिए दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना शामिल है, जिसके तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2,100 रुपये की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, पात्र परिवारों को 500 रुपये में एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध कराने और गरीब मरीजों के लिए मुफ्त डायलिसिस जैसी योजनाओं को भी सरकार अपनी उपलब्धियों में गिनाती है।
सरकार का कहना है कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन, आर्थिक सहायता और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लाभ सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत किया गया है। डिजिटल सेवाओं के विस्तार और सरकारी कामकाज को समयबद्ध बनाने के लिए भी कदम उठाए गए हैं। सरकार ने कई नागरिक सेवाओं को सेवा का अधिकार अधिनियम के दायरे में शामिल करने और भूमि रिकॉर्ड तथा संपत्ति पंजीकरण जैसी प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने पर जोर दिया है।
रोजगार और चुनावी वादों का हिसाब
रोजगार का मुद्दा हरियाणा सरकार के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भर्ती प्रक्रिया में योग्यता और पारदर्शिता को सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया है। सरकार के अनुसार, युवाओं को सरकारी नौकरियां देने और भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को कम करने के लिए कदम उठाए गए हैं।
हालांकि, चुनावी वादों को पूरा करने की गति पर भी सवाल उठ रहे हैं। द ट्रिब्यून की 17 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 के विधानसभा चुनावों में किए गए 261 वादों में से 90 पूरे किए जाने की जानकारी सरकार की ओर से दी गई। सरकार का कहना है कि बाकी वादों पर भी चरणबद्ध तरीके से काम जारी है। इन दावों का स्वतंत्र मूल्यांकन करने के लिए प्रत्येक वादे की स्थिति और उससे संबंधित लाभार्थियों के आंकड़ों को देखना महत्वपूर्ण होगा।
चुनावी जीत से मजबूत हुई राजनीतिक स्थिति
दो साल के कार्यकाल के दौरान भाजपा ने हरियाणा में शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में भी अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी। पार्टी ने 2025 और 2026 के शहरी निकाय चुनावों में जीत दर्ज की। इन नतीजों को भाजपा ने अपनी नीतियों और विकास कार्यक्रमों के समर्थन के रूप में पेश किया।
हालांकि, मार्च 2026 के राज्यसभा चुनाव में राजनीतिक तस्वीर अलग रही। भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा, जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार करमवीर बौद्ध ने करीबी मुकाबले में जीत हासिल की। इस चुनाव के दौरान क्रॉस-वोटिंग के आरोप भी सामने आए। इससे राज्य की राजनीति में दलों के भीतर मतभेद और विधायकों की भूमिका चर्चा का विषय बनी।
विरोध प्रदर्शनों और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना
सैनी सरकार के इन दो वर्षों में कई मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन हुए। किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और कृषि नीतियों को लेकर अपनी मांगें उठाईं। कर्मचारियों के विभिन्न समूहों ने सेवा शर्तों और अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन किए। रोहतक स्थित PGIMS में आउटसोर्स कर्मचारियों का आंदोलन और सफाई कर्मचारियों की लंबी हड़ताल भी सरकार के सामने प्रशासनिक चुनौती बनी।
इसके अलावा, हिसार की कृषि विश्वविद्यालय में छात्रों के विरोध और चनौत गांव में पेयजल पाइपलाइन से संबंधित विवाद ने स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए। विपक्ष ने इन घटनाओं के आधार पर सरकार की कार्यशैली, सार्वजनिक सेवाओं और लोगों की शिकायतों के निपटारे को लेकर आलोचना की।
दिसंबर 2025 में कांग्रेस ने विधानसभा में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी पेश किया था। विपक्ष ने कानून-व्यवस्था, भर्ती प्रक्रिया, राज्य के बढ़ते कर्ज और अन्य मुद्दों को उठाया। प्रस्ताव ध्वनिमत से गिर गया, जिसके बाद भाजपा सरकार को तत्काल राजनीतिक राहत मिली।
सुरक्षा और जवाबदेही पर भी सवाल
सरकार के कार्यकाल में कुछ गंभीर घटनाओं ने सार्वजनिक सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर ध्यान खींचा। इनमें फरवरी 2026 में सूरजकुंड मेले में झूला गिरने की घटना और पुलिस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की आत्महत्या का मामला शामिल रहा। रोहतक और बहादुरगढ़ में बास्केटबॉल से जुड़ी घटनाओं ने भी सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा पैदा की।
इन घटनाओं के बाद प्रशासनिक व्यवस्था, सुरक्षा मानकों और संबंधित मामलों में जवाबदेही तय करने की जरूरत पर सवाल उठे। सरकार के सामने चुनौती यह है कि सार्वजनिक आयोजनों से लेकर सरकारी संस्थानों तक सुरक्षा और निगरानी की व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाए रखा जाए।
किसानों, युवाओं और कर्मचारियों की उम्मीदें
हरियाणा की अर्थव्यवस्था में कृषि, उद्योग और सरकारी रोजगार की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए किसानों को फसल का उचित मूल्य, समय पर खरीद और भुगतान, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तथा कर्मचारियों की सेवा संबंधी समस्याएं सरकार के लिए प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।
सरकार ने किसानों को भुगतान, रोजगार और सामाजिक कल्याण से जुड़े कदमों को अपनी उपलब्धियों में शामिल किया है। दूसरी ओर, विपक्ष ने कृषि खरीद में देरी, MSP से संबंधित दावों और विभिन्न विभागों में कर्मचारियों की समस्याओं को उठाया है। इन मुद्दों पर सरकार के दावों और विपक्ष की आलोचनाओं के बीच वास्तविक स्थिति का आकलन ठोस आंकड़ों और लागू की गई नीतियों के परिणामों के आधार पर किया जाना जरूरी है।
तीसरे वर्ष में सरकार के सामने क्या चुनौतियां?
दो साल पूरे होने के साथ सैनी सरकार के सामने चुनावी वादों को आगे बढ़ाने, रोजगार के अवसर बढ़ाने, किसानों की समस्याओं का समाधान करने और सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने की चुनौती बनी हुई है। कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक समय पर पहुंचाना और उनकी प्रभावशीलता का आकलन करना भी महत्वपूर्ण होगा।
राजनीतिक स्तर पर भाजपा ने लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने और स्थानीय निकाय चुनावों में मिली जीत को अपनी स्थिति के लिए महत्वपूर्ण माना है। वहीं, विपक्ष ने बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था, किसानों की मांगों और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा है।
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली सरकार के पहले दो साल में कल्याणकारी योजनाओं, रोजगार और डिजिटल सेवाओं पर जोर दिखाई दिया है। साथ ही, विरोध प्रदर्शनों, सुरक्षा संबंधी घटनाओं और अधूरे चुनावी वादों ने सरकार के सामने कई चुनौतियां भी रखी हैं। आने वाले समय में सरकार का प्रदर्शन इस बात से आंका जाएगा कि वह घोषित योजनाओं को कितनी प्रभावी तरीके से लागू करती है और जनता की समस्याओं का कितना समाधान कर पाती है।
