15 अक्तूबर 2026: चंडीगढ़ में सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन ने चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (CHB) के मकान मालिकों को बड़ी राहत दी है। अब CHB के 66 हजार से अधिक मकानों में रहने वाले लोगों को अपनी छत पर रूफटॉप सोलर पावर प्लांट लगाने के लिए बोर्ड से पहले अनुमति लेने या अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं होगी। इस फैसले से सोलर प्लांट लगाने की प्रक्रिया पहले की तुलना में आसान होने की उम्मीद है।
पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने CHB के सभी आवासीय मकानों में रूफटॉप सोलर फोटोवोल्टिक सिस्टम लगाने की सुविधा के लिए जरूरत के अनुसार बदलावों को मंजूरी दी है। यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन एच. राजेश प्रसाद की ओर से जारी आदेश में इसकी जानकारी दी गई है।
नए प्रावधानों के तहत मकान मालिकों को सोलर प्लांट लगाने के लिए CHB से अलग से NOC या पूर्व अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सोलर प्लांट लगाने के लिए सभी नियम खत्म कर दिए गए हैं। इच्छुक लोगों को केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। इसके अलावा, सोलर प्लांट लगाने का काम चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी, साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (CREST) के माध्यम से ही करवाना होगा।
इस फैसले का मुख्य उद्देश्य CHB के मकानों में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देना और लोगों को आवश्यक प्रक्रियाओं से राहत देना है। रूफटॉप सोलर सिस्टम के माध्यम से घरों में बिजली का उत्पादन किया जा सकता है, जिससे सामान्य बिजली आपूर्ति पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा और लंबे समय में बिजली के खर्च में भी बचत हो सकती है। हालांकि, वास्तविक बचत घर की बिजली खपत, सोलर सिस्टम की क्षमता और उत्पादन पर निर्भर करेगी।
चंडीगढ़ प्रशासन पहले ही सरकारी भवनों और आवासीय परिसरों में सोलर ऊर्जा के विस्तार पर काम कर चुका है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शहर में सोलर प्लांट लगाने के लिहाज से तकनीकी रूप से उपयुक्त सभी 6,366 सरकारी कार्यालयों और आवासीय परिसरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं। इनकी कुल स्थापित क्षमता 18.1 मेगावाट पीक है। इन संयंत्रों से हर साल लगभग 2.35 करोड़ यूनिट स्वच्छ बिजली पैदा होने का अनुमान है।
इनमें से लगभग 1,400 सरकारी मकानों में बिजली की खपत को शुद्ध रूप से शून्य स्तर तक पहुंचाने की जानकारी भी दी गई है। वहीं, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत चंडीगढ़ के आवासीय क्षेत्र में 148 लाभार्थियों को पहले ही शून्य बिजली बिल मिलने की बात सामने आई है। ये आंकड़े शहर में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से जुड़े प्रयासों को दर्शाते हैं।
प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना फरवरी 2024 में शुरू की गई थी। इस योजना के तहत पात्र घरेलू उपभोक्ताओं को रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के लिए सब्सिडी दी जाती है। तीन किलोवाट तक की क्षमता वाले आवासीय सोलर सिस्टम पर केंद्र सरकार की ओर से अधिकतम 78,000 रुपये तक की सब्सिडी उपलब्ध हो सकती है। पात्रता और सब्सिडी की वास्तविक राशि सिस्टम की क्षमता तथा योजना के लागू नियमों पर निर्भर करती है। सब्सिडी की राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी DBT के माध्यम से लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है। योजना के तहत भाग लेने वाले बैंकों से निर्धारित शर्तों के अनुसार कम ब्याज दर पर ऋण लेने की सुविधा भी उपलब्ध हो सकती है।
CHB से NOC लेने की अनिवार्यता समाप्त होने से उन मकान मालिकों को विशेष सुविधा मिलने की उम्मीद है, जो अपने घरों की छत पर सोलर पैनल लगवाना चाहते हैं। इससे आवेदन और अनुमति से जुड़ी अतिरिक्त प्रक्रिया कम होगी। फिर भी, प्लांट लगवाने से पहले उपभोक्ताओं को CREST के माध्यम से लागू प्रक्रिया, तकनीकी आवश्यकताओं, योजना की पात्रता और सब्सिडी से संबंधित शर्तों की जानकारी लेनी चाहिए।
कुल मिलाकर, चंडीगढ़ प्रशासन का यह फैसला आवासीय स्तर पर सौर ऊर्जा अपनाने को आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। CHB मकानों के निवासियों को अब बोर्ड से अलग NOC लेने की जरूरत नहीं होगी, लेकिन प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना और CREST से संबंधित नियमों का पालन करना अनिवार्य रहेगा।
