15 अक्तूबर 2026: पंजाब के लुधियाना स्थित पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (पीएयू) के वैज्ञानिकों और शोधार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए चार प्रथम पुरस्कार हासिल किए हैं। यह उपलब्धि भारतीय कृषि इंजीनियर्स सोसायटी (आईएसएई) के 60वें वार्षिक सम्मेलन में मिली। सम्मेलन का आयोजन जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी में किया गया था। इसमें कृषि क्षेत्र से जुड़ी आधुनिक तकनीकों, जल संसाधन प्रबंधन, मिट्टी संरक्षण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सटीक सिंचाई से संबंधित शोध कार्य प्रस्तुत किए गए।
पीएयू के प्रतिनिधियों को कुल चार प्रथम पुरस्कार मिले। इनमें तीन पुरस्कार मौखिक शोध प्रस्तुतियों के लिए और एक पुरस्कार पोस्टर प्रस्तुति के लिए दिया गया। इन शोधों का उद्देश्य कृषि संसाधनों का बेहतर उपयोग करना, पानी की बचत को बढ़ावा देना, मिट्टी के कटाव को समझना और आधुनिक तकनीक की मदद से खेती को अधिक प्रभावी बनाना है।
विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर अबरार यूसुफ ने भूजल और जलग्रहण क्षेत्र से संबंधित शोध प्रस्तुति के लिए पहला पुरस्कार हासिल किया। उनका शोध पंजाब के निचले शिवालिक क्षेत्र में वर्षा जल संचयन के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान करने पर केंद्रित था। इस अध्ययन में रिमोट सेंसिंग, भौगोलिक सूचना प्रणाली यानी जीआईएस और बहु-मापदंड निर्णय लेने की तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इन तकनीकों के माध्यम से ऐसे स्थानों की पहचान करने में मदद मिल सकती है, जहां वर्षा के पानी को एकत्रित करके जल संसाधनों का टिकाऊ प्रबंधन किया जा सके।
दूसरा प्रथम पुरस्कार कृषि वैज्ञानिक प्रवीण दहिफले को रिमोट सेंसिंग और भू-स्थानिक तकनीक की श्रेणी में मिला। वह विश्वविद्यालय में निदेशक फार्म कार्यालय से जुड़े मृदा एवं जल इंजीनियरिंग वैज्ञानिक हैं। उनके शोध का विषय गूगल अर्थ इंजन और भू-स्थानिक तकनीक की मदद से मिट्टी के कटाव का आकलन करना था। इस शोध में डिजिटल तकनीकों के उपयोग से मिट्टी के कटाव को समझने और उसके संरक्षण के लिए बेहतर योजनाएं तैयार करने की संभावनाओं को सामने रखा गया। मिट्टी का कटाव कृषि भूमि की गुणवत्ता और उत्पादकता को प्रभावित कर सकता है, इसलिए इसका वैज्ञानिक आकलन खेती के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
तीसरा प्रथम पुरस्कार पीएचडी शोधार्थी आयुषी झा ने स्मार्ट सिंचाई और फर्टिगेशन श्रेणी में अपनी मौखिक प्रस्तुति के लिए जीता। उनका शोध व्याख्यायोग्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एक्सप्लेनेबल एआई के माध्यम से सिंचाई के पानी की गुणवत्ता का आकलन करने पर आधारित था। इसमें कृषि अपशिष्ट से विकसित अपशिष्ट जल उपचार तकनीकों को भी शामिल किया गया। इस शोध का उद्देश्य सिंचाई के पानी की गुणवत्ता को बेहतर तरीके से समझने और आधुनिक तकनीक की मदद से उसके मूल्यांकन को अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाओं का अध्ययन करना है। उनके शोध में विभागाध्यक्ष एवं शोध मार्गदर्शक सुनील गर्ग सहित अन्य शोधकर्ताओं का सहयोग रहा।
चौथा प्रथम पुरस्कार पीएचडी शोधार्थी सुखमनदीप कौर बराड़ को पोस्टर प्रस्तुति के लिए मिला। उनका शोध ड्रिप सिंचाई से उगाई जाने वाली वसंतकालीन मक्का फसल में पानी की कमी से उत्पन्न तनाव की पहचान करने पर केंद्रित था। इसमें तापीय संकेतकों के उपयोग से फसल में जल तनाव का पता लगाने और स्मार्ट सिंचाई प्रबंधन को बेहतर बनाने की संभावनाओं का अध्ययन किया गया। इस शोध में प्रमुख वैज्ञानिक और शोध मार्गदर्शक समनप्रीत कौर सहित अन्य शोधकर्ताओं ने योगदान दिया।
इन चारों पुरस्कारों से कृषि इंजीनियरिंग के क्षेत्र में पीएयू के शोध कार्यों को राष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली है। इन अध्ययनों में आधुनिक तकनीक का उपयोग करके पानी के बेहतर प्रबंधन, मिट्टी के संरक्षण और सिंचाई की गुणवत्ता सुधारने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान दिया गया है। विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने शोधकर्ताओं की वैज्ञानिक उपलब्धियों, मेहनत और नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की। इन शोधों से भविष्य में टिकाऊ कृषि संसाधन प्रबंधन और तकनीक आधारित खेती को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
