15 अक्तूबर 2026: पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद अमृतसर जिला प्रशासन ने नशे के कारोबार पर निगरानी बढ़ा दी है। प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने नशे से प्रभावित इलाकों में जांच और जनसंपर्क गतिविधियां तेज कर दी हैं। अधिकारियों की ओर से स्थानीय लोगों के साथ बैठकें की जा रही हैं, ताकि नशे की समस्या, अवैध सप्लाई और नशे की लत से जूझ रहे लोगों के इलाज से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई की जा सके।
नशे के हॉटस्पॉट पर प्रशासन की निगरानी बढ़ी
अमृतसर में जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने नशे से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थानीय लोगों के साथ बैठकें की हैं। इन बैठकों में डिप्टी कमिश्नर दलविंदरजीत सिंह, पुलिस अधिकारियों और सिविल सर्जन डॉ. भारती धवन सहित संबंधित अधिकारियों ने भाग लिया।
प्रशासन का जोर नशे की समस्या से निपटने के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर है। पहले ऐसे अभियानों में पुलिस की भूमिका प्रमुख रहती थी, लेकिन अब नागरिक प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को भी सक्रिय रूप से शामिल किया जा रहा है। इसका उद्देश्य नशे की सप्लाई पर कार्रवाई के साथ-साथ प्रभावित लोगों तक उपचार और पुनर्वास की सुविधाएं पहुंचाना है।
झोटा हत्याकांड के बाद बढ़ा दबाव
मानसा में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद पंजाब में नशे की अवैध बिक्री और इसे रोकने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा तेज हो गई है।
पुलिस के अनुसार, मामले में आरोपी मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार को राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया गया। घटना के बाद मानसा में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। आक्रोशित लोगों ने आरोपी की दुकान को तोड़ दिया और उसमें आग लगा दी। प्रशासन ने आरोपी के घर के एक हिस्से को भी कथित अवैध निर्माण के आधार पर गिराया। इन घटनाओं के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बनी रही।
इस हत्याकांड ने नशे के खिलाफ काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा और अवैध नशीली दवाओं की बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण जैसे मुद्दों को फिर से चर्चा में ला दिया है।
नशे की सप्लाई रोकने के साथ इलाज पर भी जोर
प्रशासनिक स्तर पर चल रही बैठकों में यह बात सामने आई है कि नशे की समस्या से निपटने के लिए केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। नशे की सप्लाई करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ नशे की लत से प्रभावित लोगों को उपचार और पुनर्वास उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
स्थानीय किसान नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी कहा है कि जागरूकता बैठकों के साथ जमीन पर ठोस कार्रवाई दिखाई देनी चाहिए। उनके अनुसार, नशे की सप्लाई रोकने, प्रभावित लोगों को इलाज दिलाने और पुनर्वास की व्यवस्था मजबूत करने पर लगातार काम करने की जरूरत है।
नशे के खिलाफ जागरूकता रैली भी निकाली गई
अमृतसर में नशे के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए साइकिल रैली भी निकाली गई। इसमें करीब 120 साइकिल सवारों ने हिस्सा लिया। रैली गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के पिछले गेट से शुरू होकर महल बाईपास से गुजरते हुए इंडिया गेट पर समाप्त हुई।
इस तरह के कार्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं और आम लोगों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करना तथा समाज में जागरूकता बढ़ाना है। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि जागरूकता कार्यक्रमों के साथ नशे की अवैध सप्लाई के खिलाफ निरंतर कार्रवाई भी जरूरी है।
16 अक्टूबर को मुख्यमंत्री करेंगे अभियान की समीक्षा
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान 16 अक्टूबर को फिल्लौर स्थित पंजाब पुलिस अकादमी में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान और राज्य की कानून-व्यवस्था की समीक्षा करेंगे। इस बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, प्रशासनिक सचिवों और सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नरों को शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में नशे के हॉटस्पॉट पर चल रहे अभियान, गांवों और वार्डों की रक्षा समितियों की भूमिका, विभागों के बीच तालमेल और अब तक हुई कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी। अधिकारियों को जिलावार रिपोर्ट तैयार करने के लिए भी कहा गया है, जिसमें नशे से प्रभावित क्षेत्रों, किए गए प्रयासों, सामने आई चुनौतियों और आगे की कार्ययोजना का विवरण होगा।
कुल मिलाकर, झोटा हत्याकांड के बाद अमृतसर में नशे के खिलाफ प्रशासनिक गतिविधियां तेज हुई हैं। अब चुनौती यह है कि जांच, कार्रवाई, जनजागरूकता और पुनर्वास के प्रयास लगातार जारी रहें, ताकि नशे की समस्या से प्रभावित लोगों और परिवारों को वास्तविक मदद मिल सके।
