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दिवाली से पहले लखनऊ में बनेंगे 3 नए बिजली उपकेंद्र, उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद

13 अक्टूबर 2026:   उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए तीन नए बिजली उपकेंद्र बनाने की योजना तैयार की गई है। गर्मियों के दौरान बिजली कटौती, लो-वोल्टेज और ओवरलोडिंग की समस्याओं से परेशान उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से बिजली विभाग ने यह प्रस्ताव तैयार किया है। इसके साथ ही ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने, नई बिजली लाइनें बिछाने और मौजूदा वितरण व्यवस्था में सुधार करने की भी योजना है।

232 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार

बिजली विभाग ने लखनऊ के चारों जोन में बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए लगभग 232 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव में नए बिजली उपकेंद्रों के निर्माण के अलावा कई तकनीकी सुधार भी शामिल हैं। इसे 26 सितंबर 2026 को प्रस्तावित बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक में पेश किया जाना था। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने और काम आगे बढ़ने के बाद संबंधित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की क्षमता बेहतर होने की उम्मीद है।

इन इलाकों में बनाए जाने हैं नए उपकेंद्र

प्रस्ताव के मुताबिक, अमौसी जोन के अंतर्गत कल्ली पश्चिम और पारा के साथ-साथ गोसाईंगंज, मोहनलालगंज तथा पूरनपुर के बीच बेलीराम क्षेत्र में नए बिजली उपकेंद्र बनाए जाने की योजना है। इन क्षेत्रों में गर्मियों के दौरान बिजली की मांग और आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं को देखते हुए यह कदम प्रस्तावित किया गया है। हालांकि, निर्माण शुरू होने और उपकेंद्रों के चालू होने की अंतिम समयसीमा की पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं की गई है।

ट्रांसफार्मरों और बिजली लाइनों की क्षमता भी बढ़ेगी

नए उपकेंद्रों के साथ बिजली विभाग ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने और नई 33 केवी तथा 11 केवी बिजली लाइनें बनाने पर भी विचार कर रहा है। इसके अलावा, एक उपकेंद्र से दूसरे उपकेंद्र को जोड़ने, पावर ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने और जरूरी तकनीकी उपकरणों में सुधार जैसे काम प्रस्ताव में शामिल हैं।

इन उपायों का उद्देश्य बिजली वितरण व्यवस्था पर बढ़ते दबाव को कम करना और स्थानीय फॉल्ट के कारण होने वाली कटौती को घटाना है।

गर्मियों में बिजली संकट बना था बड़ी समस्या

लखनऊ के कई इलाकों में गर्मियों के दौरान बिजली आपूर्ति को लेकर उपभोक्ताओं ने नाराजगी जताई थी। कुछ क्षेत्रों में लोगों ने बिजली संकट के विरोध में प्रदर्शन और घेराव भी किया था। इसके बाद विभाग ने संबंधित क्षेत्रों की स्थिति का आकलन कर सुधार कार्यों की योजना तैयार की।

बिजली की मांग बढ़ने के साथ पुराने उपकेंद्रों और ट्रांसफार्मरों पर दबाव भी बढ़ता है। ऐसे में नई क्षमता विकसित करने और मौजूदा ढांचे को मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है।

उपभोक्ताओं को क्या फायदा हो सकता है?

नए उपकेंद्र चालू होने और प्रस्तावित सुधार पूरे होने पर संबंधित इलाकों में बिजली का लोड विभाजित करने में मदद मिल सकती है। इससे ओवरलोडिंग, लो-वोल्टेज और बार-बार बिजली ट्रिप होने जैसी समस्याओं में कमी आने की उम्मीद है।

हालांकि, उपभोक्ताओं को वास्तविक राहत कब से मिलेगी, यह प्रस्ताव की मंजूरी, निर्माण कार्य की गति और उपकेंद्रों के चालू होने पर निर्भर करेगा।

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