12 अक्टूबर 2026: मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और मानसिक बीमारियों से जुड़े सामाजिक कलंक को दूर करने के उद्देश्य से पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER), चंडीगढ़ ने ‘Walk for Mental Health-2026’ का आयोजन किया। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर आयोजित इस वॉकथॉन में स्वास्थ्यकर्मियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के देखभालकर्ताओं सहित करीब 500 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
PGIMER से सुखना झील तक निकाली गई वॉकथॉन
PGIMER के मनोचिकित्सा विभाग के अंतर्गत ड्रग डी-एडिक्शन एंड ट्रीटमेंट सेंटर (DDTC) की ओर से आयोजित वॉकथॉन की शुरुआत संस्थान के कैरन ब्लॉक से हुई। प्रतिभागी वहां से सुखना झील तक पहुंचे। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व के बारे में जागरूक करना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों से मदद लेने के लिए प्रेरित करना था।
PGIMER के मनोचिकित्सा विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. एसके मट्टू ने वॉकथॉन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में अलग-अलग विभागों के चिकित्सकों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और देखभालकर्ताओं ने भाग लिया।
कई विभागों के सदस्यों ने लिया हिस्सा
इस आयोजन में PGIMER के मनोचिकित्सा विभाग के साथ एनेस्थीसिया, ऑर्थोपेडिक्स, अस्पताल प्रशासन, बाल रोग, ऑन्कोलॉजी और इंटरनल मेडिसिन विभागों के सदस्य भी शामिल हुए। विभिन्न विभागों की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि मानसिक स्वास्थ्य केवल एक विभाग तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कार्यक्रम के दौरान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एजुकेशन (NINE) के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने सुखना झील पर नुक्कड़ नाटक भी प्रस्तुत किया। इसके माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने और लोगों को इस विषय पर खुलकर बात करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
मानसिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों के प्रति संवेदनशीलता जरूरी
PGIMER के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख प्रोफेसर सुभो चक्रवर्ती ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए मानसिक स्वास्थ्य के बारे में लगातार जागरूकता फैलाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना कर रहे लोगों के प्रति सहानुभूति और समझ विकसित करना जरूरी है।
मानसिक बीमारी से जूझ रहे व्यक्तियों को अक्सर सामाजिक पूर्वाग्रह और भेदभाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे में परिवार, समाज और स्वास्थ्य सेवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। जागरूकता कार्यक्रम लोगों को यह समझने में मदद कर सकते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर सहायता लेना जरूरी है और इसे छिपाने के बजाय उचित उपचार की दिशा में कदम उठाना चाहिए।
इंटरनेट से खुद बीमारी का पता लगाने से बचें
कार्यक्रम में सेवानिवृत्त क्लिनिकल साइकोलॉजी प्रोफेसर डॉ. आदर्श कोहली ने मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए समय पर और पूरी जांच कराने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में PGIMER और गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GMCH) जैसी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं, जहां विशेषज्ञों से मदद ली जा सकती है।
उन्होंने इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर खुद ही बीमारी का अनुमान लगाने से बचने की सलाह दी। किसी व्यक्ति में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी लक्षण दिखाई देने पर विशेषज्ञ से परामर्श लेना अधिक उचित है, क्योंकि सही जांच के बाद ही समस्या को समझकर उपयुक्त उपचार तय किया जा सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करने की जरूरत
विशेषज्ञों के अनुसार, मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का उद्देश्य केवल बीमारियों की जानकारी देना नहीं, बल्कि जरूरतमंद लोगों को मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करना भी है। परिवार और दोस्तों का सहयोग, संवेदनशील व्यवहार और सही समय पर पेशेवर सहायता मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
PGIMER की यह पहल मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे को सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बनाने और लोगों को उपलब्ध उपचार सुविधाओं के बारे में जानकारी देने की दिशा में एक प्रयास है।
