12 अक्टूबर 2026: पंजाब की पहचान लंबे समय से हॉकी और अन्य खेलों में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों के लिए रही है। राज्य ने देश को कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिए हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में खेलों के क्षेत्र में उसकी स्थिति और प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब एशियन गेम्स में भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमों की सफलता ने पंजाब में खेलों को नई ऊर्जा दी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पंजाब ने खेलों में अपना पुराना गौरव वापस हासिल कर लिया है या अभी काफी सुधार की जरूरत है।
हॉकी में सफलता से बढ़ी उम्मीदें
एशियन गेम्स में भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमों की सफलता पंजाब के लिए गर्व का विषय बनी है। राज्य के कई खिलाड़ियों ने भारतीय टीमों में अहम भूमिका निभाई। पंजाब में हॉकी की मजबूत परंपरा रही है और जालंधर के मिथापुर जैसे क्षेत्रों ने भी देश को बेहतरीन खिलाड़ी दिए हैं।
खेल प्रेमियों का मानना है कि इन उपलब्धियों को केवल जश्न मनाने तक सीमित नहीं रखना चाहिए। इन्हें राज्य में खेलों के विकास के लिए एक नए अवसर के रूप में इस्तेमाल करना जरूरी है। खिलाड़ियों की सफलता से युवाओं में खेलों के प्रति रुचि बढ़ सकती है, लेकिन इस रुचि को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी।
पदकों की संख्या को लेकर भी चिंता
हालिया एशियन गेम्स में पंजाब के प्रदर्शन को लेकर अलग-अलग राय सामने आई है। द ट्रिब्यून के ओपन हाउस में प्रकाशित एक विचार के अनुसार, 2022 के एशियन गेम्स में पंजाब के खिलाड़ियों ने 19 पदक जीते थे, जबकि इस बार यह संख्या नौ बताई गई। इसके मुकाबले पड़ोसी राज्य हरियाणा के खिलाड़ियों ने 25 पदक हासिल किए।
इन आंकड़ों ने पंजाब में खेल नीति, प्रतिभाओं की पहचान और खिलाड़ियों को मिलने वाली सुविधाओं पर चर्चा तेज की है। हालांकि, पदकों की संख्या ही किसी राज्य के खेल विकास का एकमात्र पैमाना नहीं है। यह देखना भी जरूरी है कि कितने नए खिलाड़ी तैयार हो रहे हैं, उन्हें कितने अवसर मिल रहे हैं और वे राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के लिए कितने तैयार हैं।
बजट बढ़ने के साथ परिणाम भी जरूरी
पंजाब सरकार ने खेलों को बढ़ावा देने के लिए बजट और प्रशिक्षण व्यवस्था में सुधार का दावा किया है। मार्च 2026 में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बताया था कि राज्य का खेल बजट 2023-24 के 350 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 1,791 करोड़ रुपये हो गया है। सरकार ने कोचों की संख्या बढ़ाने, खेल मैदानों के विकास और खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता देने जैसे कदमों का भी उल्लेख किया था।
हालांकि, खेलों पर अधिक खर्च तभी प्रभावी माना जाएगा जब उसका असर मैदानों पर दिखाई दे। खिलाड़ियों को समय पर सुविधाएं मिलें, कोचिंग की गुणवत्ता सुधरे और प्रतिभाशाली युवाओं को आर्थिक परेशानियों के कारण खेल छोड़ना न पड़े। इसके लिए बजट के उपयोग और योजनाओं के परिणामों की नियमित समीक्षा भी जरूरी है।
गांवों और स्कूलों से तलाशनी होगी प्रतिभा
पंजाब में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। गांवों, कस्बों और छोटे शहरों में अनेक युवा खिलाड़ी बेहतर अवसर मिलने पर आगे बढ़ सकते हैं। लेकिन कई जगह आधुनिक खेल मैदान, प्रशिक्षण उपकरण, फिटनेस सुविधाएं और अनुभवी कोच उपलब्ध नहीं हैं।
विशेषज्ञों और खेल प्रेमियों की राय है कि प्रतिभा की पहचान स्कूल स्तर से शुरू होनी चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी वही अवसर मिलने चाहिए जो बड़े शहरों की अकादमियों में प्रशिक्षण लेने वाले खिलाड़ियों को मिलते हैं। जिला और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं को मजबूत बनाकर खिलाड़ियों को लगातार प्रतिस्पर्धा का अनुभव दिया जा सकता है।
आधुनिक कोचिंग, पोषण और फिटनेस पर जोर
आज अंतरराष्ट्रीय खेलों में सफलता के लिए केवल मेहनत और प्राकृतिक प्रतिभा पर्याप्त नहीं है। खिलाड़ियों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण, संतुलित पोषण, फिटनेस कार्यक्रम, चोट से बचाव और मानसिक मजबूती के लिए विशेषज्ञ सहायता की जरूरत होती है।
पंजाब में कोचिंग व्यवस्था को आधुनिक बनाना और प्रशिक्षकों को नियमित प्रशिक्षण देना अहम हो सकता है। खिलाड़ियों के प्रदर्शन का वैज्ञानिक आकलन, उचित डाइट और चोट के बाद वापसी की व्यवस्थित योजना भी उनके करियर को लंबा और बेहतर बना सकती है।
खेलों को करियर के रूप में बढ़ावा देना जरूरी
कई युवा खेलों में आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन आर्थिक सुरक्षा और भविष्य को लेकर अनिश्चितता के कारण दूसरे विकल्प चुन लेते हैं। खेलों को एक सम्मानजनक करियर बनाने के लिए छात्रवृत्ति, रोजगार के अवसर, पारदर्शी चयन प्रक्रिया और प्रदर्शन के आधार पर सहायता जरूरी है।
महिला खिलाड़ियों को भी प्रशिक्षण, सुरक्षा, यात्रा, पोषण और प्रतियोगिताओं में भागीदारी के लिए पर्याप्त समर्थन मिलना चाहिए। पंजाब की खेल व्यवस्था को ऐसा वातावरण तैयार करना होगा, जिसमें ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे भी अपनी प्रतिभा के दम पर आगे बढ़ सकें।
‘खेड़ां वतन पंजाब दियां’ से जमीनी स्तर पर उम्मीद
राज्य सरकार की ‘खेड़ां वतन पंजाब दियां’ पहल को जमीनी स्तर पर खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। इस प्रतियोगिता के जरिए अलग-अलग आयु वर्ग के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है। लेकिन इन प्रतियोगिताओं की सफलता इस बात से भी मापी जानी चाहिए कि इनमें सामने आने वाली प्रतिभाओं को आगे किस तरह का प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिलता है।
खेल प्रेमियों का मानना है कि प्रतियोगिताओं के बाद प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को विशेष प्रशिक्षण, बेहतर अकादमियों और उच्च स्तर की प्रतियोगिताओं तक पहुंचाने की व्यवस्था होनी चाहिए। तभी जमीनी स्तर पर शुरू हुई पहल अंतरराष्ट्रीय पदकों में बदल सकती है।
नशे की समस्या के बीच खेलों की अहम भूमिका
पंजाब में खेलों को युवाओं को नशे से दूर रखने के एक माध्यम के रूप में भी देखा जाता है। खेल युवाओं में अनुशासन, टीम भावना और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देते हैं। लेकिन इसके लिए केवल प्रतियोगिताएं आयोजित करना पर्याप्त नहीं होगा। नियमित अभ्यास, प्रशिक्षकों की उपलब्धता और सुरक्षित खेल सुविधाएं भी जरूरी हैं।
पंजाब के सामने आगे की राह
पंजाब के पास खेलों की समृद्ध परंपरा, प्रतिभाशाली खिलाड़ी और हॉकी जैसी मजबूत विरासत है। हालिया सफलताओं ने इस विरासत को फिर से चर्चा में ला दिया है, लेकिन स्थायी बदलाव के लिए दीर्घकालिक योजना, पारदर्शी चयन, आधुनिक प्रशिक्षण और ग्रामीण स्तर पर निवेश की जरूरत बनी हुई है।
