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जालंधर में पांच दिन में 39 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद, किसानों को 95 करोड़ रुपये का भुगतान

6 अक्टूबर 2026  पंजाब में धान खरीद सीजन के शुरू होते ही जालंधर जिले में मंडियों में फसल की आवक और खरीद ने रफ्तार पकड़ ली है। खरीद सीजन के पहले पांच दिनों में जिले की मंडियों में कुल 39,191 मीट्रिक टन धान पहुंचा, जिसमें से 38,961 मीट्रिक टन धान की खरीद सरकारी एजेंसियों द्वारा की जा चुकी है। अधिकारियों के अनुसार, किसानों को अब तक करीब 95 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।

पिछले तीन दिनों में मंडियों में बढ़ी धान की आवक

जिला खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन दिनों में धान की आवक में तेजी देखने को मिली है। सोमवार को जालंधर जिले की मंडियों में 17,129 मीट्रिक टन धान पहुंचा। इससे एक दिन पहले रविवार को 13,942 मीट्रिक टन और शनिवार को 4,057 मीट्रिक टन धान की आवक दर्ज की गई थी।

इस तरह सोमवार की आवक शनिवार की तुलना में चार गुना से भी ज्यादा रही। जैसे-जैसे किसानों की फसल मंडियों में पहुंच रही है, वैसे-वैसे सरकारी खरीद प्रक्रिया भी तेज हो रही है।

सरकारी एजेंसियों ने खरीदा लगभग पूरा धान

धान खरीद में भी पिछले कुछ दिनों में तेजी आई है। सोमवार को सरकारी एजेंसियों ने 16,904 मीट्रिक टन धान खरीदा। रविवार को 14,092 मीट्रिक टन और शनिवार को 5,326 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई थी।

अब तक खरीदी गई पूरी मात्रा सरकारी एजेंसियों ने खरीदी है और रिपोर्ट के मुताबिक निजी खरीद की कोई जानकारी सामने नहीं आई है। इससे किसानों को अपनी फसल के लिए सरकारी खरीद व्यवस्था पर निर्भरता बनी हुई है।

किसानों को 95 करोड़ रुपये का भुगतान

धान की खरीद के साथ किसानों को भुगतान भी किया जा रहा है। जिला खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अनुसार अब तक किसानों को 95 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इसमें अकेले सोमवार को करीब 49 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।

अधिकारियों का कहना है कि किसानों को भुगतान निर्धारित 48 घंटे की समय सीमा के भीतर किया जा रहा है। इससे किसानों को खरीदी गई फसल की राशि के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ रहा है।

मंडियों से धान उठाने की प्रक्रिया भी शुरू

मंडियों में खरीदे गए धान की लिफ्टिंग का काम भी शुरू हो गया है। सोमवार को 943 मीट्रिक टन धान मंडियों से उठाया गया। हालांकि, सोमवार तक निर्धारित 72 घंटे की समय सीमा के तहत 2,638 मीट्रिक टन धान की लिफ्टिंग बाकी थी।

जिला खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति नियंत्रक हरशरणजीत सिंह बराड़ ने कहा कि खरीद सीजन आगे बढ़ने के साथ लिफ्टिंग की रफ्तार भी बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि इस समय धान अलग-अलग मंडियों में पहुंच रहा है और जब पर्याप्त मात्रा इकट्ठी होती है, तभी वैगन के जरिए धान को राइस मिलों तक भेजना आसान होता है।

79 खरीद केंद्रों पर 10.84 लाख MT आवक का अनुमान

जालंधर जिले में इस साल धान खरीद सीजन 1 अक्टूबर से शुरू हुआ है। जिला प्रशासन को उम्मीद है कि पूरे सीजन के दौरान जिले के 79 खरीद केंद्रों पर करीब 10.84 लाख मीट्रिक टन धान पहुंच सकता है।

इस सीजन में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,461 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। ऐसे में मंडियों में पहुंचने वाली फसल की सरकारी खरीद और किसानों को समय पर भुगतान पर प्रशासन की विशेष नजर है।

किसानों से सूखा धान लाने की अपील

अधिकारियों ने किसानों से मंडियों में केवल अच्छी तरह सूखा हुआ धान लाने की अपील की है। खरीद के लिए धान में नमी की अनुमत सीमा 17 प्रतिशत तय है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे रात के समय फसल की कटाई से बचें, ताकि मंडी में पहुंचने वाली फसल निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी उतर सके।

धान में अधिक नमी होने पर खरीद और भुगतान की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसलिए किसानों से फसल को निर्धारित मानकों के अनुसार मंडी में लाने को कहा गया है।

खरीद सीजन में व्यवस्था पर नजर

जालंधर में शुरुआती पांच दिनों में धान की खरीद की रफ्तार को देखते हुए आने वाले दिनों में मंडियों में आवक और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में खरीद, भुगतान और लिफ्टिंग तीनों प्रक्रियाओं को सुचारू रखना प्रशासन के लिए अहम रहेगा।

फिलहाल सरकारी एजेंसियों ने करीब 39 हजार मीट्रिक टन पहुंची फसल में से लगभग पूरी मात्रा खरीद ली है और किसानों को 95 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। प्रशासन का लक्ष्य है कि मंडियों में किसानों को खरीद प्रक्रिया के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो और खरीदी गई फसल की समय पर लिफ्टिंग भी सुनिश्चित की जाए।

कुल मिलाकर, जालंधर जिले में धान खरीद सीजन ने शुरुआती पांच दिनों में ही रफ्तार पकड़ ली है। 39,191 मीट्रिक टन धान मंडियों में पहुंच चुका है, जिसमें से 38,961 मीट्रिक टन की सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीद की जा चुकी है। किसानों को अब तक 95 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है, जबकि मंडियों से खरीदे गए धान की लिफ्टिंग भी शुरू हो गई है।

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