5 अक्टूबर 2026 पंजाब के जालंधर स्थित मीठापुर गांव में भारतीय महिला हॉकी टीम के एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के बाद खुशी का माहौल है। हॉकी के लिए देश-दुनिया में पहचान बना चुके इस गांव में इस बार पुरुष खिलाड़ियों की सफलता के साथ-साथ महिला हॉकी टीम की उपलब्धि को लेकर खास उत्साह देखने को मिल रहा है। गांव के लोगों का कहना है कि बेटियों की इस सफलता ने उनकी खुशी और गर्व को और बढ़ा दिया है।
बेटियों के गोल्ड ने बढ़ाया गर्व
मीठापुर लंबे समय से भारतीय हॉकी को खिलाड़ी देने के लिए जाना जाता है। गांव के कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया है। ऐसे में जब भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक अपने नाम किया तो गांव में इस उपलब्धि को अलग नजरिए से देखा गया।
पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान और मीठापुर के रहने वाले मनप्रीत सिंह ने महिला टीम की जीत के बाद अपनी मां मनजीत कौर को फोन कर खुशी साझा की। मनजीत कौर ने कहा कि इस बार गांव के लोगों को लड़कों की तुलना में लड़कियों की सफलता की ज्यादा खुशी है। उनके मुताबिक, पुरुष खिलाड़ी पहले भी कई पदक जीत चुके हैं, लेकिन महिला टीम की जीत लंबे समय से इंतजार किया जा रहा सपना था।
महिला हॉकी की जीत का 44 साल बाद आया मौका
भारतीय महिला हॉकी टीम की एशियन गेम्स में यह स्वर्ण पदक जीत खास इसलिए भी है क्योंकि टीम ने 44 साल के लंबे अंतराल के बाद महाद्वीपीय खिताब अपने नाम किया। भारतीय पुरुष और महिला दोनों हॉकी टीमों ने इस एशियन गेम्स में गोल्ड जीतकर भारतीय हॉकी के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।
दोनों टीमों की इस सफलता का एक और महत्व है। इस जीत के साथ पुरुष और महिला दोनों टीमों ने 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए सीधे क्वालिफिकेशन हासिल किया है।
मनप्रीत और मंदीप के परिवार भी हुए खुश
मीठापुर में हॉकी खिलाड़ियों के परिवारों ने महिला टीम के मुकाबलों को भी उसी उत्साह के साथ देखा, जिस तरह वे पुरुष टीम के मैच देखते हैं। मनप्रीत सिंह की मां मनजीत कौर और हॉकी खिलाड़ी मंदीप सिंह की मां देविंदरजीत कौर ने महिला टीम के प्रदर्शन पर खुशी जताई।
मंदीप सिंह की पत्नी और ओलंपियन हॉकी खिलाड़ी उदिता दुहन ने भी महिला टीम की जीत को खास बताया। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए दोहरी खुशी का मौका है। मंदीप सिंह ने जहां 300 अंतरराष्ट्रीय मैच पूरे किए, वहीं मनप्रीत सिंह भारत के सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले हॉकी खिलाड़ी बने। इसके साथ महिला टीम की 44 साल बाद एशियन गेम्स गोल्ड जीत ने जश्न को और खास बना दिया।
अब मीठापुर की बेटियों को मैदान में लाने की तैयारी
महिला टीम की सफलता के बाद मीठापुर में अब लड़कियों की हॉकी में भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। गांव की हॉकी व्यवस्था में महिलाओं की भूमिका पहले की तुलना में बढ़ रही है।
उदिता दुहन मीठापुर के बच्चों को हॉकी की ट्रेनिंग दे रही हैं। वह सुबह और शाम बच्चों को कोचिंग देती हैं और उन्हें अंतरराष्ट्रीय हॉकी की बारीकियों से परिचित कराने का प्रयास कर रही हैं। उनके इस प्रयास से गांव के युवा खिलाड़ियों, खासकर लड़कियों को हॉकी से जुड़ने के लिए प्रेरणा मिल रही है।
गांव की पुरानी हॉकी विरासत
मीठापुर की हॉकी पहचान नई नहीं है। मनप्रीत सिंह और मंदीप सिंह के अलावा इस गांव से ओलंपियन वरुण कुमार और कई अन्य खिलाड़ी भी निकले हैं। गांव के कोचों और स्थानीय लोगों का मानना है कि यहां तैयार हुई हॉकी संस्कृति ने कई पीढ़ियों के खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका दिया है।
कोच बलविंदर सिंह, जो FIH लेवल-3 कोच और हॉकी इंडिया के तकनीकी अधिकारी हैं, ने मीठापुर की हॉकी यात्रा को लंबे समय से चले आ रहे प्रयासों का परिणाम बताया। उनके मुताबिक, मौजूदा खिलाड़ी अब अगली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।
11 खिलाड़ी अलग-अलग अकादमियों में कर रहे ट्रेनिंग
कोच बलविंदर सिंह के अनुसार, इस समय मीठापुर के 11 खिलाड़ी अलग-अलग हॉकी अकादमियों में प्रशिक्षण ले रहे हैं। गांव के आकार को देखते हुए इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
हॉकी क्लब के अध्यक्ष अमरीक पोवार के नेतृत्व में गांव में लड़कियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए भी योजनाएं बनाई जा रही हैं। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक बच्चियों को हॉकी मैदान तक लाना और उन्हें प्रशिक्षण का अवसर देना है।
बेटियों की सफलता से नई उम्मीद
मीठापुर में महिला हॉकी की इस सफलता को केवल एक पदक के रूप में नहीं देखा जा रहा। ग्रामीणों को उम्मीद है कि भारतीय महिला टीम की एशियन गेम्स जीत से गांव की और अधिक लड़कियां हॉकी खेलने के लिए आगे आएंगी।
मनजीत कौर का मानना है कि लड़कों को भी लड़कियों को मैदान में आने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। उनका कहना है कि मनप्रीत और मंदीप जैसे खिलाड़ी अगर लड़कियों को प्रेरित करेंगे तो गांव में महिला हॉकी को नई दिशा मिल सकती है।
कुल मिलाकर, भारतीय महिला हॉकी टीम के एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने से जालंधर के मीठापुर गांव में खास खुशी है। पुरुष हॉकी की मजबूत विरासत वाले इस गांव में अब महिला हॉकी को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। उदिता दुहन की कोचिंग और स्थानीय हॉकी ढांचे के जरिए लड़कियों को मैदान तक लाने की कोशिशों से मीठापुर में हॉकी की नई पीढ़ी तैयार होने की उम्मीद बढ़ी है।
