29 सितंबर 2026 पंजाब में मेडिकल शिक्षा को लेकर छात्रों की पसंद में बदलाव देखने को मिल रहा है। 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (BFUHS) की प्रोविजनल काउंसलिंग के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के कई उच्च रैंक वाले NEET-UG उम्मीदवारों ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों की जगह प्राइवेट संस्थानों को प्राथमिकता दी है। इस बदलाव में लुधियाना का दयानंद मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (DMCH) सबसे अधिक पसंद किया जाने वाला संस्थान बनकर सामने आया है।
DMCH बना हाई-रैंकर्स की पहली पसंद
BFUHS के 2026-27 के प्रोविजनल काउंसलिंग आंकड़ों के अनुसार, दो दर्जन से अधिक हाई-रैंकिंग ओपन कैटेगरी उम्मीदवारों ने MBBS के लिए DMCH, लुधियाना को चुना। खास बात यह रही कि राज्य की ओपन कैटेगरी में दूसरे से पांचवें स्थान तक के उम्मीदवारों ने भी सरकारी मेडिकल कॉलेज पटियाला की जगह DMCH को प्राथमिकता दी।
सरकारी कॉलेज पटियाला के लिए पहला उम्मीदवार छठे रैंक पर सामने आया। इसके बाद मोहाली के डॉ. बीआर अंबेडकर स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज को 17वें और सरकारी मेडिकल कॉलेज अमृतसर को 18वें रैंक पर उम्मीदवार मिला। वहीं, BFUHS के घटक संस्थान गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज, फरीदकोट के लिए पहला उम्मीदवार 53वें रैंक पर आया।
प्राइवेट कॉलेज की फीस काफी ज्यादा
प्राइवेट कॉलेज की ओर छात्रों के बढ़ते रुझान का एक महत्वपूर्ण पहलू फीस भी है। DMCH में 5.5 साल के MBBS कोर्स की फीस करीब ₹25.22 लाख बताई गई है। इसके मुकाबले राज्य संचालित मेडिकल कॉलेजों में यही फीस करीब ₹10.83 लाख है। यानी DMCH की फीस सरकारी कॉलेजों की तुलना में काफी अधिक है।
इसके बावजूद हाई रैंक वाले छात्रों द्वारा DMCH का चयन किए जाने से यह संकेत मिलता है कि कुछ उम्मीदवार फीस से अधिक अन्य सुविधाओं और कॉलेज के माहौल को महत्व दे रहे हैं। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने इस पसंद के पीछे बेहतर क्लिनिकल एक्सपोजर और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कारणों का उल्लेख किया है।
सरकारी कॉलेजों में बॉन्ड भी एक कारण
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए राज्य सरकार का करीब ₹20 लाख का बॉन्ड भी एक संभावित कारण बताया जा रहा है। इसके तहत छात्रों को MBBS की पढ़ाई पूरी करने के बाद दो साल तक राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में सेवा देने की शर्त होती है।
इसके अलावा बॉन्ड व्यवस्था में अचल संपत्ति या निर्धारित वैकल्पिक व्यवस्था से जुड़ी शर्तें भी शामिल हैं। विशेषज्ञों और पर्यवेक्षकों का कहना है कि इन शर्तों का असर कुछ छात्रों की कॉलेज पसंद पर पड़ सकता है।
बड़े शहरों के कॉलेजों को मिल रही प्राथमिकता
काउंसलिंग के आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि छात्रों का रुझान बड़े शहरों की ओर अधिक है। पटियाला, मोहाली और अमृतसर जैसे शहरों के संस्थानों को फरीदकोट जैसे छोटे शहरों की तुलना में अधिक प्राथमिकता मिली।
अधिकारियों के अनुसार, छात्रों की पसंद में केवल मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं, बल्कि शहर की कनेक्टिविटी, जीवनशैली और अन्य सामाजिक सुविधाएं भी भूमिका निभा रही हैं।
मेडिकल सीटों में लड़कियों की हिस्सेदारी अधिक
2026-27 की पहली काउंसलिंग में महिला उम्मीदवारों की हिस्सेदारी भी उल्लेखनीय रही। राज्य की टॉप 100 मेरिट रैंक में 44 रैंक महिलाओं के नाम रहीं।
कुल 1,386 प्रोविजनली अलॉट की गई MBBS सीटों में महिलाओं को 811 सीटें मिलीं, जबकि पुरुष उम्मीदवारों को 575 सीटें मिलीं। यानी MBBS सीटों में महिलाओं और पुरुषों का अनुपात करीब 59:41 रहा।
BDS में यह अंतर और ज्यादा रहा। कुल 1,024 प्रोविजनल सीटों में महिलाओं को 804 सीटें मिलीं, जो करीब 80 फीसदी है। पुरुष उम्मीदवारों को 220 सीटें मिलीं।
अलग-अलग कॉलेजों में भी महिलाओं की बड़ी हिस्सेदारी
सरकारी मेडिकल कॉलेज पटियाला में 201 सीटों में से 112 सीटें महिलाओं को मिलीं। अमृतसर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में 198 में से 102 सीटों पर महिलाओं का चयन हुआ, जबकि गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज, फरीदकोट में 161 में से 99 सीटें महिलाओं को मिलीं।
प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में भी महिलाओं की हिस्सेदारी अधिक रही। अदेश इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, बठिंडा में महिलाओं ने 67 फीसदी सीटें हासिल कीं। ज्ञान सागर मेडिकल कॉलेज, बनूड़ और क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, लुधियाना में यह हिस्सेदारी 63 फीसदी रही। हालांकि DMCH में पुरुष और महिला उम्मीदवारों की संख्या बराबर रही और दोनों को 69-69 सीटें मिलीं।
NEET कटऑफ में भी बदलाव
रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 से 2025 के बीच प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेजों में ओपन कैटेगरी के सरकारी कोटे के कटऑफ अंकों में 130 से अधिक अंकों की गिरावट दर्ज की गई।
GMC पटियाला का कटऑफ 2024 में 662 से घटकर 2025 में 508 रहा। इसी तरह GGSMC फरीदकोट का कटऑफ 639 से घटकर 504 और DMCH का कटऑफ 625 से घटकर 512 रहा। रिपोर्ट में इस बदलाव को NEET-2025 के पेपर और अंकों के पैटर्न से जोड़कर देखा गया है।
मेडिकल एडमिशन में बदलती पसंद
पंजाब में 2026-27 के MBBS एडमिशन के शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि अच्छे NEET रैंक वाले उम्मीदवारों की कॉलेज पसंद केवल सरकारी संस्थानों तक सीमित नहीं रही। DMCH जैसे प्राइवेट संस्थान को राज्य के कई टॉप रैंकर्स द्वारा चुना जाना मेडिकल शिक्षा में बदलती प्राथमिकताओं को दिखाता है।
हालांकि, यह प्रोविजनल काउंसलिंग डेटा है और आगे की काउंसलिंग में सीटों और उम्मीदवारों की पसंद में बदलाव संभव है।
