• Tue. Sep 29th, 2026

परवेश वर्मा के खिलाफ NCR दर्ज, जानिए FIR से कैसे अलग है गैर-संज्ञेय रिपोर्ट

29 सितंबर 2026 दिल्ली पुलिस ने PWD मंत्री परवेश साहिब सिंह वर्मा के खिलाफ पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर में सड़क निरीक्षण के दौरान एक व्यक्ति को कथित तौर पर थप्पड़ मारने की शिकायत पर गैर-संज्ञेय रिपोर्ट (Non-Cognisable Report-NCR) दर्ज की है। पुलिस ने यह कार्रवाई शिकायतकर्ता साहिब सिंह की शिकायत के आधार पर की। रिपोर्ट भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115 के तहत दर्ज की गई है, जो स्वेच्छा से चोट पहुंचाने से संबंधित है।

इस मामले के सामने आने के बाद NCR और FIR के बीच अंतर को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। दोनों पुलिस रिकॉर्ड हैं, लेकिन इनके तहत पुलिस की शक्तियां और आगे की कानूनी प्रक्रिया अलग होती है।

क्या है पूरा मामला?

मामला तिलक नगर में सड़क निर्माण और उसकी गुणवत्ता से जुड़े विवाद के दौरान सामने आया। पुलिस के मुताबिक, इस घटना से संबंधित कई शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इनमें से साहिब सिंह की शिकायत पर परवेश वर्मा के खिलाफ NCR दर्ज की गई। घटना का वीडियो भी सामने आया था, जिसके बाद मामला चर्चा में आया।

पुलिस ने बताया कि इस घटना से जुड़ी अन्य शिकायतों को भी जांच के दौरान देखा जाएगा। वहीं, इसी घटनाक्रम से जुड़े एक अलग मामले में PWD के एक सहायक अभियंता की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ कथित जबरन वसूली से संबंधित FIR दर्ज की गई है।

NCR यानी गैर-संज्ञेय रिपोर्ट क्या होती है?

NCR का पूरा नाम Non-Cognisable Report यानी गैर-संज्ञेय रिपोर्ट है। ऐसे मामलों में पुलिस को सामान्य तौर पर आरोपी को बिना वारंट गिरफ्तार करने का अधिकार नहीं होता।

गैर-संज्ञेय अपराध में पुलिस अदालत की अनुमति के बिना जांच शुरू नहीं कर सकती। यानी केवल NCR दर्ज होने से पुलिस को FIR की तरह स्वतः जांच शुरू करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की शक्तियां नहीं मिल जातीं।

इस मामले में पुलिस ने BNS की धारा 115 के तहत NCR दर्ज की है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार शिकायत में थप्पड़ मारने की बात सामने आई थी, जिसे गैर-संज्ञेय अपराध के रूप में दर्ज किया गया।

FIR क्या होती है?

FIR यानी First Information Report संज्ञेय अपराध से संबंधित पहली सूचना की पुलिस रिपोर्ट होती है। संज्ञेय अपराधों में पुलिस कानून के अनुसार बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है और अदालत के अलग आदेश के बिना जांच शुरू कर सकती है।

FIR दर्ज होने के बाद पुलिस मामले की जांच शुरू करती है। इसमें घटनास्थल की जांच, गवाहों के बयान, दस्तावेजों और अन्य सबूतों को जुटाने जैसी कार्रवाई शामिल हो सकती है।

NCR और FIR में सबसे बड़ा अंतर

NCR और FIR के बीच सबसे महत्वपूर्ण अंतर पुलिस की जांच और गिरफ्तारी की शक्ति से जुड़ा है।

FIR आमतौर पर संज्ञेय अपराध में दर्ज होती है और पुलिस बिना वारंट गिरफ्तारी तथा स्वतंत्र रूप से जांच शुरू कर सकती है। इसके विपरीत, गैर-संज्ञेय मामले में पुलिस को जांच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति की आवश्यकता होती है और वह आरोपी को बिना वारंट गिरफ्तार नहीं कर सकती।

इसी वजह से NCR दर्ज होना अपने आप में FIR दर्ज होने के समान नहीं है। NCR में शिकायत का रिकॉर्ड पुलिस के पास दर्ज हो जाता है, लेकिन आगे की जांच के लिए कानूनी प्रक्रिया अलग रहती है।

क्या NCR के बाद जांच हो सकती है?

हां, लेकिन गैर-संज्ञेय अपराध की जांच के लिए पुलिस को संबंधित मजिस्ट्रेट से आदेश लेना होता है। अदालत की अनुमति मिलने के बाद पुलिस कानून के अनुसार जांच आगे बढ़ा सकती है।

इसलिए NCR को यह समझना गलत होगा कि मामला पूरी तरह खत्म हो गया है। शिकायत दर्ज होने के बाद उसके आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

इस मामले में FIR क्यों नहीं हुई?

परवेश वर्मा से जुड़े थप्पड़ मामले में पुलिस ने शिकायत को गैर-संज्ञेय अपराध के तौर पर दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार शिकायत में जिस कृत्य का आरोप लगाया गया, उसे BNS की धारा 115 के तहत रखा गया, इसलिए NCR दर्ज की गई।

वहीं, उसी घटनाक्रम से जुड़े PWD इंजीनियर की कथित जबरन वसूली की शिकायत को संज्ञेय अपराध के रूप में लिया गया और अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई। इससे यह अंतर भी स्पष्ट होता है कि अलग-अलग शिकायतों में आरोप और संबंधित कानूनी धाराओं के आधार पर पुलिस की कार्रवाई अलग हो सकती है।

NCR दर्ज होने का मतलब क्या है?

NCR दर्ज होने का मतलब यह है कि पुलिस ने शिकायत में बताए गए गैर-संज्ञेय अपराध की सूचना को आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज किया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि आरोप साबित हो गया है।

परवेश वर्मा के मामले में भी NCR दर्ज होना केवल पुलिस कार्रवाई का एक चरण है। आगे की जांच या न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर मामले में स्थिति बदल सकती है।

FIR और NCR को ऐसे समझें

सरल शब्दों में कहें तो FIR संज्ञेय अपराध की रिपोर्ट है, जिसमें पुलिस को सीधे जांच शुरू करने की शक्ति मिलती है, जबकि NCR गैर-संज्ञेय अपराध की रिपोर्ट है, जिसमें पुलिस को जांच शुरू करने के लिए सामान्यतः मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए।

इसलिए NCR और FIR दोनों को एक जैसा समझना सही नहीं है। दोनों की कानूनी प्रक्रिया और पुलिस की शक्तियों में महत्वपूर्ण अंतर है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *