28 सितंबर 2026 दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने चुनाव आयोग (EC) पर लगाए जा रहे कथित बेबुनियाद आरोपों को लेकर कहा है कि इस तरह के आरोप राष्ट्रीय हित में नहीं हैं। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने और संवैधानिक संस्थाओं पर विश्वास कायम रखने की जरूरत पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है जब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों की ओर से अलग-अलग सवाल और आरोप सामने आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थान है और उसके खिलाफ बिना ठोस आधार के आरोप लगाने से लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
चुनाव आयोग पर आरोपों को लेकर बयान
रेखा गुप्ता ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों और नेताओं को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाते समय तथ्यों और प्रमाणों का ध्यान रखना जरूरी है। उनके अनुसार, केवल आरोप लगाने के बजाय यदि किसी मुद्दे को लेकर कोई ठोस आपत्ति है तो उसे उचित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से उठाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की भूमिका स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने से जुड़ी है। ऐसे में चुनाव प्रक्रिया से संबंधित संस्थाओं के प्रति जनता का विश्वास लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
राष्ट्रीय हित का दिया हवाला
मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग के खिलाफ लगाए जाने वाले आरोपों को राष्ट्रीय हित से जोड़ते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को लेकर लगातार अविश्वास का माहौल बनाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें संस्थाओं के प्रति लोगों का भरोसा भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
रेखा गुप्ता ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्रीय संस्थाओं की विश्वसनीयता को प्रभावित करने वाले बयानों को लेकर जिम्मेदारी बरतने की जरूरत है।
चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता का मुद्दा
चुनाव आयोग को लेकर होने वाली बहस में पारदर्शिता, मतदाता सूची, चुनाव प्रक्रिया और चुनावी व्यवस्थाओं से जुड़े मुद्दे अक्सर सामने आते हैं। विपक्षी दलों की ओर से कई बार चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जाते हैं, जबकि आयोग और सत्तारूढ़ पक्ष की ओर से इन आरोपों का जवाब दिया जाता है।
ऐसे मामलों में किसी भी आरोप या दावे की वास्तविक स्थिति जानने के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड, चुनाव आयोग के जवाब और उपलब्ध कानूनी प्रक्रिया को देखना महत्वपूर्ण होता है।
लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसा जरूरी
रेखा गुप्ता ने कहा कि लोकतंत्र में संस्थाओं की भूमिका को मजबूत बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि चुनाव और संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर जानकारी लेते समय प्रमाणित और विश्वसनीय स्रोतों पर भरोसा करें।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक बहस लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन बहस तथ्यों और जिम्मेदारी के साथ होनी चाहिए। संवैधानिक संस्थाओं के बारे में बिना आधार के आरोप लगाने से लोकतांत्रिक व्यवस्था पर लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच सामने आया बयान
मुख्यमंत्री का यह बयान चुनाव आयोग को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच सामने आया है। अलग-अलग राजनीतिक दल चुनावी प्रक्रिया और आयोग की भूमिका को लेकर अपनी-अपनी राय रखते रहे हैं। ऐसे में रेखा गुप्ता ने संस्थागत भरोसे और राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देने की बात कही है।
हालांकि, चुनाव आयोग से जुड़े किसी भी विवाद में संबंधित पक्षों के दावों के साथ आयोग का आधिकारिक पक्ष और उपलब्ध दस्तावेज देखना जरूरी है, ताकि किसी निष्कर्ष पर तथ्यों के आधार पर पहुंचा जा सके।
