सुल्तानपुर लोधी 26 सितंबर, 2026 : विभिन्न अध्यापक संगठनों की हुई ऑनलाइन और ऑफलाइन बैठक के दौरान स्कूलों में मिड-डे मील तथा प्राथमिक स्कूल खेलों को लेकर अहम फैसले लिए गए। अध्यापक नेताओं ने स्पष्ट ऐलान किया कि यदि मिड-डे मील की राशि एडवांस में जारी नहीं की गई तो 1 अक्टूबर से मिड-डे मील बंद कर दिया जाएगा। इसी तरह प्राथमिक स्कूल खेलों के लिए फंड जारी न होने की स्थिति में अध्यापक अपनी जेब से पैसे खर्च करके खेलें नहीं करवाएंगे।
बैठक में गवर्नमेंट टीचर्स यूनियन के प्रदेश नेता रशपाल सिंह वड़ैच, डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट कपूरथला के जिलाध्यक्ष हरविंदर सिंह अल्लूवाल, जी.टी.यू. के जिलाध्यक्ष सुखचैन सिंह बध्धण, गुरमेज सिंह तलवंडी चौधरियां, अध्यापक दल कपूरथला के जिलाध्यक्ष सुखदयाल सिंह झंड, डी.टी.एफ. नेता जैमल सिंह, मास्टर कैडर यूनियन कपूरथला से नरेश कोहली और तरविंदर सिंह मल्ली सहित अन्य नेताओं ने भाग लिया। अध्यापक नेताओं ने कहा कि अप्रैल महीने से लेकर अब तक मिड-डे मील का खर्च अध्यापकों को अपनी जेब से करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा मिड-डे मील की राशि नए ‘स्पर्श पोर्टल’ के माध्यम से भेजने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है, जो काफी जटिल होने के कारण अध्यापकों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। उन्होंने मांग की कि इस प्रक्रिया को सरल किया जाए तथा स्कूलों को मिड-डे मील के लिए आवश्यक राशि समय पर और एडवांस में उपलब्ध करवाई जाए। नेताओं ने कहा कि अध्यापकों से लगातार अपनी जेब से पैसे खर्च करवाना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक मिड-डे मील की राशि एडवांस में नहीं आती, 1 अक्टूबर से अध्यापक अपने स्तर पर मिड-डे मील चलाने की जिम्मेदारी नहीं निभाएंगे।
फंड न आया तो खेलों के लिए भी जेब से नहीं लगाएंगे पैसे
बैठक के दौरान प्राथमिक स्कूल खेलों को लेकर भी अध्यापक संगठनों ने सख्त रुख अपनाते हुए फैसला किया कि यदि सरकार या विभाग द्वारा खेलों के लिए आवश्यक फंड जारी नहीं किए जाते तो अध्यापक वर्ग अपनी जेब से पैसे खर्च करके ये खेलें नहीं करवाएगा। नेताओं ने कहा कि स्कूलों में खेल करवाना सरकार और विभाग की जिम्मेदारी है तथा इसका आर्थिक बोझ अध्यापकों पर नहीं डाला जाना चाहिए। अध्यापक नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि किसी अधिकारी या अन्य अध्यापक द्वारा खेलों के नाम पर अध्यापकों से पैसे एकत्र करने की कोशिश की गई तो सभी अध्यापक संगठन एकजुट होकर संबंधित कार्यालय या स्कूल का घेराव करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि अध्यापक वर्ग पहले ही विभिन्न गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों और आर्थिक बोझ का सामना कर रहा है, इसलिए अब कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मौके पर अश्वनी कुमार, प्रदीप सिंह टोनी, अमृतपाल सिंह सहित अन्य अध्यापक नेता भी मौजूद थे।
